गाय पहुंचाएगी कांग्रेस को गांधीनगर!

राजनीति , , रविवार , 04-06-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। इस वर्ष के अंत में गुजरात में विधान सभा चुनाव होने हैं। दो दशक से भाजपा के हाथों में सत्ता है। लाख कोशिशों के बाद भी कांग्रेस उसे सत्ता से हटाने में कामयाब नहीं हो पा रही है। लिहाजा पार्टी ने भी अब अपनी रणनीति को बदलने का फैसला किया है। बीजेपी की तरह वो भी हर राज्य में परिस्थिति के मुताबिक विचारधारा बदलने की राह पर चल पड़ी है। ताजा मामला गाय से जुड़ा है। केरला यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता खुले में गाय की बलि देते हैं लेकिन गुजरात में उसके लोग गाय को राष्ट्रीय पशु बनाए जाने की वकालत कर रहे हैं। इतना ही नहीं सूबे के दूसरे संगठन भी इसी राह पर हैं।

गाय के पक्ष में कांग्रेस की और से अनौपचारिक पोस्टर

कांग्रेस ने भी पकड़ी गाय की पूंछ

1985 में माधव सिंह सोलंकी ने 149 सीट जीत कर नया रिकॉर्ड बनाया था जिसको नरेंद्र मोदी भी नहीं तोड़ पाए। अब यह सपना अमित शाह देख रहे हैं। और इसे वो 2017 में ही पूरा कर देना चाहते हैं। दूसरी तरफ गुजरात के कांग्रेसी गाय की पूंछ पकड़ कर गांधी नगर पहुंचना चाहते हैं। गुरुवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भरत सोलंकी ने मीडिया में बयान जारी कर गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग की है। उसके अगले ही दिन एक प्रेस रिलीज़ के जरिये सूबे के महासचिव पार्थिवराज सिंह कठवाडिया ने बताया कि यूथ कांग्रेस गाय को राष्ट्रीय पशु बनाये जाने के खिलाफ पूरे प्रदेश में भाजपा के खिलाफ आंदोलन चलाएगी। उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर राजनीति नहीं बल्कि काजनीति होनी चाहिए। इस दिशा में कांग्रेस पार्टी की युवा शाखा राज्यव्यापी आंदोलन के लिए तैयार है। पार्थिवराज सिंह कठवाडिया ने गुजरात भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि गुजरात में लाखों एकड़ गौचर ज़मीन भाजपा सरकार ने अडानी जैसे उद्योगपतियों को पानी के भाव दे दिया है। इसकी वापसी का मुद्दा भी इस आंदोलन का हिस्सा होगा।

यूथ कांग्रेस को सौंपी कमान

जनचौक से बात करते हुए पार्थिवराजसिंह कठवाडिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सेक्युलर विचारधारा की ही है परंतु गौमांस पर भाजपा किरण रिजीजू, राम माधव और परिकर पर भाजपा चुप रहती है और केरला यूथ कांग्रेस के किसी तथाकथित कार्यकर्त्ता पर ढिंढोरा पीटती है। कठवाडिया ने यह साफ किया कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग गुजरात यूथ कांग्रेस की है। हालांकि सबसे पहले मीडिया में यह बयान प्रदेश अध्यक्ष ने दिया था जिस कारण अल्पसंख्यकों में नाराज़गी का माहौल देखा गया था। बयान आने के बाद स्थानीय मुस्लिम संगठन इंसाफ फाउंडेशन ने कांग्रेस को पत्र लिख कर उस पर भाजपा के एजेंडे पर चलने तथा भाजपा के साथ उसकी सांठगांठ के आरोप लगाये थे। ये पत्र सोशल मीडिया में भी खूब वायरल हुआ कांग्रेस पार्टी के मुस्लिम नेताओं के दबाव में भरत सोलंकी ने पीछे हटने के बजाय इस मुद्दे को युवा विंग को दे दिया। इससे पहले भी सोलंकी राम मंदिर बनाये जाने की वकालत कर चुके हैं।

संगठन ने अपने पत्र में कहा था कि भाजपा कांग्रेस आज भी मिलकर राजनीति कर रहे हैं। हमारा सुझाव है कि दोनों पार्टी खुलकर सामने आ जाएं और बिना चुनाव कराए ही सरकार बना लें। भाजपा का मुख्य मंत्री दिन में काम करे। रात में कांग्रेस पार्टी का मुख्य मंत्री। विरोध पक्ष की भूमिका में हार्दिक और अल्पेश हैं ही। दिन में हार्दिक विरोध पक्ष का नेता बन जाएंगे रात में अल्पेश और जिग्नेश को विरोध पक्ष का प्रवक्ता बना दिया जाए। ऐसे में जनता के साथ कम से कम धोखा तो नहीं होगा। गुजरात में काग्रेस पार्टी ईवीएम से भी बड़ा धोखा है

अल्पेश भी पीछे नहीं

अल्पेश भी उसी राह पर

सूबे में सांप्रदायिकता का बाजार इतना गरम है कि हर कोई इसकी खरीदारी में जुट गया है। ऐसे में अल्पेश ठाकोर भला कैसे पीछे रह सकते थे। एससी, एसटी एंड ओबीसी मंच के 39 वर्षीय इस नेता को कौन कहे उनके रोजी-रोजगार और पेट के सवालों पर बात करता। उसने भी राम मंदिर का झंडा उठा लिया। नतीजतन आडवाणी की रथ यात्रा की तर्ज पर उसने भी गुजरात से अयोध्या तक कारसेवा का ऐलान कर दिया। लेकिन 11 मई को अहमदाबाद में हुई कार्यकारिणी की मीटिंग में इसे सीमित कर दिया गया। और अहमदाबाद से सोमनाथ तक की यात्रा ऐलान किया गया। 28 मई को सोमनाथ में सरोड़ा गाम में राम मंदिर तथा श्री राम यूनिवर्सिटी बनाने के लिए सरकार से 300 बीघा ज़मीन की मांग की है। आरक्षण बचाओ और नशामुक्ति आन्दोलन से गुजरात की राजनीति में कद बनाने वाले अल्पेश को भी चुनाव आते आते राम अधिक रास रहे हैं।

हार्दिक पटेल भी संघ की राह पर

हार्दिक पटेल भी पीछे नहीं

आरक्षण की मांग को लेकर आन्दोलन कर गुजरात भाजपा की नींव हिलाने वाले हार्दिक पटेल भी कांग्रेस से सांठगांठ करने के बाद गाय की पूंछ पकड़ने लगे हैं हार्दिक पटेल ने ट्वीट कर भाजपा नेताओं पर गौ हत्या का आरोप लगाया है। पटेल ने भाजपा विधायक भूषण भट्ट, विश्व हिंदू परिषद के भरत मोदी और अमरत देसाई का नाम भी दिया जो इस कारोबार में शामिल हैं। गुजरात के लोग धार्मिक अधिक होते हैं। पढ़े लिखे लोगों का भी सुबह गाय को चारा खिला कर काम अथवा नौकरी पर जाने का आम रिवाज है। आदिवासी क्षेत्रों में सेवा का काम करने वाले रोमेल सुथारिया बताते हैं कि आदिवासियों के बहुत से इलाके ऐसे हैं जहां पर गाय का दूध भी नहीं पीते हैं मांस तो बहुत दूर की चीज़ है हिन्दू संगठन इन चीज़ों को बहुत अधिक बढ़ावा दे रहे हैं। इस नजरिये से देखा जाए तो सत्ता तक पहुंचने की होड़ में विपक्षी पार्टियां और संगठन भी बीजेपी के ही एजेंडे को आगे बढ़ाना शुरू कर दिये हैं।

आगे संघ पीछे कांग्रेस

कांग्रेस के पार्थिव राज ने जनचौक से बातचीत में कहा कि हम भाजपा के एजेंडे में उलझे नहीं हैं ही मुख्य समस्याओं से भटके हैं। 2017 में बेरोज़गारी ही हमारा मुख्य मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी ने बेरोज़गारी के खिलाफ  मशाल यात्रा निकाली थी लेकिन मीडिया को भी गाय की ही राजनीति में मज़ा आता है। मशाल यात्रा के समय दिल्ली स्थित जनचौक से फ़ोन नहीं आया था गाय के नाम पर जनचौक भी लिखना चाह रहा है। इसलिए मेरा मानना है की गाय पर काजनीति होनी चाहिए साथ में दूसरे सारे मुद्दे भी अहम हैं। बहरहाल कांग्रेस नेता जो भी कहें सच्चाई यही है कि संघ कांग्रेस को सेक्युलर विचारधारा से भटका कर अपने एजेंडे की पैरवी करने में कामयाब हो गई है। 










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Ajaz :: - 06-04-2017
100% authentic news but cant expact these kind of news from our national media..