प्रधानमंत्री जी!आपकी भाषा मानवीय मर्यादा और राजनीतिक गरिमा की सरहदें ध्वस्त कर रही है

उर्मिलेश की कलम से , , सोमवार , 06-05-2019


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उर्मिलेश

आदरणीय प्रधानमंत्री जी

पहली बार आपको चिट्ठी लिखने के लिए मजबूर हो रहा हूं! आशा है, अन्यथा नहीं लेंगे और उचित लगे तो इस पर विचार करेंगे! 

सबसे पहले तो हम आपको बहुत विनम्रतापूर्वक सिर्फ यह याद दिलाना चाहते हैं कि आप इस देश के प्रधानमंत्री हैं! यकीन कीजिए, भारत नामक इस बड़े देश के प्रधानमंत्री आप ही हैं! 

हम आपकी तरह 'इंटायर पोलिटिकल साइंस' नहीं पढ़े हैं! संघ-दीक्षित भी नहीं हैं! 'हिन्दुत्व' के संस्कार, संस्कृति और धर्म-कर्म के ध्वजवाहक भी नहीं हैं! हम तो किसान-संस्कृति में पले-बढ़े! आज एक अदना सा पत्रकार हूं! किसी न्यूज चैनल या अखबार का संपादक भी नहीं हूं!

हमारी पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की है! बचपन पूर्वांचल में बीता! किसी तरह की सहानुभूति पाने के लिए हम आपकी तरह अपनी पारिवारिक-पृष्ठभूमि का हवाला नहीं देते!

इधर आपकी भाषा, आपका लहजा और आपके मुंह से उच्चरित अपशब्द किसी को भी भ्रमित कर सकते हैं कि ये किसी लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री के शब्द कैसे हो सकते हैं? बोलते वक्त, कहीं आप भी तो भूल नहीं जाते कि आप कौन हैं! यकीन कीजिए, आप यानी नरेंद्र दामोदर दास मोदी ही भारतीय गणराज्य के प्रधानमंत्री हैं! और जब भी आप सार्वजनिक मंच से बोलते हैं, वह भारत के प्रधानमंत्री बोलते हैं! 

अभी आपने दिवंगत राजीव गांधी पर अपमानजनक टिप्पणी की है! प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू पर आप और आपके दल के नेता अक्सर ही अपमानजनक टिप्पणियां करते रहते हैं!

दिवंगत राजीव आपसे बहुत पहले इस गणराज्य के प्रधानमंत्री थे! नृशंस आतंकी हमले में वह मारे गए! उनकी मां दिवंगत इंदिरा गांधी भी प्रधानमंत्री थीं। उनकी भी कट्टरपंथी-धर्मांध और सिरफिरे तत्वों ने ही हत्या की थी! श्रीमती गांधी के पिता जवाहर लाल नेहरू इस देश के पहले प्रधानमंत्री थे! आजादी की लड़ाई में कई साल वह जेल में रहे! उनके पिता मोतीलाल नेहरू भी आजादी की लड़ाई में लंबे समय तक जेल में रहे! 

इन सबकी आप आलोचना करें, यह आपका लोकतांत्रिक अधिकार है! पत्रकार के रूप में मैं भी इनमें कई नेताओं पर आलोचनात्मक टिप्पणियां लिख चुका हूं! कश्मीर के आधुनिक इतिहास पर मेरी एक छोटी सी किताब है, उसमें नेहरू जी की प्रशंसा और आलोचना, दोनों है! 

आप नेहरू जी से नहीं मिले रहे होंगे। शायद, इंदिरा जी और राजीव जी से मिले रहे होंगे। मेरे साथ भी ऐसा ही रहा! मैंने इंदिरा जी को देखा था और राजीव गांधी से मिला भी था! बातचीत भी की थी! पर आपकी तरह मैं भी जवाहरलाल नेहरू से न तो कभी मिला और न आमने-सामने कभी देखा! पर कई इतिहास ग्रंथों और स्वयं नेहरू जी की लिखी किताबों के जरिए उनसे अनेक बार मिलने का मुझे मौका मिला। लंबे समय से आप संघ और फिर भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं! काफी समय तक मुख्यमंत्री रहे। बहुत व्यस्त व्यक्ति हैं, इसलिए संभवतः आपको उनके बारे में या उनकी अपनी किताबें पढ़ने का मौका नहीं मिला

होगा! The Discovery of India या Glimpses of world History जैसी किताबों के जरिए आपकी अगर नेहरू जी से कभी मुलाकात हुई होती तो मोदी जी, यक़ीनन आपकी भाषा, आपके शब्द और आपके विचार ऐसे नहीं होते! 

पहले भी आपके तेवर कुछ कम तीखे नहीं थे! पर इधर दो-तीन दिनों से आपकी भाषा मानवीय मर्यादा और राजनीतिक गरिमा की सरहदें ध्वस्त कर रही है! आपकी भाषा और आपके विचार के बारे में मुझे क्या पड़ी थी, कुछ कहने और लिखने की! लेकिन आप प्रधानमंत्री हैं और मैं एक पत्रकार! इसलिए लिखने को विवश हो रहा है! आशा है, कुपित नहीं होंगे! 

                                                                                                                                                                   सादर, 

                                                                                                                                                                  उर्मिलेश








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som :: - 05-08-2019
उर्मिलेश जी, जब पत्रकार दलाल बन जाता है, तब ऐसा ही होता है कि उसे पिछले सत्रह साल से मोदी को दी जा रही गालियां याद नहीं रहतीं, लेकिन उसके जबाव से अपच हो जाता है। एक छोटा सा पत्र आप ढंग से लिख नहीं सकते - कहीं मैं, कहीं हम। स्व. राजीव गांधी की आलोचना से आप इतने व्यथित क्यों हुए? 'भ्रष्टाचारी नंबर वन' में कौन सा अपशब्द है? नीच, नपुंसक, कुएं का मेंढक, खून का दलाल, जहर की खेती, हत्यारा, रावण, हिटलर, बुचर ऑफ गुजरात, चोर आदि से भी बड़ी गाली है क्या यह? दलाली छोड़ें, जर्नलिज़्म करें।

som :: - 05-08-2019
Umesh Chandola, पता है कि भारत के सरकारी दस्तावेजात में आज भी भगत सिंह और उनके साथी आतंकवादी लिखे हैं।

Umesh Chandola :: - 05-06-2019
नास्तिक और शहीद भगत सिंह ने अपनी मृत्यु से 1 माह पूर्व "क्रांतिकारी कार्यक्रम का मसौदा " नामक एक लेख लिखा था जिसमें वह लेनिन की तर्ज पर बल प्रयोग के माध्यम से (बोल्शेविक क्रांति ) की तरह सत्ता हथियाने की बात कर रहे हैं । उसकी भी आतंकवाद कहकर आलोचना करने का नैतिक साहस मोदी जी को होना चाहिए । भगत सिंह के लेखो सांप्रदायिक दंगे और उनका इलाज ,मैं नास्तिक क्यों ह,धर्म और हमारा स्वतंत्रता संग्राम आदि लेखो की भी मोदी जी को आलोचना करनी चाहिए क्योंकि यह सारे ही लेख भाजपा आरएसएस के खिलाफ जाते हैं। मोदी जी के आदर्श सावरकर जी हैं जो कि महात्मा गांधी की हत्या के षड्यंत्र में दोषी पाए गए थे जिन्होंने दो बार अंग्रेजों को माफीनामा लिखा कि वह अब आजादी के आंदोलन में भाग नहीं लेंगे । बेटा समझ उन्हें माफ किया जाये। गोडसे उनके आदर्श हैं जिन्होंने महात्मा गांधी की हत्या करी । महात्मा गांधी और भगत सिंह पर भी निर्मम आलोचना करने से हमारे 56 इंच के प्रधानमंत्री क्यों लजाएं ?भारतीय जनता पार्टी RSS की राजनीतिक शाखा है वही आर एस एस जिसने 1925 से 1947 तक पूरी निष्ठा से अंग्रेजों की सेवा करी । कभी आजादी के आंदोलन में भाग नहीं लिया इसी लिए अंग्रेजों ने भी अपना वफादार समझकर r.s.s. पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया । उस आर एस एस पर सरदार पटेल ने महात्मा गांधी की हत्या के बाद प्रतिबंध लगाने की जो हिमाकत की उसके लिए पटेल की भी क्यों ना मोदी जी निन्दा करें ?http://www.shaheedbhagatsingh.in/hindi.html