परप्रांतियों को मार-मार कर अपने सूबों से भगाने वाले उठा रहे हैं कमलनाथ पर अंगुली!

मुद्दा , , बुधवार , 19-12-2018


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गिरीश मालवीय

कल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बयान पर दिन भर हंगामा होता रहा सूप तो बोले ही बोले चलनिया भी बोलने लगी कि भाई ये तो बहुत गलत बात बोल दी।

दरअसल कल कमलनाथ ने निवेश को प्रोत्साहन देने वाली योजना की घोषणा करते शर्त रखी कि वे निवेशकर्ता कंपनी को इन्सेटिव (प्रोत्साहन) तभी देंगे, जब कंपनी मध्य प्रदेश के 70 प्रतिशत कर्मचारियों को रोजगार दे। आगे उन्होंने कहा कि कि मध्य प्रदेश के लोग बेरोज़गार रह जाते हैं, जबकि यूपी-बिहार के लोग नौकरियां ले जाते हैं।

भाजपा प्रवक्ता संजय टाइगर ने कहा कि देश का संविधान देश के किसी भी कोने में किसी भी नागरिक को रहने, पढ़ने और काम करने की आज़ादी देता है। उन्होंने कांग्रेस पर क्षेत्रीयता का बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस शुरू से क्षेत्रीयता, जातीयता, सांप्रदायिकता के आधार पर जनता को बांटकर शासन करती रही है।

चलिए मान लिया कि ऐसा कहना गलत है तो जब यही बात सालों पहले शिवराज सिंह ने कही थी तो आपने उस वक्त विरोध क्यों नहीं किया? शिवराज सिंह ने 2012 में ही कह दिया था कि प्रदेश में आने वाले उद्योगों में कम से कम 50 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को देना होगा, अपने उद्योग में जो 90 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देंगे उन्हें दो वर्ष तक टैक्स में रियायत दी जायेगी। एक हजार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले छोटे उद्योगों को भी कर में छूट दी जायेगी ओर यह बात बाकायदा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है आप मध्यप्रदेश की सरकारी वेबसाइट देख सकते हैं। 

यह तो हुई मध्यप्रदेश की बात अब आते हैं गुजरात पर जो प्रधानमंत्री मोदी का गृहराज्य रहा है बीते अक्टूबर में गुजरात में बाहरी लोगों के खिलाफ़ चले अभियान के कारण वहां से करीब 80 हज़ार से ज़्यादा लोग गुजरात छोड़कर भाग गए थे। हिम्मतनगर में एक 14 साल की बच्ची के साथ हुई बलात्कार की घटना के बाद वहां बाहरी लोगों के खिलाफ़ हिंसा भड़क उठी थी।

यह हिंसा सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि गुजरात की विजय रुपानी की सरकार औद्योगिक इकाइयों को नोटिस देकर 85 फीसद काम स्थानीय युवाओं को देने का दबाव बना रही थी, गुजरात श्रम व रोजगार मंत्रालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव विपुल मित्रा कह रहे थे कि राज्य सरकार गुजरात के युवाओं को औद्योगिक इकाइयों में रोजगार व नौकरी दिलाने के लिए राज्य सरकार पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के वर्ष 1995 में लाए गए एक कानून को अमल में ला रही है जिसके तहत सरकारी व गैर सरकारी औद्योगिक इकाइयों में 85 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को काम देना सुनिश्चित किया जा सके।

अच्छा गुजरात को भी छोड़ दीजिए। कुछ दिन पहले हिमाचल सरकार की कैबिनेट ने फैसला लिया था कि 80 फीसदी हिमाचलियों को नौकरी अनिवार्य कर दी जाए युवाओं को निजी क्षेत्र में 80 प्रतिशत से अधिक रोजगार मिले।

स्थानीय लोगों को प्रदेश में आने वाली नयी इंडस्ट्री मे रोजगार में प्राथमिकता की बात लगभग हर नया मुख्यमंत्री करता है लेकिन यहां इस खबर को ऐसे पेश किया जा रहा है कि यह कोई अनोखी बात बोल दी है।

(गिरीश मालवीय आर्थिक मामलों के जानकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं और आजकल इंदौर में रहते हैं।)

 










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