कहीं फिर से रजाला जैसी बच्चियों की जान के दुश्मन न बन जाएं सत्ता के भूखे भेड़िये

आप के वास्ते , , शुक्रवार , 29-03-2019


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चरण सिंह

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। हर बार की तरह इस बार भी पहले चरण का चुनाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। यह वही क्षेत्र है जिसके मुजफ्फरनगर दंगों को भुनाकर भाजपा ने प्रचंड बहुमत से मोदी सरकार बनाई थी।

बात मुजफ्फरनगर दंगों की चल रही है तो उन दंगों की एक छोटी सी दास्तान रजाला नाम की एक बच्ची की है। शामली में पड़ने वाले गांव लाख बहुड़ी की इस बच्ची को टाइम्स ऑफ इंडिया की एक पत्रकार राखी ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया था।

 दरअसल जब दंगाइयों ने इस बच्ची के घर में आग लगाकर इसके चाचा, बहन और दादी की हत्या कर दी थी। और मरणासन्न स्थिति में पहुंची रजाला को उसकी मां और मामा नौशाद किसी अस्पताल में भर्ती कराना चाहते थे उसी समय ये लोग पत्रकार राखी के टकरा गए। राखी ने पत्रकारिता की मिसाल कायम करते हुए इस बच्ची को अपनी गाड़ी से नई दिल्ली एम्स पहुंचाया। यहां पर माकपा नेता वृंदा करात ने इनकी मदद की और भर्ती कराया। उस समय यह बच्ची इतनी बुरी तरह से घायल थी कि इसके तीन ऑपरेशन हुए। बहरहाल यह बच्ची बच गई। हालांकि पत्रकार राखी भी अब हमारे बीच नहीं हैं। कैंसर की बीमारी से उनका निधन हो चुका है।

परसों यानी कि 27 मार्च को माकपा की महिला जनवादी समिति ने रजाला के सम्मान में कांस्टीट्यूशन क्लब में फिरका परस्ती के खिलाफ अमन के लिए हम सब कार्यक्रम आयोजित किया। साथ ही रजाला की अच्छी पढ़ाई और परवरिश के लिए 4 लाख रुपये भी दिए।

2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों में हुई इस घटना की चर्चा इसलिए कर रहा हूं क्योंकि 11 अप्रैल को इसी क्षेत्र मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ में पहले चरण का चुनाव है। क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जमीन भावनात्मक मुद्दों के लिए बहुत उपजाऊ मानी जाती है। इसलिए भाजपा यहां कुछ ऐसा करना चाहती है जिसे पूरे चुनाव में भुनाया जा सके। यही वजह है कि दादरी अखलाक प्रकरण के बाद बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र में गोमांस के नाम पर माहौल खराब करने का प्रयास किया गया।

2014 के चुनाव में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी भारतेंद्र सिंह के चुनाव प्रचार में मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र कर हिंदुओं को स्वाभिमान का हवाला देते हुए वोट मांगे थे और फिर पूरे देश में उस माहौल को भुनाया था। 

2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा के मजबूत गठबंधन से भयभीत भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिर से ऐसे ही किसी भावनात्मक मुद्दे की तलाश में है। वैसे भी इस बार उत्तर प्रदेश में हिन्दू कट्टरपंथी आदित्यनाथ योगी की सरकार है। जिससे ये लोग पूरा फायदा उठाना चाहेंगे

दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वर्ग बहुतायत संख्या में होने की वजह से भाजपा और उसके सहयोगी संगठन इस क्षेत्र को मिनी पाकिस्तान कह कर दूसरा कश्मीर बनाने की फिराक में हैं। जबकि जगजाहिर है कि यह क्षेत्र अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है। 1857 का स्वतंत्रता संग्राम यहीं मेरठ से शुरू हुआ। जो हिन्दू मुस्लिम दोनों ने मिलकर लड़ा था।

जब आजादी के बाद देश में जगह-जगह दंगे हुए तब भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों ने भाईचारे की मिसाल कायम की थी। थोड़ी सी नासमझी से सियासत करने वाले लोगों के दिलों में जहर घोल देते हैं।

वैसे तो देश में लगभग सभी दल सत्ता के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। पर भाजपा लाशों की राजनीति करने से भी नहीं चूकती। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा फिर से मुजफ्फरनगर दंगों जैसी घटना करना चाहेगी। ऐसे न जाने कितनी रजाला की जान खतरे में पड़ जाएगी।

(चरण सिंह पत्रकार हैं और आजकल नोएडा में रहते हैं।)

 








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