यू आर ए टैरेरिस्ट गांधी जी!

आड़ा-तिरछा , , शनिवार , 01-07-2017


satire-gandhi

वीना

साबरमती आश्रम से गांधी की अंहिसा की लाठी

जबसे मोदी ने गौरक्षकों को पकड़ाई

और झारखंड में तुरत-फरत उसका इस्तेमाल हुआ

डरी-सहमी, घबराई, शर्मिंदा

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की रूह

तबसे स्वर्ग में

‘‘माई नेम इज़ महात्मा गांधी एंड

आई एम नॉट ए टैरेरिस्ट’’

की पट्टी लगाकर अपनी सफाई देती घूम रही है!

 हास्य-व्यंग्य। फोटो : जनचौक

माहत्मा ज्योतिबा फुले और डा. भीमराव अम्बेडकर

आते-जाते चुटकी ले जाते हैं

यू आर ए टैरेरिस्ट गांधी जी!

 

भेदभाव के ज़हर में डूबा ‘‘हरिजन’’ नामकरण का तीर

क्या आपके तरकश से नहीं छूटा?

इसी पहचान के कारण वो चिह्नित किए जाते हैं

जिंदा जलाने,  क़त्ल,  बलात्कार,  अंग-भंग,  बहिष्कार करने के लिए

भारतभूमि के असली हक़दारों का हरि की आड़ में अपमान

उनकी मनुष्य जात का घात क्या आतंकवाद नहीं?

 प्रतीकात्मक तस्वीर साभार : गूगल

अहिंसा का जाप करने वाले आप ने होनहार नौजवान भगतसिंह के प्राण

हिंसावादी विदेशी हुक्मरानों के हवाले कर दिए

और आप कहते हैं आप आतंकवादी नहीं?

 

जिन टाटा-बिड़लाओं को ट्रस्टी बना आए हो

देश की धन-संपदा,  कानून का

देखिये,  उन्होंने खि़लाफ बोलने वालों को

आतंकवादी,  नक्सली,  देशद्रोही घोषित कर

इंसान की खाल तक को प्रस्तुत करने वाले

एक नहीं अनेक टिड्डी दल बना लिए हैं

पूंजीवाद की पैरोकार तुम्हारी बनियागीरी

क्या इस खूनी डकैती की हिस्सेदार नहीं?

 

जिन्हें सौंपी थी अपनी जात-धर्म-संस्कृति की ठेकेदारी

वही उत्तराधिकारी निकल पड़े हैं आज आपका वध करने

आपके पूंजीवादी दोस्त अब उन्हें चाहते हैं

नाओ यू आर ए टैरेरिस्ट गांधी जी

क्या इन इल्ज़ामों से छुटकारा पाने के लिए

गांधी जी अपने राम के दरबार में सत्याग्रह,  रूहदहन आंदोलन करेंगे?

क्या गांधी जी का साथ दे पाएंगे श्री राम?

 

क्या मनु, कौटिल्य,  गोलवलकर,  ‘वीरसावरकर आदि-आदि

बाबरी मस्जिद ध्वंस के एहसान जताकर राम को प्रभावित करने में कामयाब हो जाएंगे?

 

राममंदिर अभी बना नहीं है,  क्या करेंगे अब श्री राम?

क्या काम करेगा अशोक सिंघल का दबाव?

 

पहले शूद्र शंबूक और अब वैश्य राम भक्त गांधी बनेंगे

ब्राह्मणों की चाल और राम की तलवार का शिकार?

 प्रतीकात्मक तस्वीर साभार : गूगल

सरदार पटेल और नेहरू देंगे किसका साथ?

क्या गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को भी

मनु और गोलवलकर की सिफारिश पर दी गई है स्वर्ग की सौगात

क्या गांधी की रूह को भी होना पड़ेगा नाथू की गोली का शिकार?

या गांधी रूह को दिया जाएगा इच्छा मृत्यु का अधिकार?

और वो चुनेगें राम की तलवार?

 

ज्योतिबाफुले, भीम, पेरियार, कबीर, रैदास, रामायण रचियता वाल्मीकि,

नेहरू, मौलाना आज़ाद और शिवाजी महाराज सब हैं साथ

गांधी तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं, इंकलाब ज़िंदाबाद के नारों से

मनु, गोलवलकर के स्वर्ग की दीवारें कांपने लगी हैं

क्या अब धरती और स्वर्ग दोनों पर एक साथ होगा इंकलाब

और एक सवाल, अब जबकि अपनी अहिंसा पर मान करने वाले गांधी स्वयं हिंसा के आरोपी बना दिए गए हैं इन परिस्थितियों में गांधी द्वारा आतंकवादी करार दिए गए शहीद नौजवान भगतसिंह और नेताजी सुभाष चंद बोस के बारे में उनके क्या विचार हैं? क्या गांधी को अब होगा भगतसिंह को फांसी से न बचाने का अफसोस? क्या परिस्थितियां गांधी को समाजवाद की मानवता और पूंजीवाद की भयानकता को समझने में मददगार होगी

इन सभी सवालों के प्रमाणित जवाब हमें मिलेंगे स्वर्ग नगरी के एकमात्र होनहार पत्रकार नारदमुनि के सौजन्य से। तब तक धरती से देखते-सुनते रहिये गांधी की अहिंसा लाठी की हिंसा के समाचार।

(हास्य-व्यंग्य के तौर पर यह लेखक के निजी विचार हैं। जनचौक का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं है।)










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