लोकपाल पर अन्ना का नया आगाज

मुद्दा , नई दिल्ली, शुक्रवार , 09-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे एक बार फिर राजधानी दिल्ली में सत्ता के दरवाजे पर दस्तक देंगे। वो 23 मार्च 2018 को लोकपाल नियुक्ति की मांग को लेकर धरना देने आ रहे हैं। अपनी तरफ से जारी एक वीडियो में उन्होंने कहा है कि सरकार ने लोकपाल विधेयक में संशोधन कर उसे कमजोर कर दिया है। इस सिलसिले में उन्होंने सरकारी अफसरों और सांसदों समेत दूसरे सरकारी पदों पर बैठे लोगों की संपत्ति के संबंध में पारित कानून का हवाला दिया। जिसमें उन्हें अपने बीवी और बच्चों के नाम की चल-अचल संपत्तियों को सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी से बरी कर दिया गया है।

संसद से पारित लोकपाल के असली कानून में इन सभी लोगों को हर साल के 31 मार्च तक अपने पूरे परिवार की संपत्ति घोषित करने का प्रावधान था। लेकिन अन्ना का कहना है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 26 जुलाई 2016 को लोकसभा में लोकपाल की धारा-44 में संशोधन कर उसमें बदलाव कर दिया। इसके पास होने के बाद अब किसी भी अफसर या फिर सरकारी पद पर बैठे शख्स को अपने परिवार की संपत्ति नहीं घोषित करनी होगी। लोकसभा से 26 जुलाई को इस संशोधन के पारित होने के बाद 28 जुलाई को इस पर राज्यसभा की मुहर लग गयी। और फिर उसके अगले ही दिन उसको राष्ट्रपति से अनुमोदन भी मिल गया।

https://www.youtube.com/watch?v=XqYVM3-3nVQ

अन्ना इस बात को लेकर भी नाराज हैं कि चार साल बीत जाने के बाद भी अभी तक मोदी सरकार ने लोकपाल नहीं नियुक्त किया। हालांकि ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने भी गया था। एक साल पहले उसने केंद्र को लोकपाल नियुक्त करने का आदेश दिया था। लेकिन अपने आदेशों का पालन न होने पर उसने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। इस मसले पर अवमानना के मामले की सुनवाई करते हुए उसने एक बार फिर केंद्र को नोटिस जारी की।

जिसके दबाव में केंद्र सरकार ने पहल की और लोकपाल नियुक्ति के लिए 1 मार्च को एक बैठक आयोजित की। लेकिन उसमें भी लोकसभा में विपक्ष के नेता को केवल एक आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुलाने का कांग्रेस ने विरोध किया और सदन में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक में भाग लेने से ही इंकार कर दिया। बैठक में भी ज्यूरी की खोज के लिए प्रस्ताव पारित किया गया।










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