फेसबुक पोस्ट पर बंगाल में हिंसा, ममता बनर्जी और राज्यपाल में ठनी

हमारा समाज , , बुधवार , 05-07-2017


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सत्येंद्र प्रताप सिंह

कोलकाता। पिछले दो दिनों में पश्चिमी बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में एक समुदाय की भीड़ ने दर्जनों दुकानें और घरों में आग लगा दी। इसके साथ ही उसने तकरीबन 6 पुलिस की गाड़ियों को फूंक दिया। ये हिंसा 11वीं कक्षा के छात्र की एर फेसबुक पोस्ट के चलते हुई। जिसमें उसने पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में कुछ आपत्तिजनक बात लिख दी थी। उसके बाद सौवीक सरकार नाम के इस बच्चे को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन धार्मिक अंधेपन के शिकार लोगों का गुस्सा नहीं थमा और उन्होंने तोड़फोड़ और आगजनी शुरू कर दी।

ममता और केशरी नाथ त्रिपाठी।

घटना वाले इलाके बादुरिया के विधायक काजी अब्दुर रहीम का कहना है कि सरकार ने बच्चे की गिरफ्तारी की सूचना नहीं दी वरना हिंसा को रोका जा सकता था। इस बीच घटना को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के बीच नया वितंडा खड़ा हो गया है। ममता बनर्जी ने केशरी नाथ पर उन्हें फोन पर धमकाने का आरोप लगाया है और कहा है कि वह भाजपा के प्रखंड अध्यक्ष की तरह बर्ताव कर रहे हैं। ममता ने कहा कि “मैं यहां किसी की दया पर नहीं हूं। उन्होंने जिस तरीके से मुझसे बातचीत की, एक बार तो मैंने कुर्सी छोड़ने तक की सोच ली थी”। उधर त्रिपाठी ने ममता के रुख और भाषा पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि “हमारी बातचीत में ऐसा कुछ नहीं हुआ, जिससे ममता बनर्जी को लगे कि उनकी बेइज्जती हुई या उन्हें धमकाया गया या उन्हें अपमानित किया गया”।

क्या कहा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने

राज्यपाल ने फोन पर मुझे अपमानित किया है। उन्होंने मुझे  धमकी दी है। वह बशीरहाट में कानून व्यवस्था की बात कर रहे हैं। उन्हें मुझे इस तरह से अपमानित करने का कोई अधिकार नहीं है। राज्यपाल एक संवैधानिक पद है। उनको मालूम होना चाहिए कि उनको केंद्र की सरकार ने मनोनीत किया है। जबकि मैं बंगाल की जनता के द्वारा चुन कर आयी हूं। किसी भाजपा, माकपा, कांग्रेस की दया से मैं मुख्यमंत्री नहीं बनी। राज्यपाल की बातों को सुनकर एक बार तो मेरी इच्छा हुई कि मैं कुर्सी ही छोड़ दूं। मैं इस तरह के अपमान की अभ्यस्त नहीं हूं। मुझे कुर्सी छोड़ने में एक मिनट भी नहीं लगेगा। भाजपा नेताओं ने उत्तर 24 परगना के बशीरहाट में दो समुदायों में हुए विवाद के मुद्दे पर राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी से शिकायत की थी। राज्यपाल को दोनों पक्षों की बात करनी चाहिये। लेकिन राज्यपाल एक पक्ष की बात कर रहे हैं। ममता ने बजरंग दल, आरएसएस और भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग गोरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या कर रहें हैं। फेसबुक पर ग्रुप बनाकर झूठ और अफवाह फैला रहे हैं। अगर  ऐसे लोगों को पुलिस गिरफ्तार करती है, तो इसमें मेरा या मेरी सरकार का क्या दोष है।

क्या कह रहे हैं महामहिम राज्यपाल ?

राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस प्रकार से संवाददाता सम्मेलन में भाषा का प्रयोग किया है व  गलत व्यवहार किया है, इससे वह अवाक हैं। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री व राज्यपाल के बीच हुई बातचीत अत्यंत गोपनीय होती है और कोई भी इसे सार्वजनिक नहीं करता है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को अपमानित करने की बात को सिरे से नकारते हुए कहा कि "मैंने मुख्यमंत्री से कुछ नहीं कहा है। मैंने ना ही उनको अपमानित किया है, ना ही धमकी दी है और ना ही उनके साथ अमानवीय बातचीत की है। मैंने सिर्फ मुख्यमंत्री से राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने की बात कही है। वहीं, मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल के पद पर उठाये गये सवाल पर श्री त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी प्रदेश में राज्यपाल का पद भी संवैधानिक पद है। एक राज्यपाल, किसी भी राज्य का प्रमुख होता है और वह राज्य के सभी पार्टी, समाज व श्रेणी के लिए अभिभावक के समान होता है। अगर राज्य में किसी प्रकार की गंभीर समस्या पैदा होती है, जिससे राज्य की जनता प्रभावित हो रही है तो राज्यपाल को पूरा हक है कि वह राज्य सरकार से इस बारे में सवाल पूछे। राज्य में किसी प्रकार की अप्रिय घटना के बाद राज्यपाल मूकदर्शक बन कर नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान व भाषा से वह आश्चर्यचकित हैं।

घटनास्थल का नक्शा।

पूरा मामला क्या है?

बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट अनुमंडल के बदुरिया में अचानक सांप्रदायिक हिंसा भड़क गयी. दरअसल फेसबुक पर एक 'आपत्तिजनक' पोस्ट को लेकर यह हुआ. जिसके बाद राज्य सरकार ने स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस की मदद की खातिर अर्धसैनिक बल बीएसएफ के 400 जवान वहां भेजा। बीएसएफ  के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बल के दक्षिणी बंगाल फ्रंटियर से 400 जवान बशीरहाट सहित विभिन्न स्थानों पर तैनात किए गए हैं। उन्हें स्थिति पर काबू पाने की खातिर पुलिस की मदद के लिए तैनात किया गया है। वहीं पुलिस के अनुसार भीड़ ने कई स्थानों पर सड़कों को जाम कर दिया और दूसरे समुदाय के लोगों पर हमला किया तथा कई दुकानों को निशाना बनाया गया। किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। पुलिस ने कहा कि तनाव आस-पास के इलाकों जैसे केवशा बाजार, बांसतला, रामचंद्रपुर और तेनतुलिया में भी फैल गया। 

क्या कह रहा है विपक्ष ?

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने इस मुद्दे पर कहा है कि राज्यपाल को मुख्यमंत्री से पूछने का अधिकार है। मुख्यमंत्री पहाड़ में आग लगाकर चुपचाप तमाशा देख रही हैं। लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने भी उनसे यही पूछा था कि लोग अपना घर छोड़कर क्यों भाग रहे हैं। इसमें अपमान की क्या बात है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि राज्य की मुख्यमंत्री का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। लेकिन राज्यपाल को भाजपा का ब्लाक अध्यक्ष कह कर मुख्यमंत्री ने उनका भी अपमान किया है। राज्यपाल की भी अपनी मर्यादा है। मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्यपाल ने उनका किस तरह अपमान किया है।

 

 










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