आप जानते हैं शिमला की गुड़िया के साथ क्या हुआ?

विशेष रिपोर्ट , , शनिवार , 22-07-2017


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जनचौक स्टाफ

आप को जान लेना चाहिए कि शिमला सिर्फ सैर की जगह नहीं हैं। वहां भी इंसान बसते हैं उनके भी सुख-दुख हैं, उन्हें भी दर्द भी होता है। लेकिन उन्हें जब दर्द होता है तो क्या आपको उसका एहसास भी होता है, जैसे आपको आपका टीवी और अखबार ख़बर देता है कि शिमला में आज मौसम सुहाना है, आज वहां बर्फ गिरी है, क्या ऐसे ही उसने बताया कि शिमला इन दिनों दर्द में कराह रहा है। उसकी वादियां सुलग रही हैं। इंसाफ मांग रही हैं। एक 15 साल की लड़की के लिए। एक जीती-जागती गुड़िया के लिए जिसे आज मुर्दा बना दिया गया।

गुड़िया के लिए इंसाफ की मांग। फोटो साभार : गूगल

 

4 जुलाई को गैंगरेप और हत्या

4 जुलाई को कोटखाई के गांव हलाईला में 15 साल की गुड़िया की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई। इसी गुड़िया को इंसाफ दिलाने के लिए शिमला सुलग रहा है। लेकिन अफसोस इसकी आंच अभी दिल्ली, मुंबई, चेन्नई में नहीं दिखाई दी है जैसी निर्भया कांड के समय दिखाई दी थी। हालांकि आज शनिवार को दिल्ली में नेशनल फ्रीडम ऑफ इंडियन वूमेन (एनएफआईडब्ल्यू) ने हिमाचल भवन पर प्रदर्शन का ऐलान किया है।

शिमला में गुड़िया की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई। फोटो साभार : गूगल

सीबीआई को जांच 

स्थानीय दबाव के चलते गुड़िया के साथ रेप और हत्या की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है। हिमाचल सरकार ने पुलिस एसआईटी के तीन सदस्यों का भी तबादला कर दिया है जो मामले की जांच कर रहे थे। इस मामले के सभी 6 आरोपी गिरफ्तार भी कर लिए गए, लेकिन एक आरोपी की थाने में हत्या की खबर ने हलचल मचा दी है। और लोगों को लग रहा है कि साफ तौर पर केस दबाने और किसी को बचाने की कोशिश की जा रही है। समझा जा रहा है कि यह सब मुख्य आरोपी जो एक प्रभावशाली व्यक्ति का बेटा है, को बचाने के लिए किया जा रहा है। इससे गुस्साए लोगों ने थाने पर प्रदर्शन भी किया। 

15 साल की गुड़िया दसवीं की छात्रा थी। कोटखाई में उसका स्कूल घर से करीब 7-8 किलोमीटर दूर था। घर और स्कूल के इस रास्ते में दोनों ओर घना जंगल है। 4 जुलाई को उसे 6 लोगों ने इसी रास्ते पर लिफ्ट के बहाने कार में अगवा कर लिया और गैंगरेप के बाद मारकर जंगल में फेंक दिया। दो दिनों बाद उसका शव बरामद हुआ।

 

गुड़िया के लिए इंसाफ की मांग। फोटो साभार : गूगल

एक आरोपी की थाने में हत्या

पुलिस के मुताबिक इस मामले में 19 साल से लेकर 42 साल तक के आरोपी शामिल रहे हैं। आरोपियों की पहचान कोटखाई निवासी आशीष चौहान (29), राजेंद्र सिंह उर्फ राजू (32), गढ़वाल निवासी सुभाष (42), दीपक उर्फ दीपू (38), नेपाल निवासी सूरज (29) और लोकजन उर्फ छोटू (19) के रूप में कई गई। 19 जुलाई को इनमें नेपाल निवासी सूरज की थाने में हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक राजेंद्र सिंह उर्फ राजू ने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी।

 

गुड़िया के लिए इंसाफ की मांग। फोटो साभार : गूगल

जनता सड़कों पर है

इस मामले में शिमला में ही रहने वाले प्रसिद्ध कहानीकार राजकुमार राकेश ने शुक्रवार, 21 जुलाई को अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि - 

हिन्दी के लेखक मित्रो! मेरा मन उद्वेलित है। इसलिए खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ। वर्ना मैं कभी किसी को चुनौती नहीं देता। पर आज का दिन मेरे अवसाद का सबसे भयानक दिन है। इसलिए खुद को रोक पाना संभव नहीं रहा है।  

पिछले कल (गुरुवार, 20जुलाई) पूरा हिमाचल आंदोलित था। जनता सड़कों पर थी। बाज़ार और ट्रैफिक पूरी तरह बंद। मैं शिमला में हूँ। जो यहाँ हुआ, वैसे दृश्य मैंने इस शहर में पहली बार देखे। पिछले बीस दिन से जनता आंदोलित थी, तो भाजपा ने उसका फायदा उठाकर 20 जुलाई को हिमाचल-बंद का ऐलान कर दिया था। लेकिन जनता के आक्रोश के आगे किसी राजनैतिक दल की कोई हैसियत नहीं होती। कल के आंदोलन में माकपा, कालेजों के विद्यार्थी और अनेक समाजसेवी व महिला संगठन पूरी सक्रियता के साथ शामिल थे। शासक पार्टी के नेता कहाँ दुबके पड़े हैं। पता नहीं। 
कल पता चला, शिमला सिर्फ एक सैरगाह नहीं है। यहाँ भी जीते जागते लोग बसते हैं।  वैसे यह शहर हर किसी आने वाले का स्वागत करता है। अपने लेखकों का तो अभूतपूर्व स्वागत करता है। फिर चाहे कुछ बड़े लेखकगण अपनी आपसी बातचीत में अपना स्वागत करने वालों को 'यजमान' ही क्यों न कहते हों। हालांकि उसका भी यहाँ कोई बुरा नहीं मानता। 
लेकिन कल जब शिमला जल रहा था तब सुना है, दिल्ली की हिन्दी अकादमी कुछ लेखकों को पुरस्कार देने का भव्य समारोह आयोजित कर रही थी। अब आयोजन था, तो जरूर कुछ लेखक बंधु पुरस्कार ले भी रहे होंगे। मुझे नहीं मालूम वे कौन-कौन थे, लेकिन आज मैं उन्हें बधाई नहीं दे सकता।  
आज सुबह याद आया 2015 में जब पुरस्कार वापसी अभियान चल रहा था, तब मुझ जैसे  नाचीज ने भी उसमें अपना योगदान देने के लिए अपना एक राज्यस्तरीय पुरस्कार वापस कर दिया था। मेरे पास वही  था और मैं वही वापस कर सकता था। इससे बड़ा होता तो उसे भी जरूर कर देता। वह हाथियों के साथ एक चींटी भर का योगदान रहा हो, इसे मान लेने में भी मुझे कोई गुरेज नहीं है। 
किन्तु क्या दिल्ली में सम्मान देने वाली कोई सरकारी संस्था और उन सम्मानों  को लेने वाले लेखकगण महज़ एक रोज़ के लिए उस समारोह को टाल नहीं सकते थे? क्या दिल्ली से बाहर एक लड़की का बलात्कार और हत्या हुई, एक आरोपी को पुलिस की कस्टडी में मार दिया गयाउससे आपके कोई सरोकार नहीं जुड़े हैं?
मैं जानता हूँ, हमेशा की तरह आप इस पोस्ट को पढ़ चुकने के बाद भी आगे निकल जाएंगे, यही दिखाने को, मानो आपने इसे पढ़ा ही न हो! इस बात की मुझे कोई फिक्र नहीं है। बल्कि मुझे यही आशा है, कि यही होगा। यही होना चाहिए। 
दिल्ली में पुरस्कार देने और लेने वालों को यही करना चाहिए भी।

गुड़िया के लिए इंसाफ की मांग। फोटो साभार : गूगल

क्या यह ख़बर दिल्ली तक पहुंची है?

20 जुलाई की एक अन्य पोस्ट में राजकुमार राकेश लिखते हैं-

एक पखवाड़ा पहले शिमला ज़िला के कोटखाई के एक गाँव में 14 साल की लड़की का जो भयावह रेप और हत्या हुई है, वह कांड दिल्ली के निर्भया कांड से भी ज्यादा डरावना, जघन्य, क्रूर और अमानवीय है। 
क्या दिल्ली तक ये खबर पहुंची है? जंतर मंतर पर किसी ने प्रदर्शन किया हो कृपया बताएं? पुरस्कार बाद में लिए दिये जा सकते हैं। 
गत रात इस कांड के एक आरोपी की कोटखाई पुलिस थाने में हत्या हो गई है। 
जनता भड़की हुई है। 
आज पूरा शिमला बंद है। दूध, ब्रैड कुछ नहीं। दूरस्थ कालोनियों तक की छोटी छोटी दुकानें तक बंद हैं। कहीं कोई रेहड़ी वाला भी नजर नहीं आ रहा। 
जनता सड़कों पर है। 

अनुत्तरित सवाल

इस मामले में अब सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय मीडिया तक कई सवाल उठ रहे हैं। लेखक संजीव चंदन भी कुछ सवाल पूछते हैं। लेकिन इनमें से किसी के भी उत्तर अभी तक नहीं मिले हैं।

1- जब 4 जुलाई को गुड़िया की हत्या कर दी गई थी, तो आखिर 6 जुलाई तक खूंखार जंगली-जानवरों वाले इस इलाके में उसकी लाश कैसे बची रही?


2- अगर दो दिन तक लाश वहां पड़ी थी तो उसके हाथ-पैर और पूरा शरीर बिल्कुल साफ-सुथरा कैसे बचा रहा?


3- शव के पास अगर उसके कपड़े पड़े थे तो वे बारिश होने के बावजूद वहीं पर सही सलामत कैसे थे? बारिश या तूफान का इन पर कोई असर नहीं पड़ा. कपड़े खराब तक नहीं हुए।

4- गैंगरेप के दौरान छटपटाहट की वजह से गुड़िया के हाथों और शरीर पर मिट्टी क्यों नहीं लगी? पुलिस को मौका-ए-वारदात से कोई निशान क्यों नहीं मिले? पहले खुद पुलिस भी घर या गाड़ी में गैंगरेप की बात कह रही थी।

5- आमतौर पर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी भाग जाते हैं, लेकिन इस केस में आरोपी कहीं नहीं भागे।

6- जो दो नेपाली युवक पकड़े गए, उनके निवास से घटनास्थल की दूरी करीब 200 मीटर है। यह सवाल उठता है कि अगर उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया होता तो वह अपने घर के पास ही शव क्यों फेंकते?


7. थाने में बंद एक आरोपी की हत्या कैसे हो गई। और हुई तो फिर थाने के पुलिसकर्मियों पर कोई एफआईआर क्यों नहीं हुआ

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अपील।

मुख्यमंत्री की अपील

इस मामले में चौतरफा घिरे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आज अखबारों के माध्यम से एक अपील जारी की है। जिसमें वह इस घटना पर दुख जता रहे हैं, अपनी सरकार और प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों को गिना रहे हैं। साथ ही यह भी बता रहे हैं कि कुछ शरारती तत्व और राजनीतिक दल प्रदेश का माहौल खराब कर राजनैतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक सोशल मीडिया के जरिये भी इस मामले में गलत खबरें फैलाई जा रही हैं। वीरभद्र शांति की अपील करते हुए जता रहे हैं कि वह गुड़िया को इंसाफ दिलाकर रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि 19 जुलाई को कोटखाई थाने में हुई आरोपी की हत्या की भी न्यायिक जांच कराई जा रही है।

...ताकि फिर ऐसा न हो 

कुल मिलाकर गुड़िया कांड से राजधानी शिमला सहित पूरा हिमाचल हिला हुआ है। यही वजह है कि लगातार हो रहे धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। युवा खासकर लड़कियां भी इस घटना के खिलाफ बड़ी संख्या में आगे आ रही हैं। प्रदर्शन में शामिल लड़कियों का कहना था कि दिल्ली-यूपी-बिहार में तो ऐसी घटनाएं आए दिन सुनने में आती हैं लेकिन हिमाचल की शांत वादियों में ऐसा उन्होंने पहली देखा-सुना है। इससे उनका विश्वास हिल गया है और एक डर बैठने लगा है। यही वजह है कि वे एकजुट होकर गुड़िया को इंसाफ और सभी लड़कियों की सुरक्षा की मांग लेकर घरों से बाहर आईं हैं ताकि इस प्रदेश में फिर ऐसा न हो।

 










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