प्रो. साईबाबा ने जेल से पत्नी को लिखा पत्र : “मुझे नहीं लगता मैं इन सर्दियों में जीवित रह पाऊंगा”

एक नज़र इधर भी , , सोमवार , 30-10-2017


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जनचौक डेस्क

नई दिल्ली। माओवादियों से संबंध रखने के आरोप में उम्र कैद की सज़ा काट रहे दिल्ली यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के प्रोफेसर रहे जीएन साईबाबा ने अपनी पत्नी को जेल से पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने बताया कि वे जेल में बेहद मुश्किल स्थिति में हैं और उनके पास एक कंबल तक नहीं हैं। आने वाली सर्दियां उन्हें डरा रही हैं। उनके मुताबिक उन्हें नहीं लगता कि इन सर्दियों में वे जीवित रह पाएंगे।

आपको बता दें कि साईबाबा शारीरिक रूप से 90 फीसदी तक विकलांग हैं। उन्हें इसी साल मार्च महीने में महाराष्ट्र की गढ़चिरौली अदालत ने आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी। उनके साथ जेएनयू के छात्र हेम मिश्रा और पत्रकार प्रशांत राही को भी उम्र कैद की सजा दी गई थी। तब से वे नागपुर जेल में बंद हैं। साईबाबा ने जेल से पत्नी को लिखे पत्र में कहा है कि मैं यहां उस की तरह जी रहा हूं, जो अपनी अंतिम सांसों के लिए संघर्ष कर रहा हो।

लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता शीबा असलम फ़हमी अपने फेसबुक वॉल पर इस पत्र को शेयर करते हुए लिखती हैं कि “शोषित-दलित के पक्ष में खड़ा होना ही इस जनविरोधी, फासीवाद की पोषक सत्ता को सबसे बड़ा जुर्म नजर आता है। शोषितों के हक में आवाज बुलंद करनेवाले प्रोफेसर साई के साथ (जो कि शारीरिक रूप से 90% अक्षम हैं।) जेल मे जानवरों सा बर्ताव किया जा रहा है।

स्वास्थ्य बिगड़ने के बाबजूद कोई सेवा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। बुखार होने और ठंड से कांपने के बावजूद न तो उन्हें एक कंबल उपलब्ध कराया जा रहा है न ही पहनने के लिए ही कोई गर्म कपड़ा। उनका स्वास्थ्य बदतर होता जा रहा है। यह सब उन्होंने जेल से अपनी जीवनसाथी को लिखे पत्र में बताया है। आमजन के साथ खड़े होने वाले प्रोफेसर साईं के लिए आज सभी बुद्धिजीवियों और जनवादियों को आवाज उठाने की ज़रूरत है।”

आइए पढ़ते हैं वह पत्र जो उन्होंने जेल से पत्नी एएस वसंता कुमारी को लिखा है। यह पत्र 17 अक्टूबर को लिखा गया था जो उनकी पत्नी को 25 अक्टूबर को प्राप्त हुआ। अंग्रेजी में लिखे गए इस पत्र का अनुवाद “जनज्वार डॉट कॉम” से साभार लिया गया है।

अपनी पत्नी के साथ प्रो. साईबाबा। फोटो : साभार

प्रिय वसंता

मुझे दस्तक दे रही सर्दियों के बारे में सोचकर ही डर लग रहा है। पहले से ही मुझे लगातार बुखार बना हुआ, परेशान हूं मैं बुखार से। मेरे पास सर्दी से बचाव के लिए एक कंबल तक नहीं है। न ही मेरे पास स्वेटर या जैकेट पहनने के लिए है, जिससे कि मैं ठंड से अपना बचाव कर सकूं। जैसे-जैसे ठंड दस्तक दे रही है मेरे पैरों में और बाएं हाथ में लगातार दर्द बढ़ता जा रहा है।

नवंबर से शुरू होने वाली सर्दी के दौरान मेरे लिए यहां सर्वाइव करना लगभग असंभव जैसा है। मैं यहां उस जानवर की तरह जी रहा हूं, जो अपनी अंतिम सांसों के लिए संघर्ष कर रहा हो। मैंने यहां किसी तरह ये 8 महीने बिताए हैं। लेकिन मुझे नहीं लगता कि ठंड में मैं यहां जीवित रह पाउंगा। इस बात का मुझे पूरा यकीन है। मुझे नहीं लगता कि मुझे और ज्यादा अपने स्वास्थ्य के बारे में लिखने की जरूरत है। 

कृपया किसी भी तरह इस महीने के आखिर तक या इससे पहले किसी वरिष्ठ वकील को मेरे केस को देखने के लिए फाइनल करो। मिस्टर गाडलिंग को मेरी जमानत अर्जी नवंबर के पहले हफ्ते या अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में ही तैयार करने को कहो। तुम्हें पता है कि अगर मेरी जमानत नहीं हुई तो मेरी स्वास्थ्य की स्थिति आउट ऑफ कंट्रोल हो जाएगी। इसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं होउंगा। अब मैं इस बारे में आगे से तुम्हें कुछ और नहीं कहूंगा।

तुम्हें मेरी स्थिति के बारे में रेबेका जी और नंदिता नारायण से बात करनी चाहिए। इस बारे में प्रोफेसर हरगोपाल और अन्य लोगों से भी बात करो। उन्हें पूरी स्थिति समझाओ। प्लीज जल्दी कुछ करो। मैं बहुत डिप्रेस्ड हूं। इस निराशा में मुझे लगता है कि मेरी हालत एक ऐसे भिखारी की तरह हो गई है जो बिल्कुल बेसहारा है। लेकिन आप में से कोई भी एक इंच नहीं चल रहा है, कोई भी मेरी स्थिति को समझ नहीं पा रहा है।

मुझे लगता है कि कोई भी मेरी स्थिति नहीं समझ पा रहा है। नहीं समझ पा रहा है कि एक 90 प्रतिशत विकलांग व्यक्ति कैसे इस स्थिति में एक हाथ से संघर्ष कर रहा है, जो कई बीमारियों से पीड़ित है। कोई भी मेरी ज़िंदगी की परवाह नहीं करता है। यह सिर्फ एक आपराधिक लापरवाही है, एक कठोर रवैया है।

तुम अपना भी ध्यान रखो। तुम्हारा स्वास्थ्य मेरा और पूरे परिवार का स्वास्थ्य है। इस वक्त तुम्हारे अलावा कोई दूसरा तुम्हारा ख्याल रखने वाला नहीं है।

जब तक मैं नहीं हूं, तब तक तुम्हें बिना किसी लापरवाही के अपनी खुद ही देखभाल करनी होगी।

बहुत सारा प्यार 

तुम्हारा

साई










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Sheeba :: - 11-02-2017
I received this from one Mr. Rahul Kumar on whatsapp. The situation is really heartening.