मुग़ल सराय तो झांकी है, इलाहाबाद-आजमगढ़ बाकी है!

एक नज़र इधर भी , लखनऊ, रविवार , 06-08-2017


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अंबरीश कुमार

मुग़ल सराय स्टेशन का नाम दीन दयाल उपाध्याय के नाम किए जाने पर सोशल मीडिया में सरकार की खिंचाई हो रही है। तरह तरह की टिप्पणी लोग कर रहे हैं। पर इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हिंदू युवा वाहिनी उनके गढ़ गोरखपुर से काफी पहले ही कर चुकी है। तब लोगों ने इसे ज्यादा तूल भी नहीं दिया। उसकी दो वजह थी। एक तो यह सब हिंदू बहुल इलाकों में हुआ जहां भाजपा से जुड़े व्यापारियों की संख्या ज्यादा थी। दूसरे योगी आदित्यनाथ की हिंदू युवा वाहिनी के प्रभाव का भी यह क्षेत्र था। यही वजह है कि जब ' मियां बाजार' को ' माया बाजार' और 'उर्दू बाजार' को 'हिंदी बाजार' में बदला गया तो कोई ज्यादा विवाद नहीं हुआ। इसके बाद हुमायुंपुर से लेकर अलीनगर तक जैसे कुछ मोहल्लों के भी नाम बदले गए पर नए नाम बदलने बाद भी ज्यादा प्रचलित नहीं हुए। दरअसल ये नाम लोगों की जुबान पर दशकों से चढ़े हुए हैं तो इतनी आसानी से कैसे बदल जाते। पर प्रयास तो जारी है। 

आजमगढ़ और इलाहाबाद के जंक्शन की तस्वीरें।

लखनऊ का एक मशहूर और नया मोहल्ला है इंदिरा नगर। काफी पहले इसका नाम बदल कर इसे राम सागर मिश्र नगर बनाया गया। पर यह इंदिरा नगर ही बना रहा क्योंकि लोगों की जुबान पर यह नाम चढ़ गया है। इसलिए मुग़ल सराय का नाम बदलने के बावजूद कितना चलेगा अभी नहीं कह सकते। पर ये यहीं पर ही नहीं रुकने वाले हैं। गोरखपुर के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार कलानिधि मिश्र ने कहा कि ' जो कुछ गोरखपुर में एक डेढ़ दशक पहले हुआ वह अब समूचे प्रदेश में होगा। गोरखपुर में हुमायूंपुर को हनुमानपुर किया तो मियां बाजार को माया बाजार। पर अब तो कई और नाम बदलेंगे। हाल ही में योगी आदित्यनाथ ने जब मीडिया के कुछ चुनिंदा लोगों को भोज पर बुलाया तो वे इलाहाबाद को लगातार प्रयाग कहते रहे। इस पर एक ने तो सुझाव ही दे दिया कि क्यों न इलाहाबाद का नाम प्रयाग कर दें। इस टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सत्तारूढ़ दल आगे भी नाम बदल सकता है। आजमगढ़ का नंबर सबसे ऊपर रहेगा। फिर तो शाहजहांपुर से लेकर रोजा जंक्शन का भी नंबर आएगा।

दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसदा मुखर्जी।

पर कुछ अड़चने भी हैं। राजनैतिक टीकाकार सीएम शुक्ल ने कहा कि “हालांकि दुर्भाग्य यह है इनके बहुत कम नेता हैं और उनका योगदान भी ज्यादा नहीं है। आजादी की लड़ाई से तो कोई नाता ही नहीं रहा। ले देकर दो शीर्ष नेता हैं दीन दयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी। दोनों की ही मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। मधोक ने तो अपनी पुस्तक में दीन दयाल उपाध्याय की मृत्यु पर भाजपा के शीर्ष नेता की दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी का भी हवाला दिया है। ऐसे में क्या-क्या बदलेंगे और किसके नाम पर करेंगे। यह एक दिक्कत है”।

बहरहाल उत्तर प्रदेश या देश में ये क्या-क्या बदलेंगे यह तो नहीं कहा जा सकता। पर सत्ता के केंद्र लखनऊ में मोहल्लों के नाम मौलवी गंज, याहिया गंज, आलम नगर से लेकर हजरत गंज तक हैं। कितना बदलेंगे और क्या रखेंगे अभी नहीं कहा जा सकता। पर इस सबसे पार्टी संगठन का मजाक तो बन ही रहा है। लखनऊ के बुद्धिजीवी उग्रनाथ नागरिक ने कहा कि “यह सब करके यह 'भारतीय जग हंसाई पार्टी' बनती जा रही है”।

(लेखक शुक्रवार के संपादक हैं और 25 वर्षों से ज्यादा समय तक इंडियन एक्सप्रेस समूह से जुड़े रहे हैं। आजकल लखनऊ में रहते हैं।)










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Dharmendra :: - 08-06-2017

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