थैंक्स सलीम! तुमने मुझे रास्ता दिखाया

बदलाव , , बुधवार , 12-07-2017


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अशोक मधुप

पिछले दिनों किसी का एक लेख पढ़ा था। दिमाग में कट्टरता घुस गई थी। लिखने वाले ने कहा था कि कश्मीरी हमारे पैसे पर जिंदा हैं। इसी के बल पर उनका जीवनयापन होता है। हम जम्मू जाते हैं। वैष्णो देवी जाते हैं। अमरनाथ जाते हैं। कश्मीर घूमने जाते हैं। कश्मीर जाने वाले हम भारतीयों के वहां व्यय किए धन से कश्मीरियों का जीवन चलता है। पर्यटन कश्मीर का मुख्य व्यवसाय है। वही इनकी साल भर की रोटी रोजी का साधन है। 
सुझाव था कि गैर कश्मीरी पांच साल के लिए कश्मीर घूमने जाना बंद कर दें। पांच साल के लिए अमरनाथ जाना बंद कर दें। वैष्णो देवी जाना बंद कर दें। जम्मू-कश्मीर घूमना बंद कर दें। तो कश्मीरियों को नानी याद आ जाएगी। रोटी रोजी का संकट पैदा हो जाएगा। सेना पर पत्थर मारना भूल जाएंगे। पाकिस्तान के नारे लगाना भूल जाएंगे। देशद्रोह की बात भूल जाएंगे।

"मैं धार्मिक कट्टरता का शिकार हो गया था"

इस सोच पर मैंने तय किया था कि कश्मीरियों को सबक सिखाने के लिए पांच साल के लिए कश्मीर नहीं जाऊंगा। वैष्णो देवी नहीं जाऊंगा। अमरनाथ नहीं जाऊंगा। लगता है कि मेरी सोच गलत थी। मैं धार्मिक कट्टरता का शिकार हो गया था।
अमरनाथ यात्रियों पर हमले ने मेरी आंखें खोल दीं। मेरी सोच बदल दी। वहां सारे ही तो सेना पर पत्थर फेंकने वाले नहीं हैं। वहां सलीम भी तो हैं। आतंकवादियों के हमले के बीच अपनी जान पर खेलकर श्रद्धालुओं को बचाने वाले बस चालक भी तो हैं। मानवता की रक्षा के लिए खतरे उठाने वाले नौजवान भी तो हैं। ऐसे सलीम को हजार हजार सेल्यूट। बार-बार नमन।
कश्मीर की बगिया में सैकड़ों रंग के फूल हैं। सबकी महक अलग है। खुशबू अलग। सबको एक तराजू में तो नहीं तोला जा सकता। सबको एक पड़ले में तो नहीं रखा जा सकता। दूसरे हम उनके आय के साधन बंद करेंगे। जीवन की जरूरत में बाधाएं डालेंगे तो वे कुछ और रास्ते खोजेंगे। पत्थर फेंकने को प्रेरित करने वालों के हा‌थों का खिलौना बनेंगे। गलत रास्ते पर जाएंगे। पुरानी कहावत है- भूख इंसान को गद्दार बना देती है।
कश्मीर समस्या का इलाज वहां के रहने वालों के आय के साधन कम करना नहीं। वहां के विकास के रास्ते खोलना है। आय के स्रोत बढ़ाना है। यहां के पर्यटन को बढ़ावा देना है। वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा यात्रा को और लोक‌प्रिय बनाना है। ऐसे हालात पैदा करना है कि कश्मीरी नागरिक युवा हमें खुद कहें कि आप यहां घूमने आएं। अमरनाथ, वैष्णो देवी यात्रा पर आएं। आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हम लेंगे। सेना नहीं। आतंकवादी हमला होगा, तो आपकी ढाल हम बनेंगे। 

(लेखक बिजनौर ज़िले के वरिष्ठ पत्रकार हैं।)










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sagir :: - 07-12-2017
Dear sir Aap ka bahut-bahut sukriya aur aap k jaise logon ka is dusit mahul me age aana bahut jaruri hai. Thank you sir