लखनऊ में असामाजिक तत्वों को पुलिस का खुला संरक्षण

पुलिस पर सवाल , लखनऊ, बृहस्पतिवार , 20-07-2017


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जनचौक ब्यूरो

लखनऊ। राजधानी के मड़ियाव इलाके में हत्या पर उतारू दबंगों की एक भीड़ ने एक मुस्लिम परिवार के सदस्यों पर तीन-तीन बार हमला किया। लेकिन सूचना पाने के बाद भी पुलिस मौन साधे रही। न तो उसने दौरा करना उचित समझा न ही दबंगों के खिलाफ कोई कार्रवाई। उल्टे पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही एफआईआर लिखकर उसे जेल भेज दिया गया है। इस हमले में पीड़ित ओवैस को गंभीर चोटें आयी हैं और उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। रिहाई मंच के नेताओं ने मौके का दौरा किया और पीड़ितों का हालचाल जाना। 

रिहाई मंच का प्रतिनिधिमंडल हाफिज मुहम्मद ओवैस से मुलाक़ात के लिए जब बलरामपुर अस्पताल पहुंचा तो वो बेड पर पड़े थे। उनकी हालत बहुत नाजुक थी। और ओवैस असह्य पीड़ा के दौर से गुजर रहे थे। दर्द इतना ज्यादा था कि उनकी बोलने तक की स्थिति नहीं थी। पीड़ित के बड़े भाई मोहम्मद नफीस ने बताया कि कल यानी 21 जुलाई उनके बाएं टूटे हाथ का आपरेशन है उसमें रॉड पड़ेगी। ओवैस के सिर में 9 से 10 सेंटीमीटर तक के घाव हैं और बाएं कान के नीचे गहरा जख्म हो गया है। 

घटना शुक्रवार की है। ब्योरा देते हुए नफीस ने बताया कि गुरुवार की रात साढ़े 9 बजे के करीब जब उनके बहनोई नौबस्ता खुर्द रामलीला मैदान की तरफ आ रहे थे तो छोटा चेतन, राघव, मोहित मिश्रा, सुरेंद्र, कौशल पाण्डेय, बाबा रावत, झुर्री, डंग उर्फ चांद बाबू चौरसिया पान भंडार के पास रास्ते पर खड़े थे। उन्होंने निकलने के लिए जब जगह मांगी तो इन सभी ने उनको धमकाते हुए मारना शुरू कर दिया। इसके बाद वो भागकर पास में ही डॉ. सुनील की क्लीनिक पर पहुंच गए। यहां उनके साले जावेद का उपचार चल रहा था। वाकया सुनने के बाद जावेद जब उन लोगों से पूछने आया कि उनके बहनोई के उन लोगों ने क्यों मारपीट की? बजाय जवाब देने के उन्होंने दोनों को फिर पीटना शुरू कर दिया। बातों-बातों में उन्होंने बताया कि चौरसिया पान भंडार ऐसे अराजक तत्त्वों का केंद्र है। जहां ये लोग शराब-गांजा के नशे में धुत रहते हैं और अक्सरहां मारपीट करते हैं। 

बलरामपुर अस्पताल में ओवैस

परिजनों का कहना है कि उसके बाद 10-12 लोग आकर उनके घर पर सांप्रदायिक गालियां देते हुए ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इसके बाद ओवैस के घर वालों ने 100 नंबर पर फ़ोन किया और कुछ देर बाद तकरीबन 12 बजे पुलिस पहुंची भी। लेकिन तब तक सारे गुंडे भाग चुके थे। उसके बाद बताया जा रहा है कि पुलिस ने चौरसिया पान भंडार और उनके बीच बात कराकर मामले को रफा-दफा करवा दिया। अभी उनका परिवार इस सदमें से उबरा भी नहीं था कि रात डेढ़ बजे के करीब फिर से 60-70 लोगों ने हमला बोल दिया। और उन्होंने उसी तरीके से ईंट-पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इस पर जब फिर उन लोगों ने 100 नंबर पर फ़ोन किया तो पुलिस ने थाने जाकर शिकायत दर्ज करने को कहा। तब उन्होंने पुलिस वालों को बोला कि भला वो कैसे आ सकते हैं जब उनके घर को लोगों ने घेर रखा है। और सभी उनके परिवार वालों की जान लेने पर उतारू हैं। परिवार की जान आफत में है बचाने की गुजारिश पर उन्होंने कहा कि वो उनको थोड़े उठा के ले जाकर कंप्लेन करवाएंगे लिहाजा पुलिस वाले नहीं आए। बाद में घर के पुरुषों ने किसी दूसरे रास्ते से निकलकर अपनी जान बचायी। बाद में पता चला कि पुलिस ढाई बजे के करीब आई और पूछने लगी तो महिलाओं ने कहा कि कोई पुरुष घर पर नहीं है। 

परिजनों का कहना है कि रात में जब पुलिस उनको बुला रही थी तो विरोधी पक्ष के 20-25 वकील थाने के अंदर जमा थे और 30-40 लोग बाहर उनका इंतज़ार कर रहे थे। उनका कहना था कि बाहर निकलने पर उनका पीटा जाना तय था। ये सब लोग उसी मौके का इंतजार कर रहे थे। हमलावरों की बजाय जावेद के खिलाफ एफआईआर का होना इस बात की पुष्टि करता है। 

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। रात के वाक़ये के बाद ओवैस दिन में तकरीबन 11 बजे घर से साठ हजार रुपये लेकर यहियागंज में बाजार करने के लिए निकलने के रास्ते में दुकान पर आया। इसी समय 40-50 की भीड़ ने दुकान पर हमला बोल दिया। और फिर उसी तरह से सांप्रदायिक गालियां देते हुए उन्होंने ओवैस को जमकर प और साम्प्रदायिक गालियां देते हुए ओवैस को जमकर पीटा। और उसके रुपये भी छीन लिए। हमले में ओवैस के पिता मो. अकरम को भी गंभीर चोटें आयीं। मामले की एफआईआर दर्ज कराने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जगह पुलिस ने उल्टे जावेद को ही गिरफ्तार कर लिया। 

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि मामला बहुत गंभीर है। यहां पुलिस का गुंडों को खुला संरक्षण मिला हुआ है। इसी का नतीजा है कि 24 घंटे के भीतर तीन-तीन बार हमले हो रहे हैं।  और पुलिस आरोपियों की जगह पीड़ितों के खिलाफ ही कार्रवाई कर रही है। हालांकि दोनों समुदायों की समझ-बूझ ने मामले को नियंत्रित कर दिया। लेकिन पुलिस की भूमिका इस मामले में बहुत गंभीर है। उन्होंने थाने में तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल में रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव, सृजनयोगी आदियोग, जियाउद्दीन और मुदस्सिर शामिल थे।










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