मध्य वर्गीय जिंदगी की यादें ताजा करता है कहानी संग्रह “टैंपो हाई है”

नई किताब , , मंगलवार , 28-05-2019


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सत्येंद्र पीएस

विशाक्त हो चले राजनीतिक माहौल और राजनीतिक भक्ति में मित्रों के शत्रु में बदलने के इस दौर में कहानी संग्रह “टैंपो हाई है” मध्यवर्गीय जिंदगी की मुसीबतों, सोच और विडंबनाओं को उजागर करता है। विक्रम प्रताप सिंह सचान पेशे से इंजीनियर हैं। हालांकि इस कहानी की किताब के डिस्क्लेमर में यह लिखा गया है कि कहानी के पात्र व घटनाएं काल्पनिक हैं, लेकिन इसे पढ़कर यह संस्मरण की अनुभूति देता है।

आठ कहानियों के इस संग्रह में पहली कहानी “भोर के लुटेरे” मानसिक खौफ से साक्षात्कार कराती है। उस खौफ के दौरान मन में क्या क्या परिकल्पनाएं आती हैं और किस तरह का खौफ पैदा होता है, उसी के साथ कहानी चलती है और कहानी का पात्र अपने गंतव्य स्थल पर सुरक्षित पहुंच जाता है।

दूसरी कहानी मोहब्बतमैन डब्ल्लू एक मध्यमवर्गीय युवा की प्रेम कहानी है। वह नजरें बचाकर किस तरह प्रेमपत्र लिखता है, प्रेमिका से मिलने की योजना बनाता है। युवा के सामाजिक भय के कारण प्रेम परवान नहीं चढ़ पाता। इस कहानी का ट्रैजिक अंत तब होता है जब उस युवा का अरेंज मैरिज होने को होता है और उसकी भावी पत्नी कुछ रोज प्यार मोहब्बत की बातें करने के बाद इसलिए शादी से इनकार कर देती है कि एक लड़की को वह धोखा दे चुका होता है।

इस माध्यम से एक संदेश देने की कवायद की गई है। कहानी बिल्कुल कस्बाई और 90 के दशक के प्यार मोहब्बत वाली लगती है। कुछ इसी तरह एक और कहानी एयरहॉस्टेस को भी मोड़ दिया गया है, जिसमें एक युवा मां बाप की सामाजिक प्रतिष्ठा और उनके दबाव के कारण एयरहॉस्टेस से शादी नहीं करता। वह लड़की शादी के लिए अपने अस्तित्व को बदलने से इनकार कर देती है। एयर हॉस्टेस कहानी का अंत इस मोड़ पर होता है कि जब वह टीवी कार्यक्रम में 7 करोड़ रुपये जीत जाती है तो लड़का और उसके परिवार वाले बहू बनाने को तैयार हो जाते हैं, लेकिन लड़की विवाह से इनकार कर देती है।

“जी-6”, “छात्रावास से सहवास तक” कहानियां छात्रावास और छात्रों की स्थिति, उनकी बोलचाल की भाषा की झलक देती हैं। साथ ही छात्रों में वर्चस्व कायम करने की कवायद और लड़कियों को लेकर उनकी वैचारिक कुंठा दिखाई गई है। अध्यापकों के बारे में विद्यार्थियों की बातें और थोड़ी बहुत अध्यापकों की राजनीति भी सामने आती है।

अंतिम कहानी “बड़ी अम्मा”  1980-90 के दौर की याद दिलाती हैं, जब घरों में डकैतियां होती थीं। घर की महिलाओं में बड़े छोटे का झगड़ा, वर्चस्व, खेत खलिहान आदि की इसमें बेहतर चर्चा है।

अगर लेखन शैली की बात करें तो यह पूरी तरह आम भाषा में लिखी गई है। उपमा, रूपक, मुहावरों की बाढ़ सी दिखती है। पहली कहानी भोर के लुटेरे को लें तो “मेरे कान के पर्दों में कंपन पैदा कर दिया”, “घड़ी भर बोझ आंखों पर लाद दिया”, “क्राइम मास्टर गोगो टाइप”, “बेचारे सुदामा बन गए थे”, “ऐसे निशान छूटे कि आज तक सालते हैं” जैसी उपमाएं पूरी कहानी में लाद दी गई हैं। इसका आनंद भी लिया जा सकता है, बोझिल भी महसूस किया जा सकता है। हॉस्टल लाइफ की गालियां गुदगुदा भी सकती हैं, अनावश्यक भी लग सकती हैं। कुल मिलाकर कहानी संग्रह मध्यवर्गीय जिंदगी की एक सोच दर्शाती है।

पुस्तक का नाम- टेंपो हाई है

लेखक- विक्रम प्रताप सिंह सचान

मूल्य- 150 रुपये

प्रकाशन का वर्ष - 2019

प्रकाशक- नवजागरण प्रकाशन, नई दिल्ली

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Santosh Patel :: - 05-28-2019
शानदार विवेचना। विक्रांत जी एक सशक्त कवि भी हैं, गद्य में बढ़िया हाथ आजमाया है जैसा कि आपने उधृत की है। स्मृतियों का समुच्चय है विक्रम सिंह सचान की कहानियां। मैंने भी पढ़ी मुझे भी पढ़कर आनंद आया। जिस तरह से आपने समीक्षा की है इससे पाठकों में इस संग्रह को पढ़ने की उत्कंठा जगेगी। आपका आभार व विक्रम जी को शुभकामनाएं।