रिटायर्ड आईएएस सूर्यप्रताप सिंह पर हमला : योगी राज की एक झलक!

घटना-दुर्घटना , , शनिवार , 03-06-2017


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विष्णु राजगढ़िया

उत्तर प्रदेश में योगीराज की पहचान अपराध, उपद्रव और उन्माद के तौर पर की जाने लगी है। इससे ऐसे लोग ज्यादा निराश हैं, जिन्होंने अखिलेश सरकार के खिलाफ अभियान चलाकर भाजपा की विजय का मार्ग आसान किया था। अब ऐसे लोगों का तेजी से मोहभंग हो रहा है। 

यूपी के सेवानिवृत्त आईएएस सूर्यप्रताप सिंह इनमें एक हैं। गत दिन लखनऊ में उन पर हमले की वारदात ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। उनका 'कसूर' था कि वह भाजपा के एक पूर्व विधायक की गाड़ी पर लगी तख्ती की फोटो खींच रहे थे, जिस पर लिखा था- पूर्व बाहुबली विधायक'

रिटायर्ड आईएएस एसपी सिंह द्वारा बाहुबली लिखी गाड़ी का फोटो खींचने पर विवाद हुआ।  

सूर्यप्रताप सिंह एक ईमानदार, निर्भीक और जनपक्षधर अधिकारी के तौर पर जाने जाते हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने खुलकर जनमुद्दे उठाए। अखिलेश सरकार के खिलाफ लगातार अभियान को लेकर वह चर्चा में रहे हैं। फ़िलहाल हुई घटना से भी वह विचलित नहीं हैं। फेसबुक पर इस घटना का उन्होंने जिस तरह विवरण दिया है, उसमें उनकी निराशा तो दिखती है, लेकिन इससे लड़ने की ऊर्जा भी साथ है।

 हमले का ब्योरा

सूर्य प्रताप सिंह ने हमले का विवरण इस प्रकार दिया है-

 "मुझे मार के क्या मिलेगा, किसी को!" कल रात मेरे घर पर हथियारधारी गुंडों ने दो बार धावा बोला। शराब के नशे में धुत्त भगवा गमछाधारी, राइफ़ल व बंदूक़ों के साथ, अराजक तत्वों ने रात 10.30 बजे और फिर रात 1.30 बजे हमला करने की कोशिश की। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने भी फ़ोन नहीं उठाये। पूर्व सरकार में ये होता तो मुझे दुःख नहीं होता। वर्तमान सरकार को बनवाने में कहीं न कहीं हम सब का भी रोल है। दुःख इस बात का है कि योगी सरकार में भी मेरे जैसे पूर्व आईएएस अधिकारी के साथ यह सब हो रहा है।"

इसी टिप्पणी में सिंह ने हमले की पृष्ठभूमि की जानकारी इस प्रकार दी है-

"29 मई को एक माफ़िया, गौरव उपाध्याय, पूर्व विधायक (शिव सेना) व हिंदू युवा महासभा के स्वयंभू अध्यक्ष की 'बाहुबली' लिखी गाड़ियों के मैंने फ़ोटो लिए थे। उनके गुर्गों ने मेरी गाड़ी रोक कर फ़ोटो खींचने पर आपत्ति की थी और आक्रोश जताया था। क्या इन लोगों का हाथ है? या फिर जिन भ्रष्ट अधिकारियों, नेताओं, इंजिनीयर्स, माफ़िया के घोटाले, मैंने उठाए हैं, उनका हाथ है? यह तो पुलिस जाँच से ही पता चलेगा। मैंने FIR दर्ज करा दी है। क्या सच का साथ देना, भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली बात ही चलेगी उ.प्र. में, चाहे कोई भी सरकार आ जाए?

ठीक है, यदि मुझे मार के भ्रष्टाचारियों का काम चल जाता है, तो मार लो! मेरे बच्चे, परिवार को ऊपर वाला देख लेगा।" 

एक सेवानिवृत्त आईएएस जब इस कदर हताश दिखे, तो इस राज्य का भविष्य दिखने लगता है।

पूर्व आईएएस एसपी सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल) 

बेबाक टिप्पणियां

सूर्यप्रताप सिंह हाल के दिनों में योगी सरकार को लेकर बेबाक टिप्पणी करते रहे हैं। 31 मई को लिखा-

'राम-रथ' पर सवार हुए CM योगी! बोलो भैया जय श्रीराम .... 'योगी-के-राजा राम',  बनाए उ.प्र. के बिगड़े काम !!

उत्तर प्रदेश के बिगड़े हालात किसी से छुपे नहीं। जनमानस ने इस बार बड़े मन से भाजपा को उत्तर प्रदेश की कुंजी सौंपी है। आसमान छूती जन अपेक्षाएँ और प्रदेश की लचर प्रशासनिक व्यवस्था ने वर्तमान सरकार की नींद उड़ा रखी है, अब तो राम ही सहारा है। और किया भी जाए, तो क्या किया जाए? प्रेज़ेंटेशन भी हो गए, मंत्री छापे भी मार रहे है, मंडलीय बैठक भी चल रही हैं लेकिन सब ढाक के तीन पात। डेढ़ करोड़ बेरोज़गार युवाओं को नौकरी चाहिए। सत्तर लाख बेरोज़गार युवाओं ने रोज़गार कार्यालय में नाम दर्ज करा रखें हैं। प्रदेश भर में भर्तियों पर पाबंदी लगी है। किसानों की आमदनी वर्ष 2018 तक दोग़ुनी करनी है। 36 हज़ार करोड़ रुपये किसानों के क़र्ज़ माफ़ी की ख़ाली घोषणा भर हुई है, बैंक़ों के पास न कोई सूचना है और न ही पैसा पहुँचा है।"

योगी सरकार को लेकर ऐसी साफ टिप्पणी करने वाले सूर्य प्रताप सिंह को जानने वाले लोगों के अनुसार ऐसी साफ बातें करना उनका स्वभाव रहा है। 

दरअसल वह ऐसे स्वतंत्र नागरिक के तौर पर हैं, जिसकी अपनी कोई पार्टी नहीं और जिसे बेहतरी के लिए हरदम इस सिस्टम से लड़ना जरूरी है।

30 मई को वह लिखते हैं- "हम सबको मिलकर आवाज़ उठाते रहना है। नहीं तो नेता मूर्ख बनाके वोट लेते रहेंगे। दोस्तों याद रखो कि...

'उसके कत्ल पर मैं चुप था, अब मेरा नंबर आया है,

मेरे कत्ल पर तू चुप है, अब अगला नंबर तेरा है।' यह भ्रष्टाचार का तांडव हम सबको एक-एक करके लील जाएगा।

आशावान रहें, लेकिन किसी नेता या पार्टी के अंधभक्त न बनें। सजग, विवेकशील बने रहना ही लोकहित में रहता है।

पूर्व आईएएस एसपी सिंह अन्य लोगों के साथ एक प्रदर्शन में (फाइल) 

इसी तरह, 30 अप्रैल को उन्होंने सत्ता के नशे पर कटाक्ष किया था- "वह सत्ता का नशा ही क्या, जो सिर चढ़ कर न बोले! इस नशे के वशीभूत मंत्री-सांसदों-विधायकों तो क्या, उनके बेटे/बेटी और चमचे भी ऐसे व्यवहार करते हैं- जैसे वे वहां के राजा हों। पुलिस, प्रशासन को गरियाना, बिल्ले नोच लेना, चमड़ी खिंचवा लेना, जेल की हवा खिलवाने को कहना, टोल पर मारपीट करना जैसे जुमले या कृत्य आम हो जाते हैं। अखिलेश व मायावती के सिर तो सत्ता का नशा ख़ूब चढ़ा कर बोला था। देखते हैं, वर्तमान निज़ाम में यह नशा किस-किस के सिर पर चढ़कर बोलेगा!"

मन की दुविधा!

इससे पहले सूर्यप्रताप सिंह ने एक और महत्वपूर्ण पोस्ट डाली थी, जो आज बुद्धिजीवियों के एक बड़े हिस्से के लिए सच है। वह लिखते हैं- "मेरे मन की दुविधा, दुधारी तलवार की नोक पर बैठा मैं !

मैं पिछले तीन साल से अधिक समय से उ.प्र. में गत दो सरकारों के विरोध में खड़ा रहा, जमकर संघर्ष किया। तब जाकर ये परिवर्तन आया और 'योगी जी' के नेतृत्व में नया निज़ाम बना। हो सकता है कि आज के सत्ताधीश 'दम्भवश' मेरे उ.प्र. में सत्ता परिवर्तन के योगदान/संघर्ष को स्वीकार न भी करें। इसलिए मुझे लगता है कि आज मैं एक 'दुधारी' तलवार की नोक पर बैठा हूँ। यदि पूर्व दो सरकारों का पक्ष लूँ तो अपने को, अपनी नज़रों में 'घटा' हुआ सा लगूँ और यदि वर्तमान सरकार का पक्ष लूँ तो 'भगवा चाटुकार' अर्थात 'बँटा हुआ' सा लगूँ। आप ही बताओ कि मैं क्या करूँ ?

इसलिए अब मैंने तय किया है कि मैं पूर्व दो सरकारों का अंध-विरोध नहीं करूँगा (यद्यपि मुद्दों पर ही विरोध किया) और न ही वर्तमान सरकार का अंध-समर्थन करूँगा (कभी किया भी नहीं)। मैं 'वर्तमान' में रहकर तटस्थ भाव से वर्तमान 'योगी' सरकार के क्रियाकलापों को देखूँगा और जनहित की कसौटी पर तौलूँगा। जो लोकहित में होंगे, उन निर्णयों का पक्ष लूँगा और जो निर्णय ख़ाली 'प्रपंच व दिखावे' के लिए 'ग़रीब' को भ्रमित करने के लिए होंगे, उनका 'सुझावात्मक' प्रतिरोध (समालोचना) करूँगा। झूँठे वादों व ख़ाली-पीली 'दिव्य-स्वप्न' दिखाने वाली बातों से जनमानस को हम सब मिलकर सजग/आगाह करते रहेंगे। 'पोल खोलते' रहेंगे।

दिलचस्प यह है ऐसी दुविधा भले ही अब आई हो, योगी युग की शुरुआत में सूर्यप्रताप सिंह ने भी काफी उम्मीदें पाली थीं। इसी पहली अप्रैल को उन्होंने लिखा- "उत्तर प्रदेश में सत्ता का परिवर्तन 'उमंगो की आस' 'खुशहाली का पैगाम' लेकर आया है। आँखों में उम्मीद के सपने, नई उड़ान भरने को तैयार है प्रदेश। 

उत्तर प्रदेश में युवाओँ का तबक़ा विकास, नौकरियां और अवसर चाहता है। अगर विकास हुआ, लोगों को काम धंधे मिलें और युवाओं को नौकरियां मिली, तो सब कुछ ठीक-ठाक रहेगा। वर्तमान योगी जी की सरकार लोगों में आशा की किरण लेकर आयी है। दरअसल, यूपी के आम लोगों ने नरेंद्र मोदी जी को उम्मीद से वोट किया है। जो लोग मुलायम, मायावती और अखिलेश की राजनीति से ऊब चुके थे, उन्होंने मोदी जी के ज़रिए विकास का सपना देखा है। वे लोग अवसर चाहते हैं और मोदी ने यूपी की आम जनता व खाकर युवाओं में उम्मीद की आस जगायी है। प्रदेश में 1.5 करोड़ युवा बेरोज़गार हैं, 42% बच्चे कुपोषित हैं, यहाँ की चौपट शिक्षा व्यवस्था केवल 'अयोग्य' डिग्रीधारक युवाओँ की फ़ौज पैदा कर रही है, बुंदेलखंड/पूर्वांचल ग़रीबी से जूझ रहे हैं, खनिज सम्पदा का depletion हो रहा है, पेयजल, सिंचाई के लिए पानी की गिरती उपलब्धता, चौपट चिकित्सा आदि समस्याओं का पहाड़ सामने खड़ा है। ऊपर से भ्रष्टाचार लोगों के हक़ को दीमक की तरह चाट रहा है। इन सब समस्याओं पर तत्काल बिना समय गँवाए प्रहार करना होगा।"

मोहभंग!

जाहिर है कि पिछली सरकार के खिलाफ अभियान चलाने और नई सरकार से मोहभंग का यह अकेला मामला नहीं। ऐसी स्थिति वाले आज बड़ी में हैं जो केंद्र या किसी राज्य सरकार के आने में किसी रूप में सहायक रहे और जो अपनी उम्मीदों के बिखरने पर निराश हैं। लेकिन नागरिक समाज के लिए यह सुखद है कि हर क्षेत्र से ऐसे स्वतंत्र चेतनाशील लोग निकलकर आ रहे हैं, जिन्होंने उम्मीद चाहे जिससे भी लगाई हो, किसी भक्त के बजाय नागरिक धर्म का पालन ज्यादा जरूरी समझते हैं। 

लिहाजा, नागरिक धर्म के इस अनुपालन के लिए सूर्य प्रताप सिंह के हौसले का सम्मान किया जाना चाहिए, और उन्हें हर संभव सहयोग भी मिलना चाहिए। इससे पहले कि ऐसी आवाजों को डराकर चुप करा दिया जाए, हम भी बोलें। हर ऐसी स्वतंत्र और विवेकपूर्ण आवाज के साथ बोलें।

 

 










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?? ?? :: - 06-03-2017
एस पी सिंह ने हालिया विधानसभा चुनाव में हल्द्वानी में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी वे हल्द्वानी सीट से दावेदार भी थे और आरएसएस नेतृत्व उनकी हिमायत में खड़ा था .। चुनाव में वो स्वतंत्र सोच के व्यक्ति नही थे