अपने समय का जिंदा दस्तावेज है “सत्ता की सूली”किताब: प्रकाश शाह

नई किताब , , बुधवार , 17-04-2019


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। मंगलवार को अहमदाबाद के सरदार पटेल स्मृति भवन में  "सत्ता की सूली" पुस्तक का विमोचन किया गया। इस मौक़े पर मुख्य अतिथि के तौर पर मशहूर गुजराती लेखक एवं निरीक्षक पत्रिका के संपादक प्रकाश शाह, पूर्व आईपीएस और लेखक राजन प्रियदर्शी, शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुखदेव पटेल, पाटीदार अनामत आंदोलन के अतुल पटेल और मजदूर पंचायत के नेता जयंती पंचाल मौजूद थे। 

शुरुआत में जनचौक के संपादक महेंद्र मिश्र ने पुस्तक का संक्षेप में विवरण दिया। मिश्र ने अपने वक्तव्य में बताया कि "जब से गोदी मीडिया का दौर शुरू हुआ मुख्य धारा की मीडिया के साथ जुड़कर ईमानदार अथवा बेबाक पत्रकारिता करना असंभव सा हो गया है। इसीलिए हम लोगों ने मुख्यधारा से किनारा कर जनचौक नाम से अपना पोर्टल शुरू किया। जज लोया की संदिग्ध मौत को लेकर सबसे पहले कारवां मैगज़ीन ने खुलासा किया था। शुरू में हम लोग फॉलो अप स्टोरी कर रहे थे। लेकिन कुछ समय बाद जब मालिकान के दबाव में कारवां ने उन खबरों से किनारा करना शुरू किया तब आगे की जिम्मेदारी जनचौक ने संभाली। हालांकि बाद में मजबूरी बस ही सही कारवां को भी खबरें छापनी पड़ीं।" मिश्र ने आगे बताया इस पुस्तक में हमारा अपना कोई विचार नहीं है सब कुछ तथ्यों, दस्तावेजों तथा प्रकाशित खबरों पर आधारित है। 

कार्यक्रम में अपनी बात रखते मुख्य अतिथि प्रकाश शाह।

पहले हम अपने आप को केवल जज लोया तक सीमित रखना चाहते थे परंतु सारा मामला हरेन पांड्या और दूसरे कुछ पीड़ितों से जुड़ा हुआ था। इस मामले में सीधे-सीधे कुछ व्यक्तियों पर आरोप थे। लिहाजा पंड्या और लोया के बीच और उससे आगे की दूसरी मौतें मसलन सोहराबुद्दीन, कौसर बी, तुलसीराम प्रजापति, एडवोकेट श्रीकांत खंडेलकर, रिटायर्ड जज  प्रकाश थ्रोम्बे की मौतें भी इसी कड़ी का हिस्सा बन गयीं। किताब में सारी चीजें डॉक्यूमेंट के आधार पर दी गयी हैं।" मुख्य अतिथि प्रकाश शाह ने कहा कि "इसे किताबी शक्ल देना एक बुनियादी कार्य है।" शाह ने प्रशांत दयाल द्वारा जगृति पांड्या के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि “सत्ता के दबाव में परिवार के लोगों ने घटना को भूल जाना ही बेहतर समझा। ऐसे में कुछ लोगों ने (पत्रकार) पूरी घटना की कड़ी को जोड़ कर दस्तावेज़ तैयार किया है। यह एक बड़ा कार्य हुआ।" सुखदेव पटेल ने “सत्ता की सूली” किताब लिखे जाने को ऐतिहासिक कार्य बताते हुए लेखकों को बधाई दी। 

कार्यक्रम का एक दृश्य।

पाटीदार नेता अतुल पटेल ने सत्ता में बैठे लोगों को दमनकारी बताते हुए कहा कि अहिंसा के राज्य में इन लोगों ने हिंसा के रास्ते से सत्ता में पकड़ बनाई है। हम लोग आंदोलनकारी हैं लेकिन हमने किसी को पत्थर नहीं मारा है फिर भी सरकार ने मेरे खिलाफ 19-19 धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया है। इनके कारण ईमानदार पत्रकार मुख्यधारा से हटकर पोर्टल के माध्यम से आवाज़ें उठा रहे हैं हम लोग ऐसे पत्रकारों के साथ हैं।" राजन प्रियदर्शी ने अपने पुलिस में रहने के दौरान नरेंद्र मोदी समेत सत्ता में बैठे लोगों से जुड़ी कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि सत्ता कैसे पुलिस का दुरुपयोग करती है। अपने तजुर्बे को साझा करते हुए उन्होंने इस किताब के लेखन को हिम्मतवाला कार्य बताया। 

आपको बता दें कि राजन प्रियदर्शी ने भी “प्रजा द्रोही कुप्राचारक” नाम की पुस्तक लिखकर प्रधानमन्त्री मोदी की असलियत बयान की है। "सत्ता की सूली" पुस्तक amazon से online खरीदी जा सकती है। पुस्तक के विमोचन की जानकारी मिलते ही इंटेलिजेंस सक्रिय हो गई। जिसके कई प्रमाण देखने को मिले। कार्यक्रम का संचालन कलीम सिद्दीकी ने किया। कार्यक्रम में उपास्थित मेहमान एवं अन्य लोगों का स्वागत मुजम्मिल मेमन ने किया।

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