Tag: production

  • बिजली को लेकर देश में क्यों है हाहाकार?

    बिजली को लेकर देश में क्यों है हाहाकार?

    इस साल अप्रैल माह से ही देश के अधिकांश राज्यों में अभूतपूर्व गर्मी और लू चल रही है। देश के कई हिस्सों में कई-कई घंटों तक बिजली में कटौती चल रही है, जबकि कल देश में रिकॉर्ड तोड़ बिजली की मांग ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं। यह हाल अप्रैल में है,…

  • कोरोना के बाद वैश्विक स्तर पर कृत्रिम अर्थव्यवस्था की पैदाइश

    कोरोना के बाद वैश्विक स्तर पर कृत्रिम अर्थव्यवस्था की पैदाइश

    कोरोना-त्रासदी से उत्पन्न नई वैश्विक अर्थव्यवस्था द्वारा एक नई कृत्रिम वैश्विक अर्थव्यवस्था का जन्म हुआ है, जिसमें आवश्यकता, निवेश,  उत्पादन और उपभोग के  स्वरूप को बदल दिया गया है। इसके पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के द्वारा विकासशील देशों में शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन, पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन, तकनीकी परिवर्तन और आर्थिक सुधारों पर जोर…

  • किसान आंदोलन: गेहूं की कटाई के दौरान कर्मचारी संभालेंगे दिल्ली का मोर्चा

    किसान आंदोलन: गेहूं की कटाई के दौरान कर्मचारी संभालेंगे दिल्ली का मोर्चा

    किसान नेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि वह बिजली संशोधन विधेयक, 2020 को कानून में बदलने का विचार न करे, जो कि वादे का उल्लंघन होगा। क्योंकि केंद्रीय मंत्रियों ने किसान-नेताओं को आश्वासन दिया था कि इस बिल को रद्द कर दिया जाएगा। इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल किसान संगठनों…

  • कृषि कानून: मकान और कपड़ा के बाद अब रोटी पर कॉरपोरेट के कब्जे की तैयारी

    कृषि कानून: मकान और कपड़ा के बाद अब रोटी पर कॉरपोरेट के कब्जे की तैयारी

    (आज इलाहाबाद में संवाद द्वारा ‘कृषि कानून-2020’ विषय पर एक सामूहिक चर्चा  आयोजित की गयी। इसमें बतौर मुख्य वक्ता कवि, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता सुशील मानव ने हिस्सा लिया। पेश है इस मौके पर उनके द्वारा रखा गया पूरा वक्तव्य-संपादक) पूँजीवाद की मूल प्रवृत्ति उत्पाद और उत्पादन के संसाधनों पर कब्जा करने की होती है।…

  • देश के अधिकांश किसान न तो अपनी पैदावार बचा पाएंगे और ना ही जमीन

    देश के अधिकांश किसान न तो अपनी पैदावार बचा पाएंगे और ना ही जमीन

    देशव्यापी किसान आंदोलन ने समाज के सभी हिस्सों में एक नई जागृति ला दी है और एक व्यापक जनांदोलन की जमीन तैयार कर रही है। देश को जीवन देने वाले किसान समुदाय ने अपनी संप्रभुता का दावा जिस सूझबूझ से पेश किया है उससे पूरे जन जीवन में एक नई उम्मीद पैदा हुई है और…

  • बिजली का काम लोगों की जिंदगी में अंधेरा नहीं, प्रकाश करना है!

    बिजली का काम लोगों की जिंदगी में अंधेरा नहीं, प्रकाश करना है!

    किसी जुगनू की तरह मुझे उड़ जाने दो  घने अंधेरे में जरा रोशनी तो फैलाने दो  बीसवीं सदी में यह काम बिजली ने किया, रोशनी की आवश्यकता आदिकाल से रही है। पाषाण काल, अनुमानित 25 से 20 लाख साल पहले, पत्थरों को रगड़ने से पैदा हुई आग को रोशनी के रूप में प्रयोग किया जाने लगा।…

  • पीएम मोदी का ताजा जुमला- ‘हम किसानों को उद्यमी बनाना चाहते हैं’

    पीएम मोदी का ताजा जुमला- ‘हम किसानों को उद्यमी बनाना चाहते हैं’

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन करते हुए कहा है कि, “उनकी सरकार आज किसानों को अन्नदाता की भूमिका से आगे ले जाकर ‘उद्यमी’ बनाने की ओर प्रयास कर रही है।” वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने विखे पाटिल का उल्लेख करते हुए, अपने…

  • हरिवंश पर दूसरी किश्त: तो क्या सरकार उस कोयले के आयात पर रोक लगा देगी जिसमें अडानी की एक तिहाई हिस्सेदारी है?

    हरिवंश पर दूसरी किश्त: तो क्या सरकार उस कोयले के आयात पर रोक लगा देगी जिसमें अडानी की एक तिहाई हिस्सेदारी है?

    अब देखें कि भारत में आयात किस तरह के कोयले का किया जाता है और कौन हैं इसके आयात करने वाले। भारत में कोयले से 72% बिजली का उत्पादन होता है। 200 मिलियन मीट्रिक टन कोयले के सालाना आयात में कोकिंग कोयला 43.50 मिलियन मीट्रिक टन और नॉन-कोकिंग यानी थर्मल कोयला 156.38 मिलियन मीट्रिक टन शामिल…

  • महामारी का मायका कहां है?

    महामारी का मायका कहां है?

    दुनिया भर के राजनेता और वैज्ञानिक नोबल कोरोना वायरस का मायका ढूंढने में लगे हैं। यह जानते हुए कि वायरस कोई स्त्री नहीं है जिसे जब चाहो तलाक देकर बिना गुजारा और मेहर दिए खदेड़ दो। वह ऐसी व्याहता भी नहीं है जिससे दहेज मांग कर ससुराल से धक्के मार कर मायके भेज दिया जाए…

  • पुस्तक चर्चाः पीएम मोदी के न्यू इंडिया में मंदी

    पुस्तक चर्चाः पीएम मोदी के न्यू इंडिया में मंदी

    (एक ऐसे दौर में जबकि देश भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा है और समाधान के नाम पर सरकार के पास कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। तब आर्थिक विषय पर चर्चा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। और यह चर्चा अगर पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी हो तब उसकी अहमियत और बढ़ जाती है। वरिष्ठ…