आसाराम मामले में धीमी जांच के लिए गुजरात सरकार को फटकार

इंसाफ की मांग , नई दिल्ली/अहमदाबाद, मंगलवार , 29-08-2017


asaram-case-supreme-court-gujarat-government

जनचौक संवाददाता

गुरमीत राम रहीम के मामले में जहां कानून-व्यवस्था न संभाल पाने को लेकर हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाई और केंद्र सरकार पर कड़ी टिप्पणियां कीं, वहीं आसाराम मामले में धीमी जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को फटकार लगाई है।

दो बहनों से बलात्कार का मामला

आपको मालूम है कि खुद को संत बापू कहलाने वाला आसाराम भी सूरत की दो बहनों से बलात्कार के मामले में जेल में बंद है। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के गांधी नगर में चल रही आसाराम के खिलाफ धीमी सुनवाई पर सवाल उठाए और गुजरात सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा कि मामले की सुनवाई में देरी क्यों हो रही है

सुप्रीम कोर्ट। साभार

अभी तक पीड़ित बहनों के भी बयान दर्ज नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अभी तक पीड़ित दोनों बहनों के बयान क्यों नही दर्ज किए। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को कहा है कि हलफनामा दायर कर केस की प्रगति के बारे में बताया जाए। मामले की सुनवाई दीपावली के बाद होगी।

आपको बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 12 अप्रैल 2017 को गुजरात सरकार से कहा था कि आसाराम के खिलाफ ट्रायल को लटकाए ना रखे। इस मामले में जितना संभव हो सके, गवाहों के बयान दर्ज कराएं जाएं क्योंकि आसाराम लंबे वक्त से जेल में है।  
गुजरात सरकार की ओर से कहा गया था कि इस मामले में गवाहों को लेकर तेजी से कार्रवाई चल रही है। 29 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं और 46 के बयान दर्ज होना बाकी हैं। इस बीच दो गवाहों की हत्या कर दी गई और कई जख्मी हुए हैं। वहीं आसाराम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट सरकार को आदेश दे कि गवाहों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया में तेजी लाए जाए।

बलात्कार का आरोपी आसाराम। फाइल फोटो। साभार : गूगल

दरअसल आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अर्जी को ठुकराते हुए कहा था कि जब तक केस के गवाहों के बयान ट्रायल कोर्ट में दर्ज नहीं हो जाते, वो मामले की सुनवाई नहीं करेगा। आसाराम 2013 से जेल में बंद है।

आपको बता दें कि सूरत की दो बहनों ने आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं के खिलाफ अलग-अलग शिकायतों में बलात्कार, गैर कानूनी तरीके से बंधक बनाने सहित कई आरोप लगाए हैं। बड़ी बहन ने आरोप लगाया था कि अहमदाबाद के निकट आश्रम में वर्ष 2001 से 2006 तक उसका यौन शोषण किया गया।

सरकार पर कोई फर्क नहीं!

उधर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर कोई गंभीरता न दिखाते हुए कहा कि मुकदमे में तेजी लाने पर फैसला लेना अदालत का काम है। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है।  










Leave your comment