नाम जोड़ने वाली योगी की सत्ता में धड़ से अलग किए जा रहे हैं अंबेडकर

मुद्दा , इलाहाबाद, शनिवार , 31-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

इलाहाबाद। अभी जब सूबे में योगी आदित्यनाथ की सरकार महानायक डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम में राम जुड़वाने की कवायद में जुटी है तभी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के गृह जिले इलाहाबाद में अंबेडकर की एक प्रतिमा को तोड़ दिया गया है।

घटना झूंसी के त्रिवेणीपुरम इलाके की है। यहां एक पार्क में स्थापित अंबेडकर की प्रतिमा से उसके सिर को अलग कर दिया गया है। घटना के बाद से इलाके में रोष है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इसी महीने में ये तीसरी घटना है। इलाहाबाद की पुलिस ने भी घटना की पुष्टि की है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पुलिस का कहना है कि “स्थानीय लोग सिर को धड़ से कुछ दूर पड़ा हुआ पाए।” बताया जा रहा है कि घटना की सूचना मिलते ही सपा और बसपा के समर्थक पार्क में इकट्ठा हो गए और उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी मांग शुरू कर दी।

ट्रांस गंगा के एडिशनल एसपी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि “हमने 295 ए (किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को भड़काने और उसे जानबूझ कर अपमानित करने) और 427 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। और मामले की जांच शुरू हो गयी है। प्राथमिकी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गयी है। अंदेशा यही है कि घटना रात में घटी है।” 

एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक तनाव के बढ़ने के बाद फूलपुर से नवनिर्वाचित सांसद नागेंदर पटेल भी घटना स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने कहा कि उनकी प्रशासन से बात हुई है और उन्होंने उनसे एक बड़ी प्रतिमा स्थापित करने को कहा है जिसे प्रशासन ने मान लिया है। उन्होंने आगे कहा कि “ये चौथी बार है जब इस प्रतिमा को क्षति पहुंचायी गयी है। इसलिए मैंने उनसे यहां एक पुलिस चौकी स्थापित करने के लिए कहा है। बदमाश तत्व लगातार दलितों के महापुरुष के साथ ऐसा कर रहे हैं ये बेहद शर्मनाक है।”

वहां एकत्रित सपा-बसपा के नाराज समर्थकों ने तुरंत कार्रवाई की मांग के साथ नारेबाजी शुरू कर दी। इलाहाबाद जोन के बीएसपी अध्यक्ष आरके गौतम ने कहा कि बाबा साहेब की इस प्रतिमा के साथ हुई इस घटना के बाद उनकी पार्टी के समर्थक बहुत परेशान हैं। 

इस बीच यूपी में इस तरह से मूर्ति तोड़ने की घटनाओं की बाढ़ आ गयी है। हाल के दिनों में आजमगढ़, मथुरा और मेरठ में भी इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गयी हैं।

इससे पहले सरकार ने अंडेबकर के नाम में परिवर्तन का नोटीफिकेशन जारी कर दलित समूहों को नाराज कर दिया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि सरकार को याद रखना चाहिए कि अंबेडकर ने जाति व्यवस्था के चलते हिंदू धर्म को खारिज कर दिया था।

मूर्तियों को तोड़ने की घटनाएं त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति से शुरू हुई थी। उसके बाद बंगाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी तो दक्षिण में पेरियार की मूर्तियां तोड़ी गयीं।


 










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