चर्चित दलाल नीरा राडिया के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त अरोरा के रहे हैं घनिष्ठ रिश्ते

साप्ताहिकी , , शुक्रवार , 07-12-2018


cec-neera-radia-election-commission-arora-rawat

चंद्रप्रकाश झा

भारत के पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव संपन्न हो जाने के बाद सबकी नज़रें 17 वीं लोकसभा चुनाव पर टिक जाएंगी। नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कह दिया है कि आम चुनाव के लिए तैयारियां पहले से शुरू हैं। वह इन तैयारियों के बारे में भली भांति अवगत हैं। क्योंकि वह इससे पहले 31 अगस्त 2017 से निर्वाचन आयुक्त थे। तब इस तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओम प्रकाश रावत थे। उन्होंने भी सेवानिवृत्त होने से पहले  इसके संकेत देकर यह भी कह दिया था कि आयोग लोक सभा के साथ ही सभी राज्यों की विधान सभाओं के भी चुनाव एक साथ कराने के लिए तैयार तो है पर यह व्यावहारिक कदम  नहीं होगा। उन्होंने सेवानिवृत्त होने के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत में नोटबंदी और चुनावों के लिए नए वैधानिक ढांचा की जरुरत समेत विभिन्न मुद्दों पर कई चौंकाने वाली बातें कही है। 

उन्होंने  सेवानिवृत्त होने के अगले दिन इंडियन एक्सप्रेस के साथ इंटरव्यू में कहा कि नोटबंदी से काले धन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर नगदी पकड़ी गई हैं। पांच राज्यों के नवम्बर -दिसंबर 2018 के चुनाव में लगभग 200 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं। यह दर्शाता है कि चुनावों के दौरान पैसा ऐसी जगहों से आ रहा है जहां पर ऐसे कदमों का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

रावत ने इस इंटरव्यू में दावा किया कि भारतीय ईवीएम मौलिक है। ईवीएम को इंटरनेट से कनेक्ट नहीं किया जा सकता है, इसलिए इसकी हैकिंग नहीं हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया की वजह से भारत में ही नहीं, दुनियाभर में चुनावों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। चुनावों में सोशल मीडिया के प्रभाव को कम करने के लिए फेसबुक ट्विटर, गूगल जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बात की जा रही है। इन कंपनियों से कहा गया है कि वे  विज्ञापनदाताओं के नाम पर चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश को रोकें।

उन्होंने बताया कि चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग के पास अभी 17 लाख ईवीएम हैं। सभी चुनाव एक साथ कराने के लिए 34 लाख ईवीएम की दरकार होगी। सभी चुनाव एकसाथ कराने पर खरीदे ईवीएम पांच बरस तक पड़े रहेंगे। इस तरह से एक साथ चुनाव में वित्तीय संसाधन की बचत के बजाय नुकसान ही होगा। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग ने चुनावों के बारे में मौजूदा वैधानिक प्रावधानों में बदलते समय और प्रौद्योगिकी के अनुरूप समुचित परिवर्तन लाने के लिए विधि मंत्रालय के विचारार्थ एक मसौदा तैयार करने का काम भी शुरू किया है।

अरोड़ा ने निर्वाचन आयोग के नई दिल्ली में निर्वाचन भवन स्थित मुख्यालय पर दो दिसंबर को अपना नया पदभार संभालने के बाद प्रेस से बातचीत में अगले आम चुनाव की  तैयारियों के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया। मई 2019 से पहले निर्धारित आम चुनाव 62 वर्षीय अरोड़ा जी की मुख्य देख रेख में होंगे। मोदी सरकार ने पांच राज्यों के नवम्बर-दिसंबर 2018 के चुनाव के बीच उन्हें नया मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त कर दिया। इस सिलसिले में राष्ट्रपति की अधिसूचना जारी करने के लिए केंद्रीय विधि मंत्रालय ने नियुक्ति का प्रस्ताव मोदी सरकार की मंजूरी मिलने के बाद पहले ही राष्ट्रपति भवन भेज दिया था। अरोड़ा की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर आधिकारिक रूप से अभी तक कुछ नहीं कहा गया है।

गौरतलब है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त पद पर इन दोनों की नियुक्ति को लेकर विवाद रहे हैं। अरोड़ा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस ) के 1980 बैच के राजस्थान काडर के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। वह राजस्थान में प्रशासनिक सेवा के दौरान कई जिलों में तैनात रहे थे और राज्य सरकार की सेवा से केंद्र सरकार की सेवा में प्रतिनियुक्ति पर सूचना एवं प्रसारण सचिव और कौशल विकास एवं उद्यमिता सचिव भी रहे थे। उन्होंने वित्त तथा और कपड़ा मंत्रालय और पूर्ववर्ती योजना आयोग में भी काम किया है। वह 2005 से 2008 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहने के अलावा राजकीय विमानन कंपनी , एयर इंडिया के बोर्ड के अध्यक्ष -सह -प्रबंध निदेशक भी रहे थे।

अरोड़ा का नाम 2010 में नीरा राडिया टेप के लीक होने पर चर्चा में आया था। इस टेप में सुनील अरोड़ा को कथित बहुचर्चित कॉरपोरेट दलाल नीरा राडिया से बातचीत करते हुए सुना गया था। इसमें ये दोनों न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार को लेकर बात कर रहे थे। कहते हैं कि सुनील अरोड़ा ने नीरा राडिया के साथ बातचीत में कहा था कि एक तत्कालीन जज ने रियल एस्टेट के एक मामले में 9 करोड़ रुपए की रिश्वत ली थी। 

सरकार के मंत्रियों, राजनीतिक नेताओं, अफसरों , मीडियाकर्मियों आदि के साथ नीरा राडिया की फोन पर हुई बातचीत के गुप्त रूप से किये गए इन टेप्स के लीक होने पर देश में बड़ा हंगामा हुआ था। मीडिया के एक हिस्से में इसके ट्रांसक्रिप्ट प्रकाशित हुए थे। ट्रांसक्रिप्ट के सामने आने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक विमानन के क्षेत्र में लॉबिंग की जाँच करने के आदेश दिए थे। सोशल मीडिया एक्टिविस्ट गिरीश मालवीय के अनुसार टीवी एंकर पुण्यप्रसून वाजपेयी ने 2010 के अपने ब्लॉग आलेख में लिखा था कि ' नीरा राडिया के फोन टैप से इंडियन एयरलाइंस के पूर्व सीएमडी सुनील अरोड़ा के जरिये सीबीआई , बीजेपी को भी घेरने की तैयारी में है। क्योंकि एयरलाइंस को लेकर जो भी गफलत सुनील अरोड़ा ने की वह तो राडिया फोन टैपिंग में सामने आया ही है। आखिर कैसे सुनील अरोड़ा , नीरा राडिया की पहुंच का इस्तेमाल कर एंडियन एयरलाइन्स के मैनेजिंग डायरेक्टर बनना चाहते थे।

लेकिन सीबीआई की नजर सुनील अरोड़ा के जरिये राजस्थान में करोड़ों की जमीन को कुछ खास लोगों को दिलाने में कितनी भूमिका थी, इस पर है। क्योंकि सुनील अरोड़ा राजस्थान में तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सचिव थे। तब सत्ता बीजेपी के पास थी। और बतौर निजी सचिव , बिना सीएम के हरी झंडी के जमीनों को कौड़ियों के मोल खरीद कर बांटने की कोई सोच भी नहीं सकता है। उसी दौर में राजस्थान की कई जमीनें कुछ खास नौकरशाहों को नीरा राडिया के जरिये मुफ्त या कौड़ियों के मोल बांटी गयीं। यह भी टेलीफोन टैपिंग में सामने आ गय़ी है'।

गिरीश मालवीय के अनुसार दिवंगत आलोक तोमर ने लिखा था कि  नागरिक उड्डयन मंत्री के तौर पर अनंत कुमार (अब दिवंगत) से नीरा राडिया की गहरी दोस्ती थी। इसी अंतरंगता का सहारा ले कर नीरा राडिया की सिर्फ एक लाख रुपए की लागत से बनी एक पूरी एयर लाइन चलाने का लाइसेंस उन्हें मिलने वाला था। उस वक्त सुनील अरोड़ा एएसी के निदेशक , इंडियन एयरलाइंस के प्रबंध निदेशक और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में संयुक्त सचिव भी थे। सुनील अरोड़ा ने अनंत कुमार के निर्देश पर राडिया की हास्यास्पद फाइल को रद्दी की टोकरी में डालने की बजाय सिर्फ कुछ मासूम से स्पष्टीकरण मांगे।

उस वक़्त की मीडिया में छपी बातों को खंगाल कर गिरीश मालवीय कहते हैं कि  नीरा राडिया ओर सुनील अरोड़ा के रिश्तों पर प्रसिद्ध पत्रकार शांतनु गुहा रे ने भी बहुत कुछ लिखा है। उनके एक पुराने लेख के अनुसार ' बातचीत के टेप राडिया का संबंध सुनील अरोड़ा से भी साबित करते हैं। अरोड़ा राजस्थान में तैनात आईएएस अफसर हैं जिन्होंने राडिया को अलग-अलग मंत्रालयों में तैनात अपने दोस्तों तक पहुंचाया। इन टेपों में रिकॉर्ड बातचीत उन नोट्स का हिस्सा है जो सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपे हैं।

ऐसा लगता है कि नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल पटेल के खिलाफ मोर्चा खोलकर इंडियन एयरलाइंस के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर की अपनी कुर्सी गंवाने वाले अरोड़ा ने राडिया के लिए भारत में कई दरवाजे खोले। यह पता चला है कि इंडियन एयरलाइंस के मुखिया के तौर पर अरोड़ा के कार्यकाल के दौरान सात विमान उन कंपनियों से लीज पर लिए गए थे जिनके एजेंट के तौर पर राडिया की कंपनियां काम कर रही थीं। वरिष्ठ आयकर अधिकारी अक्षत जैन कहते हैं, 'हमारे पास सबूत हैं कि राडिया की कंपनी ने अरोड़ा के मेरठ स्थित भाई को काफी पैसा दिया है।'

भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1977 बैच और मध्य प्रदेश काडर के अधिकारी ओम प्रकाश रावत ने इस सेवा से 31 दिसंबर 2013 को अवकाश प्राप्त किया। मोदी सरकार ने उन्हें 14 अगस्त 2015 को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया। उन्होंने भारत के 22 वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पद भार 23 जनवरी 2018 को सम्भाला।  वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में किसी विवाद से घिरे थे जिसकी जांच चल रही थी , यह जानकारी उन्हें निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करते वक़्त मोदी सरकार को निश्चित रूप से  रही होगी। भारत के किसी भी सांविधिक पद पर किसी की नियुक्ति से पहले सरकार को उस व्यक्ति के बारे हर तरह की जानकारी की पूरी फ़ाइल दी जाती है। उस जांच की फाईल उनके निर्वाचन आयुक्त बन जाने के बाद ही बंद की गई।

राजस्थान पत्रिका के भोपाल संस्करण ने सोमवार , 9 अप्रैल 2018 को इस प्रकरण पर रिपोर्ट प्रकाशित करने के पहले जब श्री रावत से संपर्क किया तो एक पंक्ति का जवाब मिला , " मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं कि मेरे बारे में कोई शिकायत हुई थी। जब शिकायत के बारे में पता नहीं तो उसकी फाइल बंद पर कैसे कहूं। " रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि रावत के खिलाफ 9 साल पुरानी शिकायत की जांच फाइल राज्य सरकार ने मुंगावली-कोलारस उपचुनाव के दौरान बंद कर दी। इसका प्रस्ताव मतदान वाले दिन 24 फरवरी को तैयार किया गया।

शिकायत के समय रावत  आदिम कल्याण विभाग में प्रमुख सचिव थे। उन पर आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव रहते हुए प्रदेश में बाहर से आए लोगों को अनुसूचित जाति का गलत तरीके से फायदा देने का आरोप था। सामान्य प्रशासन कार्मिक विभाग ने रावत के खिलाफ शिकायत के निस्तारण में उनकी सेवानिवृत्ति को आधार बनाया। फाइल में कहा गया कि रावत 31 दिसंबर 2013 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, ऐसे में पेंशन नियमों के तहत उन पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।

राजस्थान पत्रिका ने बताया कि रिटायरमेंट के 4 साल तक सरकार संबंधित अधिकारी के खिलाफ पेंशन नियमों में कार्रवाई कर सकती है। जांच में दोषी पाए जाने पर पेंशन बंद की जा सकती है। जांच में आरोप गंभीर पाए जाने पर सरकार रिटायरमेंट के चार साल बाद भी कार्रवाई कर सकती है। यहां तक कि आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है। ऐसी शिकायतों को समय रहते निपटाना होना चाहिए। लंबे समय तक शिकायतों को लटकाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। रिटायरमेंट के चार साल तक निपटारा नहीं होने पर आरोपी अधिकारी को फायदा मिल जाता है।

बहरहाल, अब यह देखना कि निर्वाचन आयोग के आयुक्त के एक रिक्त पद पर नई नियुक्ति को लेकर विवाद तो नहीं होता है। आयोग के  दूसरे आयुक्त अशोक लवासा हैं जिन्हें जनवरी  2017 में नियुक्ति किया गया था। यह तो भविष्य के गर्भ में है कि अरोड़ा जी की  देखरेख में 2019 में निर्धारित आम चुनाव निर्विवाद होते हैं या नहीं।

(चंद्रप्रकाश झा वरिष्ठ पत्रकार हैं और कई सालों तक न्यूज़ एजेंसी यूएनआई में काम कर चुके हैं।)

 








Tagcec neeraradia election suneelarora rawat

Leave your comment