गुनाह क्यों हो एयर स्ट्राइक के सबूत मांगना?

मुद्दा , , सोमवार , 04-03-2019


airstrike-plane-balakot-congress-digvijay-modi-pak-imran-army

प्रेम कुमार

लोग डर रहे थे। कैसे पूछें। किस तरह जानें। कौन बताए कि 26 फरवरी को एयर स्ट्राइक जो बालाकोट में हुई, उसमें आखिर हुआ क्या। मीडिया ने बताया था कि जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी शिविर तबाह हो गया, किसी ने जैश-मोहम्मद का मुख्यालय तबाह होने की बात कही, किसी ने 300 आतंकियों का सफाया होने का दावा सूत्रों के हवाले से बताया, तो कोई 350 और किसी ने कहा 40 का बदला 400 आतंकियों को मारकर लिया गया है। सेना की भी ब्रीफिंग सामने आयी। एयरस्ट्राइक की पुष्टि हुई। लेकिन उसने संख्या को लेकर कोई पुख्ता बात नहीं कही।

26 फरवरी के बाद से 3 मार्च तक 6 दिन बाद भी वास्तव में क्या हुआ, साफ नहीं हो सका है। एक तरफ पाकिस्तान के दावे की ख़बर है कि वह यूएन में भारत के एयर स्ट्राइक से 12 पेड़ों को हुए नुकसान की शिकायत करने वाला है, भारत पर इको टेररिज्म फैलाने की शिकायत करने वाला है, तो दूसरी तरफ अजहर मसूद के भाई के कथित ऑडियो टेप के हवाले से ख़बर आयी है कि एयर स्ट्राइक में उन मदरसों को नुकसान हुआ जहां जेहादी तैयार किए जाते थे। मगर, कितना नुकसान- एक बार फिर अनकही रह गयी।

दिग्विजय सिंह ने दिखलायी है ‘हिम्मत’

इस पृष्ठभूमि में हिम्मत एक बार फिर दिग्विजय सिंह ने ही दिखलायी है। यह कहते हुए कि वे सेना के दावे पर सवाल नहीं उठा रहे लेकिन एयर स्ट्राइक के नतीजों के बारे में तथ्य और प्रमाण की मांग करते हैं। दिग्विजय सिंह की ‘मुसीबत’ बढ़ा दी पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने। वे दिग्विजय सिंह की मांग का समर्थन कर बैठीं। आगे भी ‘मुसीबत’ आने वाली है जब दिग्विजय सिंह का बयान पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियां बनेंगी। 

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि जब ओसामा बिन लादेन को मारा गया, तो अमेरिका ने इसके सबूत तुरंत दुनिया के सामने जारी कर दिए। फिर भारत को एयर स्ट्राइक से जुड़े तथ्य सार्वजनिक करने में परहेज क्यों करना चाहिए? अक्सर सबूत मांगने को राजनीति करार दिया जाता है, इसे सेना पर अविश्वास के तौर पर पेश किया जाता है। मगर, सबूत नहीं रखने की और इसकी मांग किए जाने तक इंतज़ार करने की जो राजनीति होती है उस पर चुप्पी साध ली जाती है। सत्ताधारी दल को यह सुविधा रहती है कि वह सबूत चाहे जब पेश करे। मगर, विपक्ष को इसके लिए मांग करने की सुविधा भी वे छीन लेना चाहते हैं। यह गलत है।

राजनीतिक रूप से एनकैश हुई एयरस्ट्राइक, तो सबूत पर सियासत क्यों?  

एयरस्ट्राइक के सबूत मांगना क्यों सही है, इसका उत्तर जानने के लिए ये जानना जरूरी है कि सबूत नहीं देते हुए हमारी सरकार किन-किन बातों से संबद्ध रही है- 

एयर स्ट्राइक हुई, उसके बाद का उन्माद सत्ताधारी दल ने एनकैश किया। 

‘ये समय राजनीति का नहीं है’ ऐसा कहकर विपक्ष से सरकार की विफलताएं गिनाने का लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिया। 

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सर्वदलीय बैठक तक में नहीं पहुंचे।

न ही एयर स्ट्राइक के बारे में विपक्ष को सूचना देने की कोई जिम्मेदारी सरकार ने समझी।

पब्लिक डोमेन में एयर स्ट्राइक को लेकर अनुमान और अफवाह को मजे से फैलने दिया गया क्योंकि वह सत्ताधारी दल के अनुकूल था। 

खुद प्रधानमंत्री ने पुलवामा हमले के बाद से एयरस्ट्राइक और अब तक भी कुछ घंटों के लिए अपनी राजनीतिक गतिविधियां नहीं रोकीं। 

इस दौरान सियोल शांति पुरस्कार तक कूबल आए, जबकि वे आसानी कह सकते थे कि यह समय उनके लिए शांति पुरस्कार कबूल करने का नहीं है। ऐसा इसलिए करना चाहिए था क्योंकि वे खुद एयरस्ट्राइक की योजना को अंजाम देने में शामिल थे। पुरस्कार लेते वक्त भी इस योजना का वे हिस्सा जरूर रहे होंगे क्योंकि यह समय पुलवामा हमले और एयरस्ट्राइक के बीच का समय था।

क्या सबूत देने के लिए टाइमिंग का है इंतज़ार?

यह बात हम सभी जानते हैं कि एयर स्ट्राइक का वास्तविक सच एक दिन सामने जरूर आएगा। यह वक्त वर्तमान सरकार तय करेगी। इस फैसले के केन्द्र में होगी राजनीति। एक बार फिर एयरस्ट्राइक के बाद जैसा उन्माद पैदा होगा। एक घटना का दोहरा राजनीतिक फायदा उठाने की यह कोशिश तब होगी जब चुनाव करीब होगा। उम्मीद के मुताबिक तब भी विरोधी दलों को यह पूछने की इजाजत नहीं होगी कि यह वीडियो इस वक्त क्यों दिखाया जा रहा है। 

ऐसे में कांग्रेस नेता अगर एयर स्ट्राइक के सबूत अब मांगते हैं तो इसमें कोई आपत्तिजनक बात नहीं है। आखिर पाकिस्तान को यह कहने का मौका ही क्यों दिया जाए कि भारत के एयर स्ट्राइक से उनका कुछ नहीं बिगड़ा। आखिर जो बातें सत्य के रूप में प्रचारित हुईं। खुद सेना ने मरने वाले आतंकियों की संख्या पर चुप्पी साध ली। उसके प्रवक्ता ने यह जरूर कहा कि एयरस्ट्राइक के लक्ष्य को हासिल कर लिया गया है। वैसे मीडिया ने मरने वाले आतंकियों की सख्या 400 तक बतायी। ऐसे में उसे अफवाह बनने क्यों दिया जाए? क्या इससे भारतीय मीडिया छवि ख़राब नहीं होगी और आखिरकार भारत की विश्वसनीयता नहीं गिरेगी? इसकी चिन्ता अगर दिग्विजय सिंह करते दिख रहे हैं तो बिल्कुल जायज है।

(प्रेम कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल विभिन्न न्यूज़ चैनलों की गंभीर बहसों के पैनेल में उन्हें देखा जा सकता है।) 

 








Tagairstrike balakot congress digvijay modi

Leave your comment