अब माओवादी भी चाहते हैं छत्तीसगढ़ का विकास, पर्चा जारी कर सरकार के सामने पेश की कई मांगें

मुद्दा , बस्तर, बृहस्पतिवार , 31-01-2019


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तामेश्वर सिन्हा

बस्तर। तो अब नक्सली भी चाहते हैं विकास, जी हां तीन दशक से भी अधिक समय से प्रदेश में हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम दे रहे माओवादी अब सरकार से बस्तर क्षेत्र में विकास की बात कर रहे हैं।  इसके लिए माओवादियों की ओर से एक कथित प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है। इस विज्ञप्ति में आदिवासी क्षेत्रों में विकास की गुहार लगाई गई है।

बीजापुर में सक्रिय माओवादियों के पामेड़ एरिया कमेटी की ओर से जारी इस कथित विज्ञप्ति में 17 सूत्रीय मांग की गई है। इसमें माओवादियों ने सरकार से पिछड़े इलाकों का विकास करने की बात कही है। अपने आधार के इलाके में माओवादियों ने सरकार से आश्रम, अस्पताल और स्कूल बनाने की मांग की है। इसके साथ ही इन अस्पताल और स्कूलों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग भी शामिल है।

नक्सलियों का पर्चा।

माओवादियों की ओर से जारी इस विज्ञप्ति में युक्ति युक्तिकरण के तहत राज्य भर में बंद किये गए 3000 स्कूलों को फिर से चालू करने की मांग सरकार से की है। इसके अलावा माओवादी चाहते हैं कि स्कूल कालेजों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। इसके अलावा महिला सुरक्षा कानून पारित करने और संविदा कर्मियों का वेतन बढ़ाने और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समान काम का समान वेतन देने का मामला भी उनके एजेंडे में शामिल है। माओवादियों की इस विज्ञप्ति में वनोपज का समर्थन मूल्य निर्धारित करने के साथ ही सरकार द्वारा बन्द किये गए महुआ और गोंद की खरीदी को फिर से शुरू करने के लिए तत्काल कदम उठाने की बात कही गयी है। 

नक्सलियों का पर्चा।

आप को बताते चलें कि माओवादी एक तरफ सरकार से विकास करने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपनी हरकतों से बाज भी नहीं आ रहे हैं। एक बार फिर नक्सलियों ने सुकमा जिले के फूल बगड़ी थाना क्षेत्र में मिक्सर मशीन में आग लगा दी गयी है। साथ ही उन्होंने पर्चे फेंककर काम बन्द करने की चेतावनी दी है।

इस पर्चे के आने के साथ ही सूबे में इस बात पर चर्चा गर्म हो गयी है कि आखिर इसके पीछे माओवादियों की क्या रणनीति है। क्या इसे उनकी नीतियों में बड़े फेरबदल का संकेत माना जाए या फिर इसके पीछे कोई दूसरी वजह है जिसका खुलासा होना अभी बाकी है। एक तबका उनके इस पर्चे को लेकर ही सवाल उठा रहा है। ये बात सही है कि आधिकारिक तौर अभी इसकी पुष्टि होनी बाकी है कि ये पर्चा कितना सही है और कितना गलत। शायद यही वजह है कि अभी सरकार भी इस पर कुछ नहीं बोलना चाहती है। क्योंकि उसकी तरफ से भी इस पर अभी तक किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आयी है।








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