लोकसभा चुनावों के शोर में डूब गया है राज्यों की विधानसभाओं के लिए होने वाला मतदान

साप्ताहिकी , , शुक्रवार , 05-04-2019


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चंद्रप्रकाश झा

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस ( एनडीए) के विकल्प के रूप में संभावित मोर्चा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस ( यूपीए) के घटक दलों के अलावा तेलगू देशम पार्टी  ( टीडीपी ) आदि उन दलों की भी चर्चा होती है जो अभी  यूपीए में नहीं हैं। इनमें  ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का बीजू जनता दल , पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी , दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी शामिल है  जो मोदी सरकार को हराने के लिए प्रत्यक्ष रूप से सामने आये हैं। आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एवं  टीडीपी के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू संभावित वैकल्पिक मोर्चा के सूत्रधार माने जाते हैं। नायडू पहले भी 1994 से 2004 तक लगातार मुख्यमंत्री रहे थे।

वह मोदी सरकार के खिलाफ नया मोर्चा बनाने  के लिए प्रयासरत रहे हैं और  राहुल गांधी ही नहीं अरविंद केजरीवाल तथा  ममता बनर्जी के भी संपर्क में हैं।  उन्होंने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने समेत कई कारणों से  मोदी सरकार और एनडीए का साथ छोड़ दिया।  यूपीए सरकार ने भी 2014 में यह कह कर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था हैदराबाद क्षेत्र को तेलंगाना को दे देने से आंध्र को राजस्व का भारी नुक्सान होगा।  बताया जाता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आंध्र के कांग्रेसी नेताओं के साथ बैठक में  कहा कि उनकी पार्टी अगर केंद्र की सत्ता में लौटती है तो तत्काल प्रभाव से आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा। पूर्व मुख्य मंत्री एन किरण कुमार रेड्डी हाल में अपने दल -बल संग फिर कांग्रेस में लौट आये हैं।  

आंध्र विभाजन 

वाय राजशेखर रेड्डी के निधन के बाद मुख्यमंत्री बने एन किरण कुमार रेड्डी ने, केंद्र में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए ) की सरकार के द्वितीय शासन काल में आंध्र प्रदेश के विभाजन के लिए ' आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम ' लाने के कदम के विरोध में फरवरी 2014 में कांग्रेस से इस्तीफा देकर अलग पार्टी बना ली थी। उनके इस्तीफा के बाद आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। राष्ट्रपति शासन के दौरान ही आंध्र प्रदेश का विभाजन किया गया। फिर दो जून को आंध्र प्रदेश का विभाजन विधिवत प्रभावी हो गया।

इसके फलस्वरूप दो राज्य , तेलंगाना और सीमांध्र (शेष आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र) बने। पूर्ववर्ती आंध्र प्रदेश के तीन क्षेत्रों, तेलंगाना, तटीय आंध्र और रायलसीमा में से तेलंगाना को भारत संघ -गणराज्य का 29 वां राज्य बना दिया गया। तेलंगाना में आंध्र प्रदेश के 10 उत्तर पश्चिमी जिलों को शामिल किया गया। प्रदेश की राजधानी हैदराबाद को दस साल के लिए तेलंगाना और आंध्र-प्रदेश की संयुक्त राजधानी बनाया गया। 2 जून 2014 को राष्ट्रपति शासन समाप्त होने के बाद नए राज्य तेलंगाना और शेष आंध्र प्रदेश , दोनों में संविधान के तहत विधानसभाओं का गठन किया गया। बाद में दोनों की अलग- अलग विधान सभा के लिए चुनाव कराये गए। विधान सभा की 176 सीटें हैं जिनमें से एक मनोनीत और शेष 175 निर्वाचित होते हैं। सदन में अभी टीडीपी के 99 सदस्य हैं। विपक्ष के नेता  जगन मोहन रेड्डी की  युवजन श्रमिक रायथू (वायएसआरपी) के 66 सदस्य हैं। 

पार्टियां 

भाजपा और विपक्षी कांग्रेस ने अपने बलबूते पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। लेकिन माना जाता है कि चुनाव के बाद कांग्रेस , टीडीपी से और वायइसआरपी , भाजपा से हाथ मिला सकती है। मोदी सरकार और एनडीए से भी  मार्च 2018 में अलग हो चुकी  टीडीपी  ने पिछले चुनाव में भाजपा से गठबंधन किया था। मौजूदा लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर जुलाई 2018 में हुई बहस में टीडीपी सांसद जयदेव गाला ने यहां तक कह दिया था , " प्रधानमंत्री जी, यह धमकी नहीं, श्राप है, आंध्र में भाजपा का भी कांग्रेस की तरह सूपड़ा साफ हो जाएगा।  क्योंकि इस सरकार के कार्यकाल में आंध्र प्रदेश के लिए किये गए वादे खोखले वादों की कहानी है। टीडीपी , आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद विजयवाड़ा नगर के पास अमरावती में बसाई जा रही नई राजधानी के लिए वित्तीय सहायता देने और इस प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग करती रही है।

वायएसआरपी   

वायएसआरपी का गठन अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे , डॉक्टर येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी के 2009 में गुजर जाने के बाद उनके पुत्र , वाय एस जगनमोहन रेड्डी ने किया ।  मोदी सरकार के खिलाफ लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की नोटिस , पिछले बरस के बजट सत्र में सबसे पहले वायएसआर कांग्रेस पार्टी ने ही दी थी। बाद में टीडीपी , कांग्रेस और अन्य दलों ने भी ऐसी नोटिसें दी। इन नोटिसों पर लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मानसून सत्र में  बहस कराई। बहस के उपरान्त मतदान में अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया। जगनमोहन रेड्डी पर भ्रष्टाचार के आरोप रहे हैं।  

पवन कल्याण

आंध्र में चुनावी मैदान में फिल्म अभिनेता से राजनीतिज्ञ बने पवन कल्याण की ' जन सेना पार्टी ' ने भी उतरने की घोषणा कर रखी है। इस नई पार्टी का उत्तर आंध्रा क्षेत्र में समर्थन बढ़ने की खबरें हैं।  उनके अभिनेता चिरंजीवी ने भी कुछ अर्सा पहले प्रजा राज्यम पार्टी बनाई थी जिसका बाद में कांग्रेस में विलय हो गया। भाई आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के सभी राज्यों में फिल्मी कलाकारों के राजनीति में आने की सुदीर्घ परपरा रही है। जहां एनटीआर ने आंध्र प्रदेश में शासन की भी बागडोर संभाली, वहीं तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम के दिवंगत एम करूणानिधि मुख्यमंत्री रहे। द्रमुक से अलग होकर गठित ,अन्ना द्रमुक के दिवंगत एम जी रामचंद्रन (एमजीआर) और दिवंगत जे जयललिता भी फिल्मों से ही राजनीति में आये। दोनों मुख्य मंत्री भी रहे। कर्नाटक और केरल में भी फिल्मी कलाकारों के राजनीति में आने की परम्परा रही है। जन सेना पार्टी ने आंध्र के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गठबंधन किया है।   

चंद्र बाबू नायडू   

आंध्र प्रदेश के पिछले विधान सभा चुनाव में टीडीपी ने 117 सीटें जीती थीं। सदन में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के लिए 88 सदस्यों के ही समर्थन की दरकार है। पहले भी मुख्यमंत्री रहे चंद्रा बाबू नायडू फिर मुख्यमंत्री बने। वह टीडीपी के संस्थापक एवं दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एन टी रामाराव (एनटीआर) के दामाद हैं। एनटीआर , तेलुगु फिल्मों के लोकप्रिय नायक रहे थे। जगनमोहन रेड्डी को सदन में विपक्ष के नेता का दर्जा मिला। कांग्रेस 21 सीटें ही जीत सकी। टीडीपी के साथ चुनावी गठबंधन करने वाली भाजपा को 9 सीट मिली। निर्दलीय और अन्य ने 14 सीटें जीती। चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर एवं आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामा राव के निधन के बाद टीडीपी की बागडोर संभाली थी। वह 1987 में पहला चुनाव लड़े थे।  उनके पुत्र नारा लोकेश को टीडीपी का भावी नेता माना जाता है जो अभी राज्य सरकार में सूचना प्रोद्योगिकी , पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री हैं।

आंध्र के आगामी चुनाव में मतदाताओं को रिझाने के टीडीपी सरकार ने जो उपाय किये हैं , उनमें राज्य के बेरोजगार स्नातक युवाओं को यथाशीघ्र 1,000 रुपये प्रति माह भत्ता देने की गत एक जून को की गई घोषणा शामिल है। टीडीपी ने 2014 के अपने पिछले चुनावी घोषणापत्र में इसका वादा किया था। आंध्र प्रदेश के नवनिर्मित विधान सभा भवन में 2016 के बजट सत्र से कामकाज शुरू हो चुका है। इसके अतिउन्नत भवन में नवीनतम तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें सदन में दिए जाने वाले भाषणों की स्वचालित अनुवाद की व्यवस्था, मतदान की स्वत: संचालित रिकॉर्डिंग व्यवस्था भी हैं। यह भवन आन्ध्र प्रदेश के विजयवाड़ा नगर के निकट बसाई गई नई राजधानी अमरावती में है।

बहरहाल , एक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य के मुख्य मुद्दों में सूखा -कृषि संकट , बेरोजगारी और मंहगाई प्रमुख हैं।  सभी  लोक सभा की सभी 25 सीटों और 15 वीं विधान सभा के सभी 175 निर्वाचित सीटों के लिए मतदान एक ही दिन 11 अप्रैल को होगा।   

(चंद्रप्रकाश झा वरिष्ठ पत्रकार हैं और वर्षों तक प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी यूएनआई में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।) 

 








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