अवैध प्रत्याशी के सहारे गिरीडीह में बीजेपी !

राजनीति , , बुधवार , 28-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली/ गिरीडीह। झारखंड के मूल निवासियों के लंबे संघर्ष के बाद झारखंड राज्य अस्तित्व में आया था। झारखंड के मूल निवासियों की यह शिकायत रहती थी कि राज्य का नेतृत्व उनके हितों के प्रति संवेदनशील नहीं है। दिल्ली और पटना में बैठे साधन संपन्न लोग अपने मातहतों को राजनीतिक नेतृत्व देकर झारखंड के संसाधनों का बंदरबाट करते हैं। आदिवासियों का शोषण होता है। इसलिए राज्य का नेतृत्व झारखंड के मूल निवासियों के हाथ में होगा तो उनके हितों के संरक्षण के साथ झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों का बेजा इस्तेमाल रूकेगा। लेकिन बीजेपी और पूंजीपतियों की मिलीभगत के कारण अलग राज्य बनने के बावजूद झारखंड के मूल निवासियों के हक पर डाका और वहां के संसाधनों की लूट जारी है। राज्य विधानसभा में विजयी होने के बाद बीजेपी ने झारखंड निवासियों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हुए एक बाहरी व्यक्ति रघुबर दास को मुख्यमंत्री बना दिया। अब ये सिलसिला स्थानीय निकाय के चुनाव तक देखने को मिल रहा है। इसके लिए बीजेपी सरकार अधिकारियों पर दबाव डालकर ऐसे व्यक्तियों को भी झारखंड का मूल निवासी बताकर चुनाव मैदान में उतार रही है जो राज्य के नियम-कानून के तहत वहां अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ लेने के हकदार नहीं हैं।

अवैध जाति प्रमाण पत्र

जिले के आला अधिकारियों पर दबाव डालकर फर्जी कागजातों के सहारे बीजेपी प्रत्याशी सुनील कुमार पासवान महापौर का चुनाव लड़ रहा है।

आगामी 15 अप्रैल को झारखंड राज्य के गिरीडीह में नगर निगम का चुनाव होना है। जिले के नगर निगम के महापौर का सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। नामांकन के लिए वैध जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। झारखंड सरकार अपने पत्रांक 14/ जा0नि0 03-2016 का0 6763 दिनांक- 05/08/2016 के द्वारा यह निर्देशित कर चुकी है कि अनुसूचित जाति/जनजाति के जाति प्रमाण पत्र हेतु वही व्यक्ति योग्य है जिसके पास 1950 से इस क्षेत्र में निवास करने का प्रमाण पत्र होगा। लेकिन सत्ताधारी बीजेपी के प्रत्याशी के लिए यह आवश्यक नहीं है। क्यों राज्य के सर्वेसर्वा का उन्हें संरक्षण प्राप्त है। 

गिरीडीह नगर निगम महापौर के लिए बीजेपी ने सुनील कुमार पासवान को अपना प्रत्याशी बनाया है। सुनील ने नामांकन के समय जो प्रमाण पत्र पेश किया है उससे यह साबित नहीं होता है कि वे या उनका परिवार झारखंड में 1950 से निवास करते हैं। यह बात सही है कि सुनील कुमार पासवान जो बीजेपी के प्रत्याशी हैं, उनकी जाति अनुसूचित जाति में आती है। लेकिन झारखंड राज्य के नियमों के तहत वे महापौर चुनाव लड़ने के योग्य नहीं है। बीजेपी प्रत्याशी के नामांकन के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए इसकी जांच की मांग की। झामुमो अध्यक्ष का कहना है कि बीजेपी उम्मीदवार द्वारा दायर जाति प्रमाण पत्र वैध नही है क्योंकि उनके पास इस क्षेत्र में 1950 से निवास करने का कोई प्रमाण नहीं है। दरअसल, उनका परिवार 1980 के आसपास गिरीडीह आया। 

अवैध जाति प्रमाण पत्र की रिपोर्ट

झामुमो अध्यक्ष की आपत्ति के पश्चात निर्वाचन अधिकारी ने एक जांच बिठाई। जांच में यह साबित हो गया कि बीजेपी उम्मीदवार दुसाध जाति के होने के बावजूद झारखंड राज्य के नियम-कानून के संदर्भ में निवास प्रमाण-पत्र और जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके है।

सुनील द्वारा पेश जाति प्रमाएा पत्र के आधार पर उन्हें  इस राज्य में आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता है। जांच रिपोर्ट आने के बावजूद बीजेपी प्रत्याशी का नामांकन रद्द नहीं किया जा रहा है। चूंकि, मामला बीजेपी उम्मीदवार के नामांकन के रद्द होने से जुड़ा है इसलिए पूरा प्रशासनिक महकमा इसे किसी भी तरह टालने के फिराक में लग गया। अंततः स्क्रूटिनी के समय  यह कहते हुए नामांकन को सही मान लिया कि चूंकि प्रारंभिक जांच अंचल अधिकारी से करवाई गई जिसके आधार पर दूसरा जांच अनुमंडल पदाधिकारी से करवाई जा रही है जो जांच प्रतिवेदन अभी तक (11बजे तक) प्राप्त नही हो सका है। इसलिए इसे अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।

झामुमो जिला अध्यक्ष संजय सिंह कहते हैं, ‘‘इस नामांकन को बचाने के लिए राज्य सरकार का शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ मंत्रियों ने जिला प्रशासन पर दबाव बनाया। जिसके बाद उनका नामांकन अवैध नहीं किया गया।’’ बीजेपी नेता झारखंड के आदिवासियों और मूल निवासियों के हितों के संरक्षण की बात करते नहीं थकते हैं। लेकिन वे झारखंड के लोगों के हक पर डाका डालने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। 










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??? ?????? :: - 03-29-2018
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