गुजरात कांग्रेस के किले में बीजेपी की सेंध

राजनीति , अहमदाबाद, शुक्रवार , 28-07-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। जनचौक ने 6 जून को ही बताया था कि राज्य सभा चुनाव से पहले गुजरात के कद्दावर नेता शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस से बगावत कर अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा का दमन थाम सकते हैं। साथ ही जन चौक ने यह भी साफ किया था कि वाघेला की सभी डील पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा राज्य सभा चुनाव में वाघेला अपने किसी करीबी को अहमद पटेल के खिलाफ नामांकन भी करवाएंगे। कल और उसके पहले के घटनाक्रम ने जनचौक की इनमें से कुछ बातों पर अपनी मुहर लगा दी है।

गुरुवार को वाघेला के समधी बलवंत सिंह राजपूत ने दो और विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया। इस्तीफ़ा देने वालों में विजापुर से पाटीदार विधायक पीआई पटेल और सानंद से महिला पाटीदार विधायक डॉक्टर तेज श्रीपटेल शामिल हैं। कांग्रेस को झटका देने वाले विधायकों में पाटीदार विधायक सबसे आगे रहे हैं। जबकि कांग्रेस की रणनीति पाटीदारों के सहारे 2017 की सत्ता हासिल करने की है। मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस के 15 से 20 विधायक बगावत कर सकते हैं। ये विधायक अहमद पटेल समेत कांग्रेस के किसी बड़े नेता का फोन नहीं उठा रहे हैं। अगर सूत्रों पर विश्वास करें तो वाघेला के पक्ष में जाने वाले विधायकों में निम्न नाम शामिल हैं:

1.        राघवजी पटेल (जामनगर ग्राम)

2.        सीके रावलजी (गोधरा)

3.        महेश पटेल (पालनपुर)

4.        चन्द्रिका बरिया (गरबाडा)

5.        अमित चौधरी (मानसा)

6.        राजेन्द्र ठाकोर (मोडासा)

7.        महेंद्र सिंह बारैय्या (प्रांतिज)

8.        मेरामन गोरिया (जाम खंबालिया)

9.        धर्मेद्र सिंह जाडेजा (जामनगर सिटी)

10.     कामिनीबेन राठोड़ (दहेगाम)

11.     राम सिंह परमार (ठासरा )

12.     मानसिंह चौहान (बाला शिन्नौर)

13.     मणि वाघेला (वाद गाम)

14.     गयासुद्दीन शेख़ (दरियापुर)

कांग्रेस का बागी विधायक।

इनमें अधिकतर वो विधायक हैं जो वाघेला के साथ राजपा और कांग्रेस के विलय के समय आये थे। इस बड़ी बगावत के पीछे वाघेला के अलावा नरहरि अमीन का गुट भी काम कर रहा है। नरहरि अमीन गुजरात के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। लेकिन 2012 में कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में चले गए थे। कांग्रेस के तीन विधायकों की बगावत से भौगोलिक स्तर पर भाजपा का वर्चस्व बढ़ गया है। 2012 के चुनाव में उत्तर मध्य गुजरात में कांग्रेस ने भाजपा पर बढ़त हासिल की थी। 25 सीट कांग्रेस की झोली में आई थी जबकि भाजपा 17 सीट हासिल करने में कामयाब हुई थी। उत्तर मध्य गुजरात में वाघेला का वर्चस्व है जबकि अहमद पटेल के गृह जिले भरूच में कांग्रेस सभी चारों सीटें हार गई थी।

सूत्रों की मानें तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के साथ बलवंत सिंह राजपूत भी राज्य सभा की सदस्यता के लिए नामांकन दाखिल करेंगे भाजपा के पास 29 अतिरिक्त वोट हैं। जो बलवंत सिंह को मिल सकते हैं। चुनाव जीतने के लिए 46 विधायकों की आवश्यकता है जो माना जा रहा है वाघेला गुट और असंतुष्ट विधायकों को मिलाकर पूरा हो सकते हैं। परन्तु अहमद पटेल की भले ही जनता में पकड़ न हो लेकिन इस प्रकार की परिस्थितियों से निपटने में वो माहिर माने जाते हैं। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि अहमद पटेल को मुश्किल ज़रूर आ रही है लेकिन चुनाव अहमद पटेल ही जीतेंगे। भाजपा सिर्फ पटेल के नाम से ध्रुवीकरण करा रही है। बताया जा रहा है कि अमित शाह चाहते हैं कि सब कुछ के बावजूद राज्य सभा चुनाव अहमद पटेल ही जीतें। ताकि 2017 में संप्रदायिक ध्रुवीकरण में आसानी हो सके। भाजपा पिछले 15 वर्षों से अहमद पटेल के नाम से ध्रुवीकरण करा रही है।

कांग्रेस की बागी विधायक।

एनसीपी विधायक और प्रदेश प्रमुख जयंत बोस्की ने जनचौक को बताया कि गुजरात में उनकी पार्टी यूपीए के उम्मीदवार यानि अहमद पटेल के साथ है। बोस्की के अनुसार इस बगावत से कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ है। बोस्की भी मानते हैं कि आने वाले दिनों में 15 से 16 विधायक कांग्रेस छोड़ सकते हैं। कांग्रेस को अपनी भूमिका को समझना चाहिए। जन चौक द्वारा तीसरे मोर्चे के सवाल पर बोस्की ने कहा कुछ लोग गुजरात में भी भाजपा को हराने के लिए महा गठबंधन बनाने के बारे में सोच रहे हैं। सभी छोटे बड़े राजनैतिक दल आपस में संपर्क में हैं। इस गठबंधन में एनसीपी, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी के अलावा कांग्रेस को भी साथ आना चाहिए। ताकि भाजपा के विजय रथ को गुजरात में रोक दिया जाये। बिहार प्रकरण से पहले जेडीयू विधायक छोटू वसावा कांग्रेस के साथ थे लेकिन अब उनका स्टैंड बदल गया है। गुजरात में एनसीपी के दो, जेडीयू के एक और एक निर्दलीय विधायक है।  

 

बगावत करने वाले विधायकों ने गुटबाजी को पार्टी छोड़ने का कारण बताया है। तेज श्री पटेल जो कांग्रेस पार्टी की तरफ से विधानसभा में एक फायर ब्रांड नेत्री थीं। हमेशा मुद्दों को उठाती आई हैं। उनका कहना है कि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से सहयोग न मिलने के कारण उन्हें पार्टी छोड़ने का फैसला लेना पड़ा। बलवंत सिंह राजपूत जो विधानसभा में दंडक थे उनका आरोप है कि कांग्रेस गुटबाजी में डूबी हुई है। उनका कहना है कि उन्हें शंका की निगाह से देखा जाता था। कांग्रेस के पास कोई विज़न नहीं है साथ ही इन सबको नरेंद्र मोदी का विकास मॉडल भी पसंद आ गया। भरत सिंह सोलंकी का कहना है की 20 वर्ष से भाजपा राज्य की सत्ता में है। उसके बावजूद उन्हें कांग्रेस के रिजेक्टेड विधायकों के सहारे 2017 का चुनाव लड़ना पड़ रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह बाढ़ पीड़ितों की मदद के बजाय हॉर्स ट्रेडिंग में लगी हुई है यही भाजपा का असली चरित्र है।   










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