अपनी राजनीति के लिए सेना का इस्तेमाल कर रही है बीजेपी

मुद्दा , , शनिवार , 04-05-2019


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हिमांशु कुमार

सेना के नाम पर दो तरह की राजनीति होती है

 एक लोकतंत्र को मज़बूत करने वाली

 जैसे कि इस बात के लिए जनता दबाव बना कर रखे कि किसी भी हालत में सेना का इस्तेमाल जनता के खिलाफ ना किया जाय

 अथवा कोई पार्टी सेना को किसी पड़ोसी देश को धमकाने के लिए इस्तेमाल ना कर सके

 सेना द्वारा अनैतिक तरीके अपना कर युद्ध के दौरान मानवाधिकारों का हनन या बलात्कार ना किये जाएँ

जब जनता अपनी सेना को संविधान और अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों के हिसाब से चलने की देखरेख करती है तो उसे सेना पर आधारित सकारात्मक राजनीति कहते हैं

दुनिया के कई पढ़े लिखे देशों की जनता अपनी सेना पर निगरानी रखती है

 लेकिन सेना के आधार पर दूसरी तरह की राजनीति भी होती है 

जैसे भाजपा करती है

 भाजपा जैसी क्रूर पार्टियां सेना को अपने राजनैतिक स्वार्थों के लिए इस्तेमाल भी करती है और उसे भ्रष्ट और झूठा बनने के लिए भी मजबूर करती है

 जैसे अभी भाजपा ने पकिस्तान के बालकोट में तीन सौ आतंकवादी मारे जाने और एक एफ सिक्सटीन जहाज़ मार गिराने का फर्ज़ी प्रचार किया

लेकिन जब अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया ने जाकर जांच करने के बाद भारत सरकार के इस दावे को झूठा बताया

 तो भाजपा सरकार ने सेना के अफसरों को मीडिया के सामने आकर भाजपा सरकार के झूठ का समर्थन करने के लिए मजबूर किया

 इसे अपने वोटों के लिए सेना का इस्तेमाल करना कहते हैं

 इस तरह की अनैतिक और गैर ज़िम्मेदार राजनीति करने वाली पार्टी को सैनिकों की ज़िन्दगी या खुशहाली से कोई मतलब नहीं होता

 इस तरह की तानाशाह पसंद पार्टी जनता को बदहाल बनाती है, अमीरों को फायदा पहुंचाती है और सेना का अपने फायदे के लिए गलत इस्तेमाल करती है

 आपने देखा कि जब एक सिपाही तेज बहादुर यादव ने सैनिकों को मिलने वाले खाने में पतली दाल और खराब रोटियों की शिकायत करी तो उसे नौकरी से निकाल दिया गया

अगर आप कभी दिल्ली के जंतर मंतर जाएँ

 तो वहाँ आपको एक ऐसा तम्बू मिलेगा जिसमें सेना और अन्य अर्ध सैन्य बलों के सैनिक कई सालों से धरने पर बैठे हुए हैं

 ये वो सैनिक हैं जिन्हें अफसरों के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने या खुद के और अपने साथियों के शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने की वजह से बर्खास्त कर दिया गया है

 मैं इन सैनिकों से कई बार मिला हूँ  

 आप अगर कभी इनसे बात करेंगे तो आपकी ऑंखें खुल जायेंगी

 सिपाहियों का भयानक शोषण और दमन होता है

 सैनिकों के लिए मेस में आने वाले फल मिठाइयां गोश्त दूध में से बड़ा हिस्सा अफसरों के घर पहुँच जाता है

 बहुत सारे सैनिकों को अफसरों के घरों में घरेलू नौकरों की तरह काम करना पड़ता है

 किसी किसी अफसर के घर पर तो पच्चीस पच्चीस सैनिक घरेलू नौकरों की तरह काम करने को मजबूर किये जाते हैं

 साहब के कुत्ते की सेवा करना घुमाने ले जाना, साहब के सास ससुर की सेवा, साहब की बीबी को शापिंग के लिए ले जाना, साहब के घर में झाडू मारना, पोछा लगाना, बगीचे में काम करना, साहब के पूरे परिवार के कपडे धोना काम सैनिकों को करने पड़ते हैं

 और ऐसा नहीं है यह काम कभी कभी करने पड़ते हैं

 कई सैनिक तो कई साल तक यही काम करने के लिए मजबूर होते हैं

 इसके अलावा सैनिक जब वापिस अपने गाँव आता है तो उसके साथ पुलिस की ज्यादतियों की घटनाएँ भी आम हैं

 इस विषय पर पान सिंह तोमर फिल्म भी बनाई गई थी

 मैं खुद ऐसे सैनिकों से मिल चूका हूँ और लिख भी चूका हूँ

 राजस्थान के सैनिक जयराम के कारगिल युद्ध में तोलोलिंग पहाड़ी पर कब्ज़ा करते समय बारह साथी मारे गये और उन्हें खुद भी दो गोलियाँ लगीं और उन्हें राष्ट्रपति द्वारा अशोक चक्र मिला था

 लेकिन जब इस सैनिक ने अपने गाँव में पहाड़ी खोदने वाले माइनिंग माफिया की शिकायत पुलिस से करी

 तो थानेदार ने इस सैनिक को थाने ले जाकर डंडे से मारा

 इसी तरह राजस्थान के ही एक अन्य सिपाही यादव के बारे में भी मैंने लिखा गया

जिसकी ज़मीन पर खनन माफिया ने कब्ज़ा करके अपना क्रेशर लगा दिया था

 जब इस सैनिक ने उनका विरोध किया तो सैनिक के छोटे भाई की पत्नी को गुंडों ने पीटा

 और पूरा परिवार कई दिनों तक जान बचाने के लिए रिश्तेदारों के यहाँ छिपा रहा

 पुलिस ने गुंडों की मदद करी और सैनिक की कोई मदद नहीं करी

 सरकार और भाजपाई हम पर इल्ज़ाम लगाते हैं कि हम सैनिकों के मानवाधिकारों के लिए आवाज़ नहीं उठाते

 लेकिन हम हमेशा सिपाही के इंसानी अधिकारों के पक्ष में हैं

 सिपाही को गालियाँ मत दीजिये उनसे घरेलू नौकरों की तरह काम मत करवाइए

 सिपाहियों से अपने देश के लोगों पर गोलियां मत चलवाइए चाहे वह मणिपुर हो या कश्मीर

 उन्हें घरेलू ज़रुरत के समय छुट्टी दीजिये

 सैनिकों को संविधान मानवाधिकार और अन्तर्राष्ट्रीय संधियों का प्रशिक्षण दीजिये

सेना को जनता की सेना बनने दीजिये

सेना को अम्बानी अडानी और मोदी की सेना बनने से रोकिये

हमारा सपना है कि एक दिन दुनिया में किसी भी देश की कोई सेना नहीं होगी

और सारी दुनिया की सीमाएं समाप्त हो जायेंगी

लेकिन जब तक हमारे सपनों की दुनिया नहीं बनती

तब तक सेना को लेकर यह हैं हमारी राजनीति 

(हिमांशु कुमार गांधीवादी कार्यकर्ता हैं।)








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Bal mukund Sahu :: - 05-04-2019
एक एक बात सत्य.है।