सोहराबुद्दीन केस में सीबीआई कोर्ट ने मीडिया के मुंह पर जड़ा ताला

मुद्दा , मुंबई, बृहस्पतिवार , 30-11-2017


cbi-court-sohrabuddin-media-trail

जनचौक ब्यूरो

गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रही  मुंबई सीबीआई की विशेष अदालत ने एक बहुत ही ‘‘विशेष’’ फैसला सुनाया है। सीबीआई अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि, ‘‘सोहराबुद्दीन केस की अदालती कार्यवाही के दौरान मीडिया के लोग तो अदालत में बैठ तो सकते हैं लेकिन उससे संबंधित खबर प्रकाशित नहीं कर सकते।’’ अदालत का कहना है कि इससे मामला सनसनीखेज बनता है। 

सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश एसजे शर्मा ने बुधवार को यह आदेश बचाव पक्ष के वकील के आवेदन पर दिया। जिसमें प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया था। अपने आदेश में विशेष न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस मामले में संवेदनशीलता को देखते हुए, किसी भी अप्रिय घटना के होने की आशंका और इस मामले के मुकदमे पर होने वाले संभावित प्रभावों को देखते हुए, साक्ष्य के दिन-प्रतिदिन के प्रकाशन के मामले में जो रिकॉर्ड पर लाया जा सकता है, मैं नहीं देख पा रहा हूं कि अगले आदेश तक मुकदमे के दौरान मीडिया को किसी भी कार्यवाही के प्रकाशन के लिए अनुमति दी जा सकती है। मीडिया को प्रकाशन की अनुमति देना अभियोजन पक्ष, बचाव दल और अभियोजक के लिए भी सुरक्षा समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए, बचाव पक्ष के वकील के अनुरोध में औचित्य को देखते हुए अदालत  अपने आदेश में मीडिया को कार्यवाही के दौरान अदालत में बैठने की अनुमति दे रही है लेकिन उससे संबंधित कुछ भी प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’ 

अदालत में पहले एडवोकेट वहाब खान जो राजस्थान पुलिस के अब्दुल रहमान खान का प्रतिनिधित्व करते हैं ने मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए न्यायालय में हस्तलिखित आवेदन प्रस्तुत किया था। एडवोकेट वहाब खान ने आवेदन में लिखा कि ‘‘हर दिन, रिपोर्ट में एक प्रगति की सूचना दी जा रही है। मामले में पहले से कई उतार-चढ़ाव देखने को मिल चुका है। हम गवाहों, अभियुक्तों और बचाव पक्ष के वकीलों की सुरक्षा के लिए ऐसा चाहते हैं।’’ बचाव पक्ष के वकीलों ने सीबीआई न्यायाधीश बीएच लोया की 2014 में हुई मौत संबंधित रिपोर्टों का भी हवाला दिया। बचाव पक्ष के वकीलों के आवेदन पर न्यायाधीश ने पूछा कि क्या बचाव पक्ष के अन्य वकील भी इस आवेदन के समर्थन में हैं। बचाव पक्ष के अधिकांश वकीलों ने मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए याचिका का समर्थन किया। सीबीआई अदालत ने विशेष सरकारी अभियोजक बी पी राजू से इस पर राय जानना चाहा तो बीपी राजू ने  कहा कि अदालत इस पर ‘उचित आदेश’ पास कर सकती है।

अदालत में उस दौरान उपस्थित विभिन्न अखबारों के रिपोर्टरों ने याचिका का मौखिक विरोध करते हुए कहा कि कार्यवाही का प्रकाशन सार्वजनिक हित में है। 

पत्रकारों के विरोध करने पर सीबीआई अदालत ने कहा कि,‘‘मैं मीडिया की कड़ी मेहनत और घटनाओं संबंधित जानकारियों को इकट्ठा करके जनता को जागरूक करने के लिए प्रकाशित खबरों की सराहना करता हूं। मीडिया के प्रयासों के लिए उसकी सराहना और प्रशंसा की जानी चाहिए ... और मीडिया ऐसी चीजों को उजागर करता है साथ ही ये बताता है कि कौन सी घटना रचनात्मक या विनाशकारी हो सकता है। यहां तक कि इस तरह की घटनाओं की रिपोर्टिंग करते समय पत्रकारों पर हमले की घटना बढ़ रही है।’’  

सीबीआई अदालत में मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर कई वरिष्ठ पत्रकारों और वकीलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा, ‘‘मैं मीडिया रिपोर्टिंग के किसी भी प्रतिबंध के खिलाफ हूं, जब तक कि राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई ठोस कारण नहीं है। और मैं इस मामले में ऐसा नहीं देखता हूं।’’

वरिष्ठ वकील और महाराष्ट्र के पूर्व महाधिवक्ता रवि कदम ने कहा, ‘‘यह असामान्य है। सार्वजनिक परीक्षण का क्या मतलब है? मुकदमे से संबंधित पक्ष की सुरक्षा होनी चाहिए। मीडिया को अदालती कार्यवाही से दूर नहीं करना चाहिए।’’  

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पी बी सावंत ने कहा, ‘‘यदि दोनों पक्ष सहमत हैं या चाहते हैं और अगर अदालत का मानना है कि यह सार्वजनिक आदेश के हित में है कि परीक्षण बंद कमरे में किया जाना चाहिए, तो वह इसे अनुमति दे सकती है।’’   










Leave your comment