बस्तर में आज से शुरू हुई पत्रकारों की यात्रा

आप के वास्ते , , शुक्रवार , 24-11-2017


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तामेश्वर सिन्हा

बस्तर। छत्तीसगढ़ का माओवादी प्रभावित बस्तर की भूमि आए दिन रक्त रंजित होती रहती है। नक्सली,पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के बीच इस जंग में सच्ची सूचना देने में लगे पत्रकारों का काम काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। छत्तीसगढ़ का पत्रकार पुलिस और नक्सलियों के बीच पिस रहा है। बस्तर के पत्रकारों को पुलिस और नक्सली फरमान के दोधारी तलवार के बीच काम करना पड़ता है। हाल ही में 13 नवम्बर को नक्सलियों द्वारा जारी एक पर्चे में पत्रकारों के ऊपर आरोप लगाते हुए गलत ढंग से रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को मौत के घाट उतारने की बात कही है। इस घटना से पत्रकारों में काफी रोष व्याप्त हो गया है, पत्रकार असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं स्थानीय पुलिस ने इस घटना को लेकर कहा है कि असामजिक तत्वों का करतूत भी हो सकता है। क्याेंकि दक्षिण बस्तर सेंट्रल कमेटी हिडमा के नाम से पहली दफा पर्चा जारी हुआ है, दूसरी बात यह कि पर्चा पश्चिम बस्तर के बीजापुर जिले के उसूर तहसील में मिला है। बैनर में पश्चिम के बजाय दक्षिण का जिक्र है। हालांकि नक्सलियों ने अभी तक इस पर्चे में किसी भी तरह की सफाई नहीं दी है न ही खंडन जारी किया है।इस घटना से आहात-

पत्रकारों का एक दल आज 24 नवम्बर से 27 नवम्बर तक 247 किलोमीटर नक्सली प्रभाव क्षेत्र में बाइक यात्रा कर ये जानने की कोशिश  करेगा कि नक्सलियों को पत्रकारों की कौन सी रिपोर्टिंग गलत लगी है ?

बीजापुर प्रेस क्लब ने यह निर्णय लेते हुए घोषणा किया, ‘प्रदेश भर के पत्रकार 24 नवम्बर को बीजापुर में एकजुट होकर बाइक यात्रा करेंगे।’ गौरतलब हो कि महीने भर पहले पुलिस वायरलेस का एक कथित आडियो वायरल हुआ था इसमें रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार को पुलिस गोली मारने का आदेश दे रही थी, हालांकि पुलिस विभाग ने इस आडियो के जांच की घोषणा की थी जिसकी जांच अभी जारी है। 

नक्सलियों द्वारा जारी एक पर्चा

पहले भी पर्चे निकाल कर पत्रकारों को मिली धमकी  

विदित हो साल 2010 में दंतेवाड़ा के तीन वरिष्ठ पत्रकार अनिल मिश्रा, एनआरके पिल्लई ,यशवंत यादव को स्वाभिमान मंच के नाम से पर्चा जारी कर बस्तर छोड़ने और जान से मारने की धमकी दी गई थी। उस वक्त एसआरपी कल्लूरी दंतेवाड़ा एसएसपी थे।

बस्तर में बतौर आईजी रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसआरपी कल्लूरी के बस्तर कार्यकाल में पत्रकारों के ऊपर  अधिकतर पुलिसिया दमन हुआ है, उनके कार्यकाल में पत्रकार प्रभात सिंह, सोमारू नाग, संतोष यादव को फर्जी आरोपों के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, स्क्रॉल की महिला पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम के घर पर पुलिस से सहायता प्राप्त सामाजिक एकता मंच के द्वारा हमला किया गया उन्हें बस्तर छोड़ने पर मजबूर किया गया था, उसी वक्त बीबीसी के पत्रकार आलोक पुतुल के ऊपर भी हमले की साजिश रची गई थी।

इन घटनाओं तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बरकार रखने देश भर के पत्रकार बस्तर में एकजुट होकर विरोध जताया था। आप को बता दे कि आईजी एसआरपी कल्लूरी को मानवाधिकार के हनन के चलते बस्तर से हटाया गया था। एडीटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में भी बस्तर के पत्रकारो के ऊपर पुलिसिया दमन होने की बात कही गई थी, यही नही बस्तर में अभिव्यक्ति के आजादी के हनन का भी आरोप लगा था। 

छत्तीसगढ़ के पत्रकारों का एक समूह

पुलिस ही नहीं नक्सली भी टारगेट करते हैं पत्रकारों को

इससे पहले 12 फरवरी 2013 को सुकमा के पत्रकार नेमीचंद जैन की नक्सलियों ने हत्या कर दिया था। तो वही 2013 में ही बीजापुर के पत्रकार सांई रेड्डी को बासागुडा में रिपोर्टिंग के दौरान हत्या हुई थी। हत्या से पहले साईं रेड्डी का घर माओवादियों ने फूंका था और बाद में छत्तीसगढ़ पुलिस ने उन पर माओवादी समर्थक होने आरोप लगाकर जनसुरक्षा अधिनियम के तहत उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

नक्सलियों द्वारा पत्रकारों की हत्या को लेकर प्रदेश भर के पत्रकार बांसागुड़ा पहुंच कर विरोध जताया था, बस्तर के पत्रकारों ने किसी भी नक्सली रिपोर्टिंग का बहिष्कार कर सरकार से जवाब मांगते हुए पत्रकारों की हत्या को लेकर प्रदर्शन भी किया गया। पत्रकारों की हत्या को लेकर 22 पत्रकारों का दल अबूझमाड़ पद यात्रा कर शांति का संदेश भी दिया।   

पत्रकारों के विरोध को देखते हुए दक्षिण रीजनल कमेटी के सचिव गणेश उइके ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पत्रकारों की हत्या को पार्टी सदस्यों का चूक माना था, और माफी मांगी थी यही नहीं भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने की बात कही थी। लेकिन हाल ही के नक्सली पर्चे में फिर पत्रकारों की हत्या का फरमान जारी कर दिया गया है।

 










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