नीतीश ने बदला पाला, कोविंद के समर्थन की औपचारिक घोषणा बाकी

राजनीति , , बुधवार , 21-06-2017


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जनचौक ब्यूरो

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति के लिए राम नाथ कोविंद के नाम का समर्थन करने का फैसला ले लिया है। ये खबर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हवाले से आयी है।

इस सिलसिले में नीतीश आज शरद यादव समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे और उसके बाद औपचारिक तौर पर विपक्ष के साथ न जाने के अपने फैसले का ऐलान कर देंगे अगर वो अपना कोई नया प्रत्याशी खड़ा करता है तो। बताया जा रहा है कि नीतीश ने इस बात को सोमवार को ही सोनिया को बता दिया था जब रामनाथ कोविंद की एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी की घोषणा हुई थी।

इसके साथ ही नीतीश 18 सदस्यीय विपक्षी दलों के उस ब्लाक से हट जाएंगे जिसकी कल सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बैठक होनी है। 71 वर्षीय कोविंद दलित समुदाय से आते हैं और घोषणा होने के समय बिहार के राज्यपाल थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक निष्पक्ष गर्वनर के तौर पर काम करने के लिए उनकी तारीफ की थी। नीतीश के इस फैसले के साथ ही विपक्षी खेमे में निराशा छा गयी है। लेफ्ट और कांग्रेस किसी भी हालत में चुनाव के पक्ष में हैं। बीजेपी और उसके क्षेत्रीय घटकों को जोड़ दिया जाए तो उसके पास तकरीबन 60 फीसदी वोट हो जा रहे हैं। लेकिन लेफ्ट किसी भी कीमत पर चुनाव चाहता है। उसका कहना है कि ये लड़ाई वैचारिक है।

आपको बता दें कि इसके पहले भी नीतीश कुमार ने 2012 में एनडीए के प्रत्याशी को ठुकराकर यूपीए के प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने का फैसला किया था। उस समय एनडीए ने प्रणब के मुकाबले पीए संगमा को अपना प्रत्याशी बनाया था।

विपक्ष इस मौके को 2019 में होने वाले आम चुनाव में अपने बीच एकता के पूर्व प्रदर्शन के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। जिससे वो प्रधानमंत्री मोदी को कड़ा मुकाबला दे सके।

कुछ इसी तरह के हालात बीएसपी खेमे में भी हैं। कोविंद के प्रत्याशी बनने के बाद मायावती ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में एक दलित का विरोध कर पाना कठिन बताया है। लेकिन साथ ही उनका इशारा था कि अगर विपक्ष किसी दलित प्रत्याशी को उतारता है तो उस पर सोचा जा सकता है।

इस कड़ी में विपक्षी खेमे में संभावित मजबूत दलित प्रत्याशियों को लेकर भी विचार-विमर्श शुरू हो गया है। इसमें पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। इसके अलावा कुछ कोनों से भीम राव अंबेडकर के पोते प्रकाश अंबेडकर और  यूजीसी के चेयरमैन रहे प्रोफेसर सुखदेव थोराट का भी नाम सामने आया है।










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