मालद्वीव में इमरजेंसी: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस गिरफ्तार,नाशीद ने की भारत से दखल की अपील

देश-दुनिया , नई दिल्ली, मंगलवार , 06-02-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। मालद्वीव में अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने इंमरजेंसी लागू करके सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस समेत दो जजों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल गयूम को गिरफ्तार कर लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक राष्ट्रपति अब्दुल्ला ने इमरजेंसी की मियाद 15 दिन घोषित की है। 

इस बीच पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद ने एक ट्वीट के जरिये भारत और अमेरिका से अपील की है। उन्होंने भारत से सेना के साथ अपना दूत भेजने को कहा है। जिससे जजों और अब्दुल गयूम समेत गिरफ्तार नेताओं को रिहा कराया जा सके। उन्होंने भौतिक तौर पर उपस्थिति की गुजारिश की है।

नाशीद ने अमेरिका से मालद्वीव सरकार के साथ अमेरिकी बैंकों के जरिये होने वाले सभी वित्तीय लेन-देन को तत्काल रोक देने की अपील की है।

गौरतलब है कि एक फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद समेत 9 विपक्षी नेताओं के खिलाफ लगे आतंकवाद के आरोपों को रद्द कर दिया था। लेकिन सरकार ने उसके आदेश को मानने से इंकार कर दिया।

 

अल जजीरा के मुताबिक चीफ जस्टिस अब्दुल्ला और जज अली हमीद को मंगलवार की सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि पुलिस ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को नहीं बताया है। इमरजेंसी लगाए जाने के बाद पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरीकेड लगा दिया था। इसके अलावा विरोध करने वालों पर लाठी चार्ज की भी खबरें हैं।

गिरफ्तार होने के बाद सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में गयूम ने कहा है कि “मैंने किसी तरह का कोई अपराध नहीं किया है। ये गिरफ्तारी पूरी तरह से अवैध है। मैं मजबूत बना रहूंगा और अपने प्यारे लोगों से भी मजबूत बने रहने की अपील करता हूं।” गौरतलब है कि गयूम 2008 तक 30 साल लगातार मालद्वीव के राष्ट्रपति रहे हैं।

 

सोमवार को यामीन ने ये कहते हुए इमरजेंसी घोषित कर दी थी कि सुप्रीम कोर्ट उनकी जिम्मेदारियों को निभाने में रोड़ा बन रहा है। सांसद इवा अब्दुल्ला ने कहा कि “सभी बुनियादी अधिकारों को निलंबित कर दिया गया है।” सुरक्षा बल के जवानों ने पार्लियामेंट को सील कर दिया है। उन्होंने विपक्ष के दो सांसदों को भी गिरफ्तार कर लिया है।

 

प्रतिक्रियाएं:

अमेरिकी गृह विभाग ने कहा है कि “ वो मालद्वीव में इमरजेंसी की स्थिति से परेशान और चिंतित है।” उसने कहा है कि राष्ट्रपति, सेना और पुलिस कोर्ट के कानूनी आदेश को लागू करने में नाकाम रहे हैं। जो संविधान और कानून के शासन के खिलाफ है।

 

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को माले या फिर मालद्वीव के किसी दूसरे इलाके की गैर जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है। प्रवासियों को भी इसने सार्वजनिक तौर पर सावधान रहने और किसी भीड़ में जाने से बचने की सलाह दी है।

 

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि इमरजेंसी को उत्पीड़न का लाइसेंस नहीं बनाया जाना चाहिए।










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