जीरा भारती के समर्थन में 30 को खेत मजदूरों की हड़ताल

इंसाफ की मांग , मिर्ज़ापुर, बृहस्पतिवार , 27-07-2017


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कुसुम वर्मा

मिर्जापुर में समान मजदूरी के सवाल को उठाने वाली दलित महिला नेता जीरा भारती पर हुए हमले और उनके ऊपर ही आपराधिक मुकदमें दर्ज किए जाने के खिलाफ खेत-मजदूरों ने 30 जुलाई को एक दिवसीय हड़ताल का फैसला किया है। इस हड़ताल में खेत मजदूर सभा के साथ महिला संगठन ऐपवा भी शामिल रहेगा। ऐपवा ने इससे पहले भी इस घटना के विरोध में 7 जुलाई को देशभर में प्रदर्शन किया था।

दलित महिला नेता जीरा भारती। फोटो साभार : गूगल

क्या है मामला?

पूर्वी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में दलित महिला नेता जीरा भारती ने समान मजदूरी का सवाल उठाया था। जिसके विरोध में दबंगों ने सरे-राह उनकी बर्बर ढंग से पिटाई की और अपमानित किया। जीरा के मुताबिक जब वह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गईं तो भाजपा के स्थानीय विधायक दबंगों के पक्ष में धरना देकर बैठ गए। उनके मुताबिक यह घटना भाजपा केबेटी बचाओ बेटी पढ़ाओके नारे और महिला सुरक्षा योजनाओं के दिखावटीपन की भी पोल खोलती है।

कौन हैं जीरा भारती?

स्कूटी चलाकर जनता के बीच घूमने, उनके हक अधिकार के लिए लड़ने वाली जीरा भारती मिर्जापुर की चर्चित जनप्रिय दलित नेता हैं। पिछले 10 सालों से वह खेत मजदूरों के मजदूरी के सवाल और महिलाओं के मान-सम्मान पर लगातार कई आन्दोलनों का नेतृत्व कर चुकी हैं और इन सवालों पर कई जीत भी हासिल हुईं हैं। वह खेत मजदूर सभा और महिला संगठन ऐपवा की राष्ट्रीय नेता भी हैं। अपने आन्दोलन का जिक्र करते हुए जीरा भारती ने बताया कि दो साल पहले हमारे गाँव रिक्शाखुर्द के बड़े दबंग जमींदार खेत में काम करने वाले गरीब मजदूरों जिसमें अधिकांश दलित और आदिवासी हैं को  30 से 40 रुपये मजदूरी दे रहे थे।  हमारे संगठित आन्दोलन के बदौलत आज उन्हें 100 से 200 रुपये मजदूरी मिल रही है। जीरा भारती कहती हैं कि यही कारण है कि दबंगों ने कई बार उन पर हमले भी किए उनके परिवार के सदस्यों को भी धमिकयां दी गईं।

दलित महिला नेता जीरा भारती। साभार

कब और किसने किया हमला?

जीरा भारती 3 जुलाई की रात अपने 14 साल के बेटे के साथ अपने गाँव रिक्शाखुर्द (पटेहरा ब्लाक) जा रही थी। आरोप है कि तभी स्थानीय दबंग जमींदार चटरू पटेल ने उनका रास्ता रोककर उन्हें महिला सूचक, जाति सूचक गलियां दी और बाल पकडकर उन्हें जमीन पर गिरा दिया शरीर से उनके कपड़े हटाकर उनकी बर्बर ढंग से पिटाई की। पीटने वालों में चटरू पटेल के परिवार की दो-तीन महिला सदस्य भी शामिल थीं। नाबालिग बेटे ने विरोध किया तो उसे भी जमीन पर गिराकर लात घूंसे मारे गए। घायल अवस्था में जीरा भारती ने महिला हेल्पलाइन पर फोन किया जिसके एक घंटे बाद पुलिस पहुंचती है और बिना किसी मेडिकल मदद दिए वापस चली जाती है।  4 जुलाई को जीरा भारती मडिहान थाने में अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराती हैं। दबंग चटरू पटेल के पक्ष में अपने कई समर्थकों के साथ स्थानीय भाजपा विधायक (मडिहान) रमाशंकर पटेल थाने पर पहुंचकर मामले को रफा-दफा करने के लिए थानाध्यक्ष पर दवाब डालने लगते हैं। बताया जाता है कि इस भाजपा विधायक पर खुद पहले से ही महिला हिंसा से सम्बन्धित कई संगीन धाराएँ लगी हुई हैं।

जीरा भारती के समर्थन में 6 जुलाई को ऐपवा ने देशभर में प्रदर्शन किया।

भारी जन दबाव के चलते दबंगों के खिलाफ दलित एक्ट में केस दर्ज हो जाता है। महिला संगठन ऐपवा ने विगत 7 जुलाई को जीरा भारती के साथ हुई यौन हिंसा के खिलाफ पूरे उत्तर प्रदेश समेत देश भर में विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किए।

आरोपी रिहा,पीड़िता पर मुकदमें दर्ज

जन आक्रोश के चलते पुलिस ने चटरू पटेल और एक नामजद महिला की गिरफ्तारी तो कर ली लेकिन आरोपी महिला को तो कुछ समय बाद ही छोड़ दिया जाता है। राजनैतिक संरक्षण के बल पर एक दिन बाद ही चटरू पटेल को भी पुलिस रिहा कर देती है। 9 जुलाई को सीओ मिर्जापुर के माध्यम से जीरा भारती को पता चलता है कि दबंगों ने उनके नाबालिग बेटे, पति और खुद उनके ऊपर वही सारी अपराधिक धाराएँ लगा दी हैं जिसे उन्होंने हमलावरों के खिलाफ लिखवाई थी।  

'महिला सुरक्षा की बातें सिर्फ दिखावा'

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए लगभग एक दर्जन योजनाओं का शुभारम्भ किया है, जिसकी कमान वह अपने हाथ में रखने की बात कर रहे हैं। इस पर जब हमने जीरा भारती के साथ आन्दोलन में शामिल आदिवासी महिला नेता श्यामकली से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री जी गुंडों और दबंगों को सहायता पहुँचाने और महिलाओं को डराकर घर पर बैठाने के लिए ही महिलाओं की सुरक्षा का जिम्मा लेना चाहते हैं।  उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री योगी सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए एंटी-रोमियो-स्क्वाड की बात करते हैं लेकिन हकीकत में जब गांव के दबंग जमींदार दलित महिला पर सरे-राह हमला करते हैं तो उन्हीं की पार्टी के विधायक उन्हें बचाते नजर आते हैं।  

पोस्टर साभार विनीता (मुंबई)

30 जुलाई को हड़ताल

मिर्जापुर शहर में और गांवों के कई इलाकों में स्कूटी सवार जीरा भारती के लगे पोस्टरों से हमें पता चलता है कि हैं कि जीरा भारती के ऊपर से आपराधिक मुकदमें वापस लेने, दोषियों को कड़ी कानूनी कार्रवाही की मांग को लेकर खेत-मजदूरों ने आगामी 30 जुलाई को एक दिवसीय हड़ताल का फैसला लिया है। जिसे खेत मजदूर सभा और ऐपवा संगठन सफल बनाने की कोशिश में जुटे हैं।

खेत मजदूरों की इस हड़ताल के बारे में मिर्जापुर के दलितों और आदिवासियों में चर्चित नेता सुरेश कोल का कहना है कि योगी सरकार के बनने के बाद स्थानीय दबंगों और सामन्ती ताकतों के हौसले बुलंद हैं दलितों और आदिवासियों पर हमले बढ़ रहे हैं। उन्हें मजदूरी, आवास मान-सम्मान आदि के नाम पर आए दिन हिंसा का शिकार होना पड़ता है और कोई सुनवाई भी नहीं होती। गरीब जनता की सांगठनिक ताकत ही इसका मुंहतोड़ जवाब दे सकती है। आम हड़ताल के सम्बन्ध में जीरा भारती से पूछा गया तो उन्होंने इतना ही कहा किदमन में कितना दम'

(कुसुम वर्मा ऐपवा की उत्तर प्रदेश की सचिव हैं।)

 










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