दलों की उदासीनता के बावजूद राजनीति में बढ़ी है महिलाओं की दावेदारी

साप्ताहिकी , , शुक्रवार , 17-05-2019


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चंद्रप्रकाश झा


17वीं लोकसभा चुनाव में महिला साधिकारता के मुद्दे पर किसी भी ' प्रमुख ' पक्ष ने लगभग कोई चर्चा नहीं की। हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फारसी क्या। एक परिणाम तो साफ नज़र आता है। इस चुनाव में  कुल 8049 उम्मीदवार में से 10 प्रतिशत से भी कम सिर्फ 717 महिलाएं हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में कांग्रेस ने पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल को प्रत्याशी बनाया है। जो  इस सीट पर 48 बरस बाद पहली महिला प्रत्याशी हैं। जयपुर के पूर्ववर्ती राजघराना की गायत्री देवी 1962 से 1971 तक तीन बार जयपुर से स्वतंत्र पार्टी की सांसद रही थीं। लेकिन एक जानकारी यह भी उभर कर सामने आती है कि इस चुनाव में 2014 के आम चुनाव की तुलना में देश भर में औसतन ज्यादा मतदान हुआ और उसमें महिलाओं की सहभागिता सर्वाधिक रही है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार मौजूदा आम चुनाव के लिए कुल 543 सीटों के वास्ते सात चरणों में अब तक के छह चरण के पूरे हुए मतदान में औसतन अनुमानित करीब 60 प्रतिशत वोटिंग हुई। वोटिंग के प्रथम चरण में 69.5 प्रतिशत, दूसरे चरण में 69.4%, तीसरे चरण में 66% चौथे चरण में 63.2 प्रतिशत मतदान हुआ। पांचवें चरण में छह मई को सात राज्यों की 51 सीटों पर मतदान करीब 63 फीसद रहा। छठे चरण में भी कमोबेश यही गणित रहा। अब सातवें एवं अंतिम चरण में 19 मई को आठ राज्यों में 59 निर्वाचन क्षेत्रों में वोटिंग कराई जाएगी। आगे के मतदान के चरणों में भारी गिरावट नहीं हुई तो 2019 के आम चुनाव में मतदान का नया रिकॉर्ड बनना तय है। जिन बड़े राज्यों में वोटिंग पूरी हो चुकी है उनमें से सिर्फ दो , ओडिशा और तमिलनाडु में मतदान की दर 2014 की तुलना में कुछ कम रही है।

अरुणाचल प्रदेश , त्रिपुरा , सिक्किम , नागालैंड में भी 2014 की तुलना में कम मतदान हुआ है।  लेकिन मणिपुर , मेघालय , असम और मिजोरम में मतदान बढ़ा है। छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्षों और महाराष्ट्र में पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। मुंबई में भी 1989 के बाद से सबसे ज्यादा 55.1 प्रतिशत वोटिंग हुई। आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक में भी मतदान पिछली बार से अधिक हुआ है। त्रिपुरा में रिकॉर्ड 81.8 प्रतिशत मतदान हुआ कश्मीर क्षेत्र में मतदान कम हुआ।  श्रीनगर में सिर्फ 13 फीसद वोटिंग हुई और उस निर्वाचन क्षेत्र के 50 पोलिंग बूथ पर एक भी वोट नहीं डाले गए।

महिला मुख्यमंत्री

अनंतनाग में , जहां से पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती प्रत्याशी हैं 13.6 प्रतिशत ही मतदान हुआ। उनके गृह नगर बिजबेहरा में सिर्फ 2 फीसद मतदान हुआ। महिला मुख्यमंत्री देने वाले निर्वाचन क्षेत्र या राज्य में महिलाओं की हालत में सुधार आ जाए कोई जरूरी नहीं है , यह जितना बिहार में सच है उतना ही सच तमिलनाडु से लेकर कोलकाता और पश्चिम बंगाल में भी सच है। सभी राज्यों में मतदान का ब्योरा अंतिम तौर पर मिलने में समय लगेगा। लेकिन अब तक मिली अधिकृत जानकारी के अनुसार लगभग सभी राज्यों में महिलाओं और पहली बार मतदान करने वालों में भारी इजाफा हुआ है। असम , आंध्र प्रदेश , उत्तर प्रदेश , बिहार , केरल , छत्तीसगढ़ , मध्य प्रदेश और राजस्थान में 18 से 25 वर्ष की आयु के मतदाताओं के मतदान में करीब 3.3 प्रतिशत की तेजी दिखी है। केरल , कर्नाटक और महाराष्ट्र में वरिष्ठ नागरिकों ख़ास कर महिलाओं के मतदान में वृद्धि हुई है।

मोदी लहर

सोलहवीं लोक सभा के 2014 में हुए चुनाव में केंद्र में तब कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) के खिलाफ तथा भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के पक्ष में जो जनादेश निकला उसे  ' मोदी लहर ' कहा गया। मोदी लहर में देश में औसतन 66.4 प्रतिशत मतदान  हुआ था जो 1951 के प्रथम आम चुनाव से 2019 के पहले तक का रिकॉर्ड है। यह 2009 के आम चुनाव में दर्ज  58.2 % मतदान से करीब 8 प्रतिशत ज्यादा था। 

सत्ता विरोधी आक्रोश  

लेकिन 2019 में सत्रहवीं लोक सभा के हो रहे चुनाव में मतदान का नया रिकॉर्ड बनने के पूरे आसार है बेशक उसमें 2014 की तरह का बड़ा उछाला ना आये। सोचने वाली बात यह है कि जब अधिकतर चुनावी सर्वेक्षण  आदि के अनुसार इस  आम चुनाव में मोदी लहर जैसी कोई बात नहीं है तो इस भारी मतदान के क्या  अर्थ हैं। तब जब इन सर्वे में आम सहमति है कि  किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत मिलने के आसार नहीं है तो मतदान में यह तेजी कोई एंटी वेव , खासकर नए और महिला वोटरों में  सत्ता विरोधी आक्रोश तो नहीं इंगित करता है। इस एंटी वेव को  समझने में भाजपा महासचिव राम माधव के हालिया कथन से मदद मिल सकती है।  उन्होंने एक विदेशी एजेंसी , ब्लूमबर्ग के साथ भेंटवार्ता में चुनावी सर्वे को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर कहा कि उनके खेमा को सत्ता में लौटने के लिए ' बाहर ' से मदद लेनी पड़ सकती है।

चुनाव विशेषज्ञों की राय में मतदान में तेजी या गिरावट सत्ता परिवर्तन के संकेत देते हैं । कुछ टीकाकारों के अनुसार मौजूदा आम चुनाव में मतदान के रूख में केंद्रीय सत्ता पर काबिज भाजपा के विरोध में  पूरब से लेकर पश्चिम और दक्षिण से लेकर उत्तर तक मोटे तौर पर एक आल इण्डिया पैटर्न नज़र आ रहा है.  इसे  मोदी जी के प्रति नाकारात्मक मतदान अथवा एंटी वेव कहा जा सकता है। मतदान में बढ़ोत्तरी या कमी दुनिया भर में सरकार के गठन में मतदाताओं की दिलचस्पी अथवा बेरुखी का संकेतक माना जाता है।  मतदान में वृद्धी सत्ता- विरोधी रूझान ( एंटीइंकम्बैंसी ) माना जाता है।  मतदान में कमी का मतलब राजनीतिक प्रक्रिया में नागरिकों का अविश्वास दर्शाता है।

महिला आरक्षण

लोक सभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने की व्यवस्था करने के लिए एक विधेयक 2010 में ही राज्य सभा ने पारित कर दिया था। लेकिन इस विधेयक पर लोक सभा में कभी मतदान ही नहीं हो सका।  परिणामस्वरूप वह विधेयक 15 वीं लोकसभा के 2014 में भंग होने के उपरान्त स्वतः निरस्त हो गया। हाल में बीजू जनता दल के अध्यक्ष एवं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मौजूदा लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के टिकट वितरण में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की है। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने  इस चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के चयन में महिलाओं को 40 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ कदम आगे बढ़ कर लोक सभा और विधान सभाओं समेत सभी विधायिका और सरकारी रोजगार में भी महिलाओं  को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की है।

चुनाव में महिला के सन्दर्भ में एक रोचक जानकारी यह है कि मतदान में महिलाएं पुरुषों की तुलना में अब 1.5 प्रतिशत ही पीछे रह गयी हैं। प्राथम दो आम चुनाव के आंकड़े तत्काल उपलब्ध नहीं है।  लेकिन 1962 में तीसरे आम चुनाव में कुल मतदाताओं में से 63 प्रतिशत पुरुषों और 46 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाले थे।  2014 के चुनाव में कुल मतदाताओं में से 67.09 प्रतिशत पुरुषों और 65.63 प्रतिशत महिलाओं ने वोट डाले थे। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की अध्यक्ष यामिनी ऐय्यर ने डॉ प्रणय रॉय और दोराब सोपारीवाला की हाल में प्रकाशित पुस्तक ' द वर्डिक्ट ' और निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के हवाले से एक अध्ययन में बताया कि वोटर लिस्ट में महिला मतदाताओं के नाम दर्ज करने में काफी वृद्धि हुई है।  भारत में महिला मतदाताओं की संख्या 2014 के 47 प्रतिशत से बढ़कर 48 . 13 प्रतिशत हो गई है।  इसलिए 2019 के आम चुनाव में महिलाओं के मतदान का हिस्सा और भी बढ़ने की संभावना है।  लेकिन महिला प्रत्याशियों की संख्या 1962 से लेकर 1996 के बीच कुल उम्मीदवारों का 5 प्रतिशत से अधिक नहीं थी।

नए वोटर 

इंडियन एक्सप्रेस ने निर्वाचन आयोग से उपलब्ध डेटा का विश्लेषण कर कहा है कि लोक सभा की 543 में से उन 282 सीटों पर नए मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं जहां उनकी संख्या पिछली बार की जीत-हार के अंतर से ज्यादा है।  ये नए वोटर 1997 और 2001 के बीच पैदा हुए थे।  वे पिछली बार वोट देने के पात्र नहीं थे। इस विश्लेषण के अनुसार हर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र में औसतन 1.49 लाख नए मतदाता हैं। एक अन्य अध्ययन के अनुसार नए वोटरों में पश्चिम बंगाल सबसे आगे है जहां उनकी संख्या 20 , 01898 है। नए वोटर वाले शीर्ष राज्यों में पश्चिम बंगाल के बाद उत्तर प्रदेश ( 1675567 ) , मध्य प्रदेश ( 1360554 ) , राजस्थान ( 1282118 ) और तमिलनाडू ( 898759 ) है।  ऐसे में स्वाभाविक है कि ये नए वोटर चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

(चंद्र प्रकाश झा वरिष्ठ पत्रकार हैं और प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी यूएनआई में कई वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।)








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