गुजरात में सामने आया जातिवाद का विद्रूप चेहरा,सवर्णों के विरोध के चलते नहीं कर सके दलित दूल्हे घोड़ी की सवारी

मुद्दा , अहमदाबाद, बुधवार , 15-05-2019


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। किसी भी मां-बाप के लिए सबसे अधिक खुशी का दिन तब होता है जब उसका बेटा घोड़ी पर सवार होकर अपने घर बहु लाता है। दूल्हा घोड़े पर बैठकर नाच गाने के साथ जब दुल्हन के घर पहुंचता है तो दुल्हन की सहेली भागते हुए दुल्हन के पास जाती है और कहती है तेरा दूल्हा आ गया। उस दुल्हन को लगता है घोड़े पर बैठकर दूल्हा नहीं उसके सपनों का राजकुमार आया है। परंतु गुजरात के दलित दूल्हे घोड़े की सवारी करें और संगीत बजाए यह बात सवर्ण जातियों को पसंद नहीं है। इन जातिवादी मानसिकता वालों को यह भी पसंद नहीं कि कोई दलित दुल्हन अपने सपनों के राजकुमार को घोड़े पर देखे। 

पिछले एक सप्ताह से गुजरात के अलग-अलग गावों में घोड़े पर दलित दूल्हे की बारात को सवर्ण जातियों द्वारा रोका गया। 7 मई को कड़ी तहसील के ल्होर गांव के मेहुल परमार का विवाह था इनके पिता मनु भाई परमार ने अपने बेटे को दूल्हा बनाकर घोड़े पर बारात निकाली तो सवर्ण जातियों ने विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन जब विरोध के बावजूद दलितों ने घोड़े और संगीत के साथ बारात निकाली तो गांव के सरपंच ने दलितों का सामाजिक बहिष्कार का ऐलान कर दिया। बहिष्कार के बाद किराना स्टोर वालों ने दलितों के लिए अपने किराने में खरीद पर पाबंदी लगा दी। रबारी समाज से जुड़े दूध वालों ने दूध देना बन्द कर दिया। बहिष्कार ऐसा कि छोटे बच्चों को दुकानदार चॉकलेट भी बेचना बंद कर दिए। क्योंकि दलित समाज से लेन-देन ही नहीं प्रेम से बात करने पर पांच हज़ार  रुपए का दण्ड था। 

कौशर अली सैयद की मानें तो बहिष्कार ऐसा कि दण्ड के डर से मुस्लिमों ने भी दलितों से व्यवहार छोड़ दिया था। दलित एक्विस्टों ने अहमदाबाद से ट्रक में किराना पहुंचाया तो घर का चूल्हा जला।ल्होर की घटना अकेली नहीं थी। उसके बाद तो मानो सिलसिला चल निकला। प्रांतिज, सीतवाड़ा में भी सवर्णों ने दलित दूल्हों के घोड़े पर चढ़ने का विरोध किया। विरोध के कारण पुलिस बंदोबस्त में बारात निकाली गई। 

मोडासा तहसील खम्भीसर गांव के डाह्या भाई राठौड़ के बेटे ज्येश राठौड़ की बारात पुलिस के साथ निकाली गई। बारात रोकने के लिए सवर्ण जाति की महिलाओं ने मुख्य मार्ग पर बैठ कर बीच सड़क पर भजन कीर्तन और पूजा पाठ करना शुरू कर दिया। ताकि धर्म की आड़ में बारात रोकी जा सके। यहां दो समुदाय के बीच पत्थरबाज़ी भी हुई। दोनों समुदायों के विरुद्ध पुलिस ने मुक़दमा भी दर्ज किया है। डिप्टी एसपी फाल्गुनी पटेल का वीडियो वायरल हुआ है जिसमें पटेल समुदाय के लोग दलितों को गंदी गालियां दे रहे हैं।  वडाली तहसील के गाजीपुर गांव में भी दलित दूल्हे के घोड़े को रोकने की घटना सामने आयी है। 

प्रेस वार्ता कर जिग्नेश मेवानी और मार्टिन मैकवान ने नाराज़गी जताई

दलित नेता एवं वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवानी ने प्रेस वार्ता कर ऐसी घटनाओं को गुजरात को कलंकित करने वाली घटना बताया। मेवानी ने गुजरात पुलिस पर आरोप लगाया कि यह सभी घटनाएं पुलिस की छत्रछाया में हो रही हैं। मेवानी ने मुख्यमंत्री की चुप्पी को चिंताजनक बताया। मेवानी ने प्रश्न किया कि दलित सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा दलित गावों में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, गृह सचिव, डीजीपी ने इन गावों का दौरा क्यों नहीं किया। 

प्रेस कांफ्रेंस करते मेवानी।

मेवानी ने कहा कि "अरवल्ली जिले की Dy. SP फलगुनी पटेल ने दलित समाज के घरों में घुसकर उनकी पिटाई की। गंदी गालियां दीं। उसके बावजूद अभी तक फाल्गुनी के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट में FIR दर्ज नहीं हुई है।"  मेवानी ने फाल्गुनी पटेल को सस्पेंड कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। मेवानी ने आगे कहा "हमारी लड़ाई दलित बनाम सवर्ण नहीं है बल्कि भाजपा के सबका साथ सबका विकास माइनस दलित, आदिवासी और मुस्लिम जैसी सोच के खिलाफ है।" नवसर्जन ट्रस्ट के मार्टिन मैकवान ने अपने संबोधन में कहा "आज़ादी के 70 साल बाद जब इन पांच गावों से दलित अपनी बारात घोड़े पर निकालते हैं तो उन्हें रोका जाता है। दलित समाज का पुलिस कर्मचारी भी अपनी बारात डेढ़ सौ पुलिसकर्मियों के बंदोबस्त में निकलता है। ऐसी परिस्थिति में कहा जाता है कि राजनीतिक रंग न दो। क्यों न दें? यह राजनीतिक प्रश्न है। हालात ऐसे हैं कि यहां कानून का शासन नहीं। अराजकता का वातावरण है।"

अन्याय के विरोध में दलित सम्मेलन

जिग्नेश मेवानी ने गुजरात में दलितों से छुआछूत, सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव के विरोध में 18 मई को सम्मेलन का ऐलान किया है। साथ ही कहा है कि सभी 33 जिलों में विजय रूपानी सहित सभी भाजपा नेताओं का दलित समाज बहिष्कार करेगा । सम्मेलन में सभी दलित विधायकों को बुलाया जायेगा। मानव आधिकार आयोग को भी याचिका द्वारा सूचित किया जायेगा।








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