असली शंबूकों से घबराई भाजपा लाई कठपुतली शंबूक

आड़ा-तिरछा , , बृहस्पतिवार , 22-06-2017


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वीना

पहली नज़र में पत्रकार राना अयूब पर मानहानि का मुकदमा बनता है। नौजवान कलयुगी पत्रकारों की यही समस्या है। जल्दबाज़ बहुत हैं। मुंह खोलने से पहले अगर वो वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में विस्तार से की गई व्याख्या पढ़ लेतीं कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने शूद्र शंबूक का वध क्यों किया? या ब्राह्मण पुराण में उल्लेखित अध्यात्म रामायण पर ही एक नज़र डाल लेतीं तो उन्हें शंबूक का वध और रामनाथ कोविंद को सिंहासन से क्यों नवाज़ा गया है साफ हो जाता।

प्रतीकात्मक तस्वीर

एक पत्रकार होने के नाते राना अयूब से बड़ा अपराध हुआ है। बगैर तथ्यों को जाने उन्होंने सही को ग़लत कह डाला। उन्हें सीखना चाहिये ब्रह्मांड के पहले पत्रकार नारदमुनि से। अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए वे तीनों लोक में मशहूर थे। और इसका कारण भी था कि भूत, वर्तमान, भविष्य की कोई जानकारी ऐसी नहीं थी जो उनके टुनटुने की पहुंच से परे हो। उस ज़माने में उनके नारायण-नारायण ट्वीट से डरे-घबराए रहते थे सारे लोक। देव लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक में कोई भी कांड घटित हुआ नहीं कि खोजी दूरअंदेशी पत्रकार नारदमुनि याद किए जाते।

प्रतीकात्मक तस्वीर साभार : गूगल

ब्राह्मणों के प्रवक्ता, संदेशवाहक नारदमुनि ने चार युगों की व्याख्या की। पहला जब पूरी तरह ब्राह्मणों का राज था उसे सतयुग कहा। जब क्षत्रियों में सत्ता विभाजन ब्राह्मणों की मजबूरी हो गया तो उसे त्रेतायुग कहा। मगर तब भी क्षत्रियों की इतनी औकात कहां कि ब्राह्मणों का कहा टाल सकें। त्रेतायुग के क्षत्रिय राम का सिंहासन न बचता अगर नारदमुनि राम को इस सच्चाई से आगाह न करते कि उनकी सत्ता ब्राह्मणों के दम पर है। धर्म-सत्ता के लड्डू में तुम्हें भागीदार बनाया है ताकि तुम बाकियों की नकेल खेंचकर उन्हें औकात में रख सको। अभी वैश्यों की औकात नहीं हमसे आखें मिलाने की और तुम्हारे राज में शूद्र हमें ठेंगा दिखा रहे हैं! ये बर्दाश्त न किया जाएगा। मरता क्या न करता। आदर्शवाद का दम भरने वाले राम ने तुरंत ज्ञानी शूद्र शंबूक को ढूंढ निकाला और जात बताते ही एक झटके में उसकी गर्दन धड़ से अलग कर डाली। शंबूक का ये कथन कि ज्ञान प्राप्त करना हमारा प्राकृतिक अधिकार है धरा रह गया। 

जब वैश्यों को सत्ता की थाली चाटने से ब्राह्मण रोक नहीं पाए तो उसे द्वापरयुग नाम दे दिया। और जब शूद्रों ने भी अपने हक़ का डंका पूरी दुनिया में पीट दिया तो ब्राह्मण इसे कलयुग का नाम देकर ज़ार-ज़ार रोये। बेचारा ब्राह्मण धर्म आज शूद्रों को अपनी ताल पर नचाने के लिए उनकी ताल पर नाचने को मजबूर है।

 

हास्य-व्यंग्य। फोटो : जनचौक

राना अयूब कुछ सीखो अपने सीनियर नारदमुनि से जिन्होंने जात-धर्म गणित का हिसाब लगाकर हज़ारों साल पहले अनुमान लगा लिया था कि कलयुग में यानी आज शूद्रों को सिंहासन पर बिठाना ही होगा। भले ही उस सिंहासन पर बैठने वाले के कान-आंख, हाथ-पैर, मस्तिष्क गिरवी रख लो। पर अब सिंहासन शंभूक के वंशजों को सौंपना समय की मांग है।

जल्दी-जल्दी युगों के चक्र को पूरा करने के लिए पंडे ताबड़तोड़ कलयुग को सल्टाने को आतुर हैं। ताकि फिर सतयुग का मुंह देखें। उतावले इतने हैं कि उनका सतयुग जिसमें उनका एकछत्र राज होता है उसकी कार्यवाही कलयुग में करने से बाज नहीं आ रहे। मुज़फ़्फ़रनगर, सहारनपुर कांडों की लाइन लगा रहे हैं। अपने युग के चहेते पत्रकार और युगज्ञाता नारदमुनि की ज्ञानवाणी पर भी उनका ध्यान नहीं है। कलयुग जिसमें की शूद्रों की बारी है ज्ञान और सिंहासन पर विराजमान होने की, उसमें ज़बरदस्ती अपनी नाक घुसेड़े जाते हैं। हमारी राय है ब्रह्म धर्म जो भी करे देख भाल के भई। कलयुग में उनके जीवन का गणित शूद्रों के हाथों में है। ऐसा नारद मुनि कह गए हैं। भीम आर्मी ने नारदमुनि की वाणी को सत्यापित करने का ट्रेलर दिखा ही दिया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर साभार : गूगल

नारद का गणित इस मामले में एकदम सटीक था कि कलयुग में शूद्रों की ज्ञान में भागीदारी के चलते धर्म के ठेकेदार ब्राह्मणों की आयु अपने न्यूनतम स्तर तक पहुंच जाएगी। आडवाणी जी का दुर्भागय ये है कि वो कलयुग में आए। जहां तथाकथित ‘‘धर्मात्माओं’’ की आयु कम हो जाती है और शूद्र विद्ववानों का वध वर्जित। इसी कलयुग के चलते उनकी आंखों के सामने ब्राह्मण माला जपते-जपते उनके हिस्से की मलाई एक शूद्र चाट गया और वो बेबस खड़े देखते रह गए। ब्राह्मण धर्म की इस दुर्दशा का मूक दर्शक बनने के लिए स्वयं संघ ब्राह्मण ब्रिगेड मजबूर है। क्या करें समय का फेर है।

और राना अयूब जैसे नासमझ हैं कि समझते ही नहीं। अपनी अज्ञानता के कारण जले पर नमक छिड़क रहे हैं। माना कि समय चक्र के कारण ब्राह्मणों के बुरे दिन चल रहे हैं पर ऐसा भी क्या कि कोई भी आए और धोती खींच कर चला जाए! 

भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा का तिलमिलाना एक दम वाजिब है। राना अयूब के खिलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज होनी ही चाहिये। बाकी सतयुग बस आने ही वाला है फिर पता चलेगा राना अयूब जैसों को, जब शिकायत न एफआईआर सीधा टिकट काटा जाएगा। फिर बोलकर दिखाए - And you thought Pratibha Patil was the worst bet” किसी की बेबसी पे हंसना अच्छी बात नहीं। क्या हुआ जो असली शंबूकों से घबराई भाजपा कठपुतली शंबूक का दाना डाल रही है!










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sumit seth :: - 07-12-2017
👍 चलो कोई तो सोचा