पत्रकारों की गिरफ्तारी पर एडिटर्स गिल्ड आया सामने, कहा- तानाशाह हो गयी है योगी सरकार

मुद्दा , नई दिल्ली, रविवार , 09-06-2019


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जनचौक ब्यूरो

नई दल्ली। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने योगी के कथित प्रेमी वाले वीडियो मामले में यूपी पुलिस द्वारा की गयी तीनों पत्रकारों की गिरफ्तारी की निंदा की है। गिल्ड ने इसे सरकार का तानाशाहपूर्ण रवैया करार दिया है। 

अध्यक्ष शेखर गुप्ता, महासचिव अशोक भट्टाचार्य और कोषाध्यक्ष शीला भट्ट के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि गिल्ड इसे प्रेस को धमकाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बाधित करने के प्रयास के तौर पर देखता है। गिल्ड ने कहा है कि पुलिस की कार्रवाई गैरजरूरी, मनमाना है साथ ही कानून के तानाशाहीपूर्ण रवैये को दर्शाती है।

गिल्ड ने कहा कि महिला के दावे की जो भी हकीकत हो लेकिन उसके वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करने और टेलीविजन चैनल पर ऑन एयर करने के लिए आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज करना कुछ और नहीं बल्कि कानून का नंगा और बेजा इस्तेमाल है। गिल्ड ने कहा कि पुलिस को गिरफ्तारी का अधिकार देने के लिए आईटी एक्ट के सेक्शन 66 को भी जोड़ दिया गया है। 

इस सिलसिले में गिल्ड ने कर्नाटक में हुए एक केस का हवाला दिया है जिसमें एफआईआर पीड़ित शख्स द्वारा नहीं दर्ज किया गया था। उसका कहना है कि यूपी के मामले में भी एफआईआर प्रभावित शख्स द्वारा नहीं दर्ज की गयी है बल्कि पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया है। यह कानून और राज्य की शक्ति का बेजा इस्तेमाल है जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है।

इसके साथ ही गिल्ड ने मानहानि के मुकदमे को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की मांग की है।

सामाजिक संगठन रिहाई मंच ने भी की निंदा

रिहाई मंच ने पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी की कड़ी भर्त्सना करते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग की। मंच ने सवाल किया कि अगर कश्मीरी ड्राईफ्रूट बेचने वालों पर हमला करने वाले से मिलने पर मुख्यमंत्री की छवि धूमिल नहीं होती तो एक टिप्पणी मात्र से कैसे धूमिल हो सकती है। प्रशांत की गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक सूचना न देना मानवाधिकार और संविधान का उल्लंघन है।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि मीडिया पोर्टल द वायर, इंडियन एक्सप्रेस और बीबीसी के लिए काम कर चुके और वर्तमान में स्वतंत्र पत्रिकारिता कर रहे पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला और डराने की कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि महिला के दावे का मुख्यमंत्री की तरफ से कोई खंडन नहीं किया गया और न ही उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई ही की गई। उन्होंने कहा कि उसी वीडियो को रिपोस्ट करने को आधार बनाकर प्रशांत कनौजिया को कल दिल्ली स्थित उनके आवास से करीब बारह बजे सादे कपड़ों में 5-6 की संख्या में पुलिस वालों ने उठा लिया।

राजीव यादव ने कहा कि जिस तरह से आनन फानन में प्रशांत कनौजिया के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 और सूचना प्रोद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 की धारा 66 में मुकदमा दर्ज कर उठा लिया गया वह वर्तमान कानून का मखौल उड़ाने जैसा है। उक्त दोनों धाराओं में अधिकतम तीन साल के दंड का प्रावधान है और वर्तमान नियमों के मुताबिक इन धाराओं में बिना सक्षम मजिस्ट्रेट के वारंट के गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।

उत्तर प्रदेश में उच्चतम स्तर पर निर्देशित इस तरह की गिरफ्तारी बताती है कि भाजपा सरकार का संविधान और कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि चुनावी शपथ पत्र में आपराधिक रिकार्ड दर्शाने से, भड़काऊ भाषण, हत्या और आगज़नी के आरोपों से योगी के सम्मान को कोई ठेस नहीं पहुंचता, सुप्रीम कोर्ट में चल रहे उनके खिलाफ अपराधिक मामले उनको विचलित नहीं करते, वीडियो में महिला द्वारा किए गए दावे से उनके मान सम्मान पर आंच नहीं आती तो प्रशांत कनौजिया की पोस्ट पर इतनी आपत्ति क्यों है? इसलिए उन पर की गई एफआईआर और कानून को धता बताते हुए गिरफ्तारी को दमनात्मक कार्रवाई क्यों न समझा जाए?

 










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