चौतरफा बेदखली के खिलाफ 5 मार्च को बहुजनों और वंचितों का भारत बंद

देश , लखनऊ, सोमवार , 04-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

सवर्ण आरक्षण को रद्द करने और 200 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली को बहाल करने समेत तमाम मांगों को लेकर 5 मार्च को भारत बंद है। इसमें सैकड़ों की तादाद में संगठन हिस्सा ले रहे हैं। सामाजिक न्याय आंदोलन,बिहार, बिहार फुले-अंबेडकर युवा मंच और रिहाई मंच,यूपी ने संयुक्त रूप से बहुजन समाज और तमाम सामाजिक न्याय पक्षधर ताकतों से 5 मार्च को सड़क पर उतरने की अपील की है।

जारी अपील में कहा गया है कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने संविधान,सामाजिक न्याय व बहुजनों के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है। इस सरकार ने पूरी ताकत से मनुविधान थोपने व मनुवादी सवर्ण दबदबे को मजबूत करने और बहुजनों के चौतरफा बेदखली का अभियान चलाया है। इस सरकार ने दलितों-आदिवासियों-पिछड़ों के साथ जारी ऐतिहासिक अन्याय-अपमान,ज्ञान व संपत्ति से वंचना, शासन-सत्ता की संस्थाओं से बेदखली को बढ़ाया है। अंतिम दौर में इस सरकार में बहुजनों पर तीन बड़े हमले हुए हैं-सवर्ण आरक्षण, विश्वविद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति में विभागवार 13 प्वाइंट रोस्टर के जरिए आरक्षण का खात्मा और अब जंगल-जमीन से लाखों आदिवासियों की बेदखली का सुप्रीम कोर्ट का फरमान।

अपील में कहा गया है कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने संविधान संशोधन के जरिए सवर्ण आरक्षण को आनन-फानन व कम समय में लागू कर रिकॉर्ड बनाया। दरअसल हकीकत ये है कि सवर्ण आरक्षण को लागू करने व संविधान संशोधन के जरिए संविधान की मूल संरचना व वैचारिक आधार पर बड़ा हमला किया गया है। सामाजिक न्याय व आरक्षण के आधार व अवधारणा को क्षतिग्रस्त किया गया है। इससे दलितों-आदिवासियों व पिछड़ों के आरक्षण के खात्मे का रास्ता खुल गया है।

आरक्षण कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है, न ही रोजगार की गारंटी से जुड़ा मामला है। यह तो ऐतिहासिक तौर पर वंचना, भेदभाव के शिकार समाज के दलित-आदिवासी-पिछड़े हिस्सों के सत्ता व शासन की संस्थाओं में प्रतिनिधित्व-भागीदारी की गारंटी से जुड़ा है। आरक्षण का आधार सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ापन है। आज भी शासन-सत्ता की संस्थाओं व विभिन्न क्षेत्रों में सवर्णों की मौजूदगी आबादी के अनुपात में कई गुना ज्यादा है। फिर भी आरक्षण सवर्णों को दिया जा रहा है। सवर्णों को आरक्षण देने का साफ मतलब है, दलितों-आदिवसियों-पिछड़ों के आरक्षण को प्रभावहीन बना देना, खत्म करना!

दरहकीकत, नरेन्द्र मोदी सरकार ने सवर्ण आरक्षण लागू कर विभिन्न संस्थाओं व क्षेत्रों में सवर्णों का वर्चस्व कायम रहने और बढ़ने की गारंटी के साथ बहुजनों को सत्ता-शासन की संस्थाओं से बेदखल करने की गारंटी की है। सवर्ण आरक्षण व संविधान संशोधन को रद्द करने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़नी ही होगी।

अपील में कहा गया है कि सवर्ण आरक्षण के बाद विश्वविद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति में विभागवार 13प्वाइंट रोस्टर के जरिए दलितों-पिछड़ों का आरक्षण लगभग खत्म हो जा रहा है। आदिवासी तो आरक्षण से पूरी तरह बाहर हो गये हैं। 13प्वाइंट रोस्टर एकलव्य का अंगूठा काटे जाने का एलान है। उच्च शिक्षा से बहुजनों की बेदखली का मनुवादी फरमान है। लगातार जारी आंदोलनों के बावजूद भी केन्द्र सरकार विश्वविद्यालय को इकाई मानते हुए 200प्वाइंट रोस्टर के पक्ष में अध्यादेश नहीं ला रही है।

अपीलकर्ताओं ने कहा है कि आदिवासियों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दुरुस्त करने के लिए बने वनाधिकार कानून-2006 के तहत 20लाख के आस-पास नकारे गये दावों पर सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार व सामाजिक न्याय के खिलाफ जंगल-जमीन से बेदखल करने फैसला दे दिया। शर्मनाक है कि इस फैसले के दरम्यान आदिवासियों की ओर से उचित पैरवी के लिए केन्द्र सरकार का कोई वकील भी मौजूद नहीं था। इस फैसले के खिलाफ चौतरफा आवाज बुलंद होने के बाद तत्काल सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर स्टे लगाया है। लेकिन स्टे से हम संतुष्ट नहीं हो सकते! केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाये।

जारी अपील में कहा गया है कि एकतरफ प्रधानमंत्री सफाईकर्मियों का पैर धोने की नौटंकी करते हैं। लेकिन सीवर में उतर सफाईकर्मी लगातार दम तोड़ रहे हैं। सफाईकर्मियों को सुरक्षा उपकरण-बुनियादी सुविधाएं और स्थायी नौकरी नहीं दी जा रही है।

अपील में कहा गया है कि दलितों-आदिवासियों-अल्पसंख्यकों-महिलाओं व कमजोर समुदाय के साथ हिंसा-उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं। मॉब लिचिंग भी नहीं रुक रही है। न्याय का गला घोंटा जा रहा है। बिहार में बालिका गृह कांड में सीबीआई जांच के बावजूद बड़े सफेदपोशों को बचाने की साजिश हो रही है।

अपील में कहा गया है कि एससी/एसटी एक्ट को प्रभावहीन बनाने के खिलाफ 2 अप्रैल 2018 के भारत बंद में देश भर में आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं। कई जगहों पर दलितों की हत्या की गई। न तो मुकदमा वापस हुआ है और न ही हिंसा के मामलों में न्याय मिल रहा है। अभी भी यूपी में 2अप्रैल के आंदोलनकारियों को रासुका लगाकर जेल में बंद रखा गया है।

अंत में जारी अपील में बहुजन नायकों के सम्मान व सपनों के लिए

मनुविधान थोपने व सवर्ण वर्चस्व मजबूत करने के खिलाफ संविधान व सामाजिक न्याय के लिए 5मार्च को संघर्ष के मैदान में आने का आह्वान किया गया है!

बंद में निम्न मुद्दे और मांगें शामिल हैं:

*सवर्ण आरक्षण व संविधान संशोधन रद्द किया जाए।

*विश्वविद्यालय में शिक्षक नियुक्ति में विभागवार 13प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ विश्वविद्यालय को इकाई बनाते हुए 200प्वाइंट रोस्टर के पक्ष में अध्यादेश लाया जाए।

*लाखों आदिवासियों को जंगल-जमीन से बेदखल करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाया जाए।

*संख्यानुपात में प्रतिनिधित्व की गारंटी के लिए अतिपिछड़ों-पिछड़ों का आरक्षण बढ़ाने व आरक्षण की सीमा 50प्रतिशत से बढ़ाकर 69 प्रतिशत करने की सरकार घोषणा करे।

*न्यायपालिका व अन्य क्षेत्र सहित निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू किया जाए।

*बैकलॉग भरने की गारंटी के साथ तमाम सरकारी रिक्त पदों को भरने की सरकार व्यवस्था करे।

*दलित मुसलमानों को एससी सूची में शामिल किया जाए।

*जाति जनगणना को पूरा किया जाए।

*दलितों-आदिवासियों-अल्पसख्यकों-महिलाओं व कमजोर समुदायों के हिंसा-उत्पीड़न व मॉब लिंचिंग पर रोक लगाने व त्वरित न्याय देने की गारंटी की जाए।

*2अप्रैल 2018 भारत बंद में आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने,मारे गये दलितों को न्याय देने व रासुका के तहत जेल बंद दलितों को रिहा किया जाए।

*सफाईकर्मियों को सुरक्षा उपकरण-बुनियादी सुविधाओं के साथ स्थायी नियुक्ति की गारंटी की जाए।

इन मांगों के साथ ही देश को बेचने की नीति-निजीकरण पर रोक लगाने जैसे मुद्दों पर बहुजनों से सड़क पर उतर कर एकजुटता व सामाजिक-राजनीतिक दावेदारी को बुलंद करने की अपील की गई है।


 








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Samnath Kashyap piplawand :: - 03-04-2019
इस भारत बंद आंदोलन में शामिल हो कर, सफल बनाने चाहिए

Pankaj rathod :: - 03-04-2019
Bharmano ko bhagvo desh bhachavo..

Pankaj rathod :: - 03-04-2019
Bharmano ko videsh me kadednaa chahiye.

Pankaj rathod :: - 03-04-2019
Jay mulnivasi 85

Pankaj rathod :: - 03-04-2019