जज लोया मामले का कार्टून शेयर करने पर बस्तर के पत्रकार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा

मुद्दा , , सोमवार , 30-04-2018


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तामेश्वर सिन्हा

कांकेर (बस्तर): छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला पर कांकेर थाने में राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है । उनके खिलाफ ये मुकदमा सीबीआई जज लोया से संबंधित एक कार्टून को सोशल मीडिया पर शेयर करने के चलते हुआ है। कांकेर के एसपी केएल ध्रुव ने भी इसकी पुष्टि की है। आईपीसी की धारा 124 A के तहत ये मुकदमा राजस्थान के साइबर सेल में एक व्यक्ति की शिकायत के बाद दर्ज किया गया है। उसके बाद इसे कांकेर भेज दिया गया। इसमें जांच के बाद गिरफ्तारी की बात कही जा रही है । 

आप को बता दें कमल शुक्ला बस्तर में आदिवासी अधिकारों के हनन के मामले को बेबाक तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं। पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने को लेकर भी उन्होंने एक लंबी लड़ाई लड़ी थी। आदिवासियों को नक्सली बता कर फर्जी मुठभेड़ों के मामले भी कमल शुक्ला पूरे जोर-शोर से उठाते रहे हैं। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार न्यायपालिका का एक कथित कार्टून उन्होंने शेयर किया था जिसकी शिकायत राजस्थान के रहने वाले एक व्यक्ति ने साइबर सेल को की थी। हालांकि कार्टून शेयर करने को लेकर राजद्रोह जैसे गंभीर आरोप के तहत मामले दर्ज करने पर कांकेर एसपी कहते हैं कि पुलिस मुख्यालय के आदेश के तहत उन पर यह मामला कायम किया गया है। 

खबर मिलने के बाद पत्रकार कमल शुक्ला ने अपने फेसबुक टाइम लाइन पर ये पोस्ट लिखी है:

राष्ट्रद्रोह 124 (आ) मुझ पर लगाया गया है। देश मे लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किये जाने की साजिश पर अकेले मैंने चिंता जाहिर नहीं की है बल्कि तमाम विपक्षी दलों सहित स्वस्थ लोकतंत्र पर विश्वास रखने वाले सभी पत्रकार, लेखक बुद्धिजीवी इस विषय पर रिपोर्ट, लेख, कार्टून आदि के द्वारा लोगों को आगाह कर रहे हैं।

जज लोया के प्रकरण पर चीफ जस्टिस की भूमिका पर उंगली खुद सुप्रीमकोर्ट के चार सीनियर मजिस्ट्रेट उठा चुके हैं। कांग्रेस और कई अन्य दलों ने महाभियोग भी लाया जिसे बिना जांचे परखे खारिज करने के जरिये लोकतंत्र को और करारा झटका दिया जा चुका है । जब चीफ जस्टिस ने जज लोया की संदेहास्पद मृत्यु के मामले पर जांच की मांग खारिज कर देश भर की जनता के संदेह को पुष्ट कर दिया कि देश की सर्वोच्च न्याय पालिका दबाव में है तो वह कार्टून (जो अब मेरे वाल से सम्भवतः फेसबुक ने हटा लिया है) कैसे गलत और राष्ट्रद्रोह हो सकता है? 

कमल शुक्ला द्वारा फेसबुक वाल पर जारी प्रतिक्रिया।

न्याय की देवी के रूप में आंखों पर पट्टी बांधे और तराजू रखे महिला को इस कार्टून में नीचे गिरा दिखाया गया है, जिसके हाथों को वर्तमान तंत्र के जिम्मेदार राजनीतिज्ञों द्वारा पकड़ कर रखा गया है, इनके सामने देश बांटने वाली विचारधारा के प्रमुख खड़े हुए हैं। तो सच तो यही है, इसमें गलत क्या है। इस कार्टून में न्यायपालिका की स्थिति पर चिंता प्रकट की गई है जो राष्ट्रद्रोह हो ही नहीं सकता। फिर किसी की फेसबुक पोस्ट पर यह धारा तो लगायी ही नहीं जा सकती है। 

अगर सच कहना ही देशद्रोह है तो फिर से सुन लो, कार्पोरेट के गुलाम मोदी, शाह की भाजपा सरकार ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को तहस-नहस कर डाला है। न्यायपालिका में अपने चहेतों को बिठा दिया गया है और भाजपा समर्थकों के गम्भीर अपराध माफ किए जा रहे हैं। भाजपा सरकार को अपने खर्चे से स्थापित करने वाले सेठ अम्बानी ने उनके पक्ष में देश की आधे से ज्यादा मीडिया घरानों को खरीदकर लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ दी है । यही सच है, मैं बार-बार कहूंगा ।

कल्लुरी द्वारा दर्ज कराए गए मामलों पर अभी जमानत भी नहीं हो पायी है । कोई बात नहीं, मेरा अभियान रुकेगा नहीं। असली देशद्रोहियों भाजपाइयों ने लोगों को भ्रमित रखने के लिए आईटी सेल ही नहीं बनाया बल्कि सच बताने वालों को जेल और कानूनी उलझन में फंसाने के लिए लीगल (इलीगल) सेल भी बनाया है। मैं इसी ग्रुप का शिकार हुआ हूं। लोकतंत्र और देश बचाने की मुहिम जारी रहेगी।

आप को बता दें कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दौरान प्रदेश में पत्रकारों पर लागातार हमले होते आए हैं। कमल शुक्ला लगातार पत्रकारिता का वजूद बचाने के लिए संघर्षरत करते रहे हैं। 

 

(तामेश्वर सिन्हा पेशे से पत्रकार हैं और आजकल बस्तर में रहते हैं।)








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