प्रीत भरारा के बाद एक और अमेरिकी भारतीय पर गाज

मुद्दा , , शनिवार , 22-04-2017


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जनचौक ब्यूरो

वाशिंगटन। अटार्नी पद से प्रीत भरारा को बर्खास्त करने के बाद ट्रंप प्रशासन ने एक और भारतीय को उसके पद से हटा दिया है। हटाए गए डॉ विवेक मूर्ति अमेरिकी स्वास्थ्य सेवाओं के मुखिया थे। उन्हें ओबामा के शासन के दौरान देश की स्वास्थ्य सेवा के सबसे बड़े पद पर बैठाया गया था। 39 वर्षीय डॉ मूर्ति की जगह उनकी डिप्टी रीयर एडमिरल सिल्विया ट्रेंट-एडम्स को बैठाया गया है।

स्वास्थ्य विभाग का बयान

अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अमेरिकी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के कमीशन कार्प को उनके सर्जन-जनरल की ड्यूटी से इस्तीफा देने के लिए कहा गया है। बयान में बताया गया है कि मूर्ति को उनके सर्जन जनरल पद से मुक्त कर दिया गया है।

ओबामा प्रशासन ने की थी नियुक्ति

डॉ. मूर्ति को दिसंबर 2014 में सर्जन जनरल बनाया गया था। मूर्ति का चार साल का कार्यकाल था जिसे दिसंबर 2018 में पूरा होना था। लेकिन उससे पहले ही उनसे इस्तीफा मांग लिया गया। मूर्ति की नियुक्ति में भी ओबामा प्रशासन को बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ा था। सीनेट से उनके नाम का प्रस्ताव 43 के मुकाबले 51 वोटों से पारित हुआ था।

नहीं की प्रतिकूल टिप्पणी

हालांकि मूर्ति ने इस पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने इतने बड़े पद पर बैठाए जाने के लिए अमेरिका और उसके प्रशासन के प्रति आभार जताया है। फेसबुक पर दी गयी एक पोस्ट में उन्होंने कहा है कि एक गरीब किसान परिवार के पोते से एक राष्ट्रपति द्वारा पूरे देश की स्वास्थ्य सेवा देखने को कहे जाने से बड़ी दयालुता क्या हो सकती है। ये अपने आप में एक अनोखी अमेरिकी कहानी है। मेरे प्रवासी परिवार का 40 साल पहले स्वागत कर उसे सेवा का मौका देने के लिए मैं अपने देश के प्रति हमेशा ऋणी रहूंगा।

कर्नाटक के थे मूर्ति के माता-पिता

मूर्ति के माता-पिता मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले थे। मूर्ति इंग्लैंड के हडर्सफील्ड में पैदा हुए थे। बाद में उनका परिवार अमेरिका के मियामी, फ्लोरिडा चला गया जब मूर्ति महज 3 साल के थे।

न्यूयार्क टाइम्स में छपी एक खबर में कहा गया है कि ये तुरंत साफ नहीं हो पाया है कि डॉ मूर्ति को क्यों हटाया गया है। लेकिन ये ध्यान देने वाली बात है कि उनके एकाएक जाने से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अचरज में हैं। हालांकि इसे ट्रंप के विदेशियों और खास कर भारत के खिलाफ चलाए गए अभियान के हिस्से के तौर पर भी देखा जा रहा है। 










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