यूपी के बाराबंकी में जहरीली शराब पीने से एक ही परिवार के 4 सदस्यों समेत 10 की मौत

उत्तर प्रदेश , , मंगलवार , 28-05-2019


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चरण सिंह

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है। इनमें से चार एक ही परिवार के हैं। कई लोग गंभीर हैं। बताया जा रहा है कि जहरीली शराब का धंधा कोई स्थानीय दबंग करता है। उसने नकली शराब बनाने की फैक्टरी खोल रखी है। क्षेत्र का सरकारी ठेका भी उसी के ही पास है। ग्रामीणों का कहना है कि वह यह जहरीली शराब अपने सरकारी ठेके पर बेचता है। ऐसी जानकारी मिल रही है कि जिस शराब को पीने से लोगों की मौत हुई है उसमें स्प्रिट या चूहे मारने की दवा मिलाई हुई थी। यह हादसा नहीं यह हत्याकांड है। शराब माफिया ने जहरीली शराब में जहर मिलाकर 10 लोगों की हत्या की है। 

इस घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आदमी की जिंदगी से कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है। क्षेत्र में चल रही नकली शराब की फैक्टरी प्रशासन को कैसे पता नहीं चली। सरकारी ठेके पर जहरीली शराब बेची जा रही है। आबकारी विभाग क्या कर रहा था। प्रदेश ही नहीं देश में भी सबसे अधिक शिकंजा कसने की जरूरत भ्रष्टाचार पर है। जो लोग पैसे कमाने के चक्कर में आदमी की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। उनको जेल के सलाखों के पीछे भेजा जाए।

देखने में आ रहा है कि प्रभावशाली लोग शासन और प्रशसन से मिलकर काले धंधे को बढ़ावा दे रहे हैं। इन धंधेबाजों को सबक सिखाना बहुत जरूरी है। यही लोग तो गलत ढंग से पैसा कमाकर चुनाव लड़ते हैं और विधानसभा और संसद में पहुंचकर अपने धंधे को बढ़ावा देते हैं। मंदिर, मस्जिद, राष्ट्रवाद, हिंदुत्व से ज्यादा जरूरी मानवता है। जिन परिवारों के ये लोग थे। उन परिवारों की स्थिति क्या हो रही होगी। ऐसा भी नहीं है कि इन लोगों ने कोई कच्ची शराब निकालकर पी हो। सब शराब ठेके से लेकर पी गई है जिसे सरकार चलवाती है। इस शराब की गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी सरकार ही होती है।

उत्तर प्रदेश में यह साल का दूसरा मामला है। इसी साल फरवरी में भी सहारनपुर और आसपास के इलाकों में भी जहरीली शराब ने करीब 50 लोगों की मौत हुई थी।

योगी सरकार ने औपचारिकता पूरी करते हुए जिला प्रशासन के चार अफसर और 8 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। इनमें जिला आबकारी अधिकारी शिव नारायण दुबे, आबकारी इंस्पेक्टर राम तीरथ मौर्य समेत 3 हेड और 5 कांस्टेबल शामिल हैं। पर अभी तक शराब माफिया के खिलाफ कुछ नहीं हुआ है।

मरने वालों में छोटेलाल (60), उनके बेटे रमेश (35), दो पोते सोनू (25) और मुकेश (28) एक ही परिवार के हैं, जो रानीगंज के निवासी हैं। इनके अलावा सोनू, राजेश, पिपरी महार, राजेंद्र वर्मा, सेमराय और महेंद्र ततहेरा शामिल हैं।

तीन भाई रमेश गौतम, मुकेश, सोनू के साथ उनके पिता छोटेलाल की मौत हो गई। रमेश की पत्नी रामावती ने बताया कि घर में शव को कंधा देने वाला भी कोई नहीं बचा।

जहरीली शराब माफिया पर कितना शिकंजा कसा जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी साल फरवरी महीने में ही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चार जिलों में जहरीली शराब पीने से 112 लोगों की मौत हुई थी। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सबसे ज्यादा 55 मौतें उप्र के सहारनपुर में हुईं। मेरठ में 18, कुशीनगर में 10 और उत्तराखंड के रुड़की में 32 लोगों की जान गई थी। यह सरकरों का लापरवाही भरा रवैया ही था कि यह धंधा बंद होने के बजाय और फलता फूलता रहा। 

इसी साल फरवरी में ही असम में भी जहरीली शराब के कारण 143 लोगों की मौत हुई थी। गोलाघाट जिले में 85 और सटे हुए जोरहाट जिले में 58 की मौत हुई। यह जहरीली शराब से हुआ प्रदेश का सबसे बड़ा हादसा बताया था।  








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