चीनी सामानों के बॉयकाट का नारा देने वाले रामदेव का 50 टन चंदन चीन के रास्ते में जब्त

मुद्दा , नई दिल्ली, शुक्रवार , 23-02-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। बाबा रामदेव एक नये विवाद में फंस गए हैं। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस यानी डीआरआई ने 50 टन चंदन की लकड़ी पकड़ा है जिसे अवैध तरीके से चीन को निर्यात किया जा रहा था। इकोनामिक टाइम्स में आयी खबर के मुताबिक पतंजलि ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक डीआरआई ने 50 टन चंदन के लट्ठे पकड़े हैं। इसके साथ ही उसने दस्तावेज और एक पासपोर्ट भी बरामद किया है जो पतंजलि के एक प्रतिनिधि का है। ऐसा कहा जा रहा है कि पतंजलि को केवल ग्रेड सी के चंदन के निर्यात की अनुमति थी लेकिन पकड़ा गया माल माना जा रहा है कि ए ग्रेड और बी ग्रेड का बेहतर सामान था।

पतंजलि के एक प्रवक्ता ने ईमेल के जरिये कहा है कि “ हमने उसका निर्यात नहीं किया है लेकिन आंध्र प्रदेश फॉरेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड यानी एपीएफडीसीएल से खरीदने के बाद लाल चंदन की लकड़ी जरूर निर्यात करने की प्रक्रिया में है। और हम लोगों ने कुछ भी गलत या अवैध नहीं किया है। हर चीज देश के कानून के मुताबिक है।”

इसके आगे उन्होंने कहा कि “निर्यात की प्रक्रिया में सी श्रेणी के लाल चंदन की लकड़ी के लिए खरीद आदेश, प्रोफार्मा इनवायस, कृष्णापटनम पोर्ट पर भौतिक माल, सामान की दर, अनुमति और लाइसेंस समेत सभी तरह के दस्तावेज और तथ्य मौजूद हैं।”

इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को चीन भेजी जाने वाली चंदन की लकड़ी की जब्ती को चुनौती देने वाली पतंजलि की याचिका पर डीआरआई और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस संजीव खन्ना और चंदर शेखर की बेंच ने लकड़ी को छोड़ देने की पतंजलि की दलील पर केंद्र और डीआरआई को नोटिस भेजा है। पतंजलि के मुताबिक ये लकड़ियां डायरेक्टर जनरल ऑफ फारेन ट्रेड के यहां से निर्यात के लिए अधिकृत थीं। ये खबर पीटीआई के हवाले से आयी है।

बहुत पहले रामदेव चीनी सामानों के बायकाट का आह्वान कर चुके हैं। बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए जब उन्होंने कहा था कि “ भारतीयों को पूरी कड़ाई के साथ चीनी उत्पादों को खरीदना बंद कर देना चाहिए। ये उनके बाजार को हमारे देश में कम कर देगा और फिर ये चीज वापस जाने के लिए मजबूर कर देगी।”

एएनआई ने बाबा रामदेव के हवाले से बताया था कि “एक बार भारतीय इन उत्पादों को खरीदना बंद कर देंगे फिर ये चीनी कंपनियां वित्तीय तौर पर कमजोर हो जाएंगी और फिर अपने को वापस ले जाने के लिए बाध्य हो जाएंगी।”

2015 में पतंजलि कंपनी चंदन के सबसे बड़े खरीदार के तौर पर उभरी है। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा संचालित नीलामी में रामदेव की पतंजलि ने 706 टन चंदन की लकड़ी को 207 करोड़ रुपये में खरीदा है।

 










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