अल्पसंख्यकों से जुड़ी मांगों को लेकर गुजरात विधानसभा के सामने हुआ बड़ा प्रदर्शन

मुद्दा , , शुक्रवार , 21-12-2018


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जनचौक ब्यूरो

गांधीनगर। अंतर्राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के मौके पर अल्पसंख्यकों के विकास और उनकी सुरक्षा संबंधी मूलभूत मांगों को लेकर गुजरात विधानसभा के सामने प्रदर्शन और सभा हुई। गुजरात में इस तरह का ये पहला कार्यक्रम है। सत्याग्रह छावनी में हुई इस सभा में अल्पसंख्यकों से जुड़े तमाम मामलों को उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि सूबे में अल्पसंख्यक समुदाय के विकास और उनकी रक्षा के लिए कोई तंत्र मौजूद नहीं है| उन्होंने कहा कि सूबे में न तो अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय है और न ही राज्य अल्पसंख्यक आयोग। साथ ही उनके विकास के लिए अलग से कोई बजट भी नहीं है। जिसके चलते प्रदेश की 11.5% आबादी विकास के तथाकथित दावों से दूर है।

सभा को संबोधित करते हुए माइनॉरिटी को-आर्डिनेशन कमेटी (MCC) के कन्वेनर मुजाहिद नफीस ने कहा कि गुजरात में अल्पसंख्यक समाज डर के साये में जी रहा है, अब तो भैंस ले जाते हुए भी लोगों को डर लग रहा है। क्योंकि तथाकथित रक्षक उन्हें भी नहीं बख्श रहे हैं और रास्ते में हमले कर उन्हें लूट ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा पूरी तरह फर्जी है। सचाई ये है कि गुजरात में मुस्लिम समाज की लड़कियों का कक्षा 1-5 में ड्रापआउट रेट 10.58% है। लेकिन सब कुछ जानते हुए भी सरकार इस पर कोई कार्यवाही नहीं कर ही है।

यहां तक कि गुजरात में अल्पसंख्यक समाज की शिकायतें सुनने के लिए कोई आयोग तक नहीं हैं। अगर देश में है तो गुजरात में उसे क्यों नहीं होना चाहिए। ये बताता है कि सूबे की सरकार अल्पसंख्यकों से जानबूझ कर भेदभाव करती है। उन्होंने कहा कि आज यहां पहुंचे सभी लोग सही मायनों में स्वतंत्रता के सिपाही है क्योंकि उन्होंने डर को तोड़ कर बाहर कदम निकाला है। उन्होंने ऐलान करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में इससे भी बड़ा प्रदर्शन होगा। 

गुजरात विधानसभा के सामने प्रदर्शन।

इस मौके पर हाजी असरार बेग मिर्ज़ा नें कहा कि आज समय की ज़रुरत है कि हम अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आगे आएं और राज्य में अल्पसंख्यक आयोग, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की स्थापना के लिए गांव-गांव में जाग्रति अभियान छेड़ें। क्योंकि इसके लिए लोगों को जागरूक करना होगा।

 अभियान की मांगें

1- राज्य में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की स्थापना की जाए|

2- राज्य के बजट में अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए ठोस आवंटन किया जाये|

3- राज्य में अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया जाये और उसके लिए जरूरी संवैधानिक मजबूती का विधेयक विधानसभा में पास किया जाये|

4-      राज्य के अल्पसंख्यक बहुल विस्तारों में कक्षा 12 तक के सरकारी स्कूल खोले जाएं|

5-      मदरसा डिग्री को गुजरात बोर्ड के समकक्ष मान्यता दी जाये|

6-     अल्पसंख्यक समुदाय के उत्थान के लिए विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाये|

7-      सांप्रदायिक हिंसा से विस्थापित हुए लोगों के पुनर्स्थापन के लिए सरकार नीति बनायी जाए|

8-      प्रधानमंत्री के नये 15 सूत्रीय कार्यक्रम का सम्पूर्ण रूप से अमलीकरण किया जाये|

इन मांगों को पूरा करने की कड़ी में गुजरात सरकार पर दबाव बनाने के लिए बहुत सालों बाद सूबे में इस तरह का प्रदर्शन हुआ है। और इसमें लोगों की भागादारी बताती है कि ये कारवां अब रुकने नहीं जा रहा है और आने वाले दिनों में अपनी मांगों को मनवाकर ही दम लेगा। सभा को शफी मदनी सेठ, युसूफ खान पठान (प्रमुख ओल इंडिया उलेमा बोर्ड) आसिफ खान जॉली (जुहापुरा लीडर अहमदाबाद), किरीटभाई परेरा ख्रिस्ती लीडर, रजनी भाई गोहिल, रमिंदर सिंह बग्गा, फारूक मालिक, तौफीक शेख, आबिद छुआरा, निसार अहमद, मोहम्मद लाखा, हूरा बेन दानी, गुलनार पठान, आरिफ घांची, नफीसा अंसारी, हाजरा दर्जी आदि ने संबोंधित किया। संचालन उस्मान गनी शेरासिया, स्वागत दानिश खान व सभी का धन्यवाद शकील शेख ने किया|

 

 

 

 








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