राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की उलटबांसी

आरएसएस और उसकी विचारधारा , , बृहस्पतिवार , 07-09-2017


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हिमांशु कुमार

मुझे संघी होने में क्या समस्या है?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एक सांस्कृतिक संगठन है,

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ही भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार है,

भारतीय जनता पार्टी भारत की सत्ताधारी पार्टी है,

भारतीय जनता पार्टी का विचार ही भारत सरकार का विचार है,

यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचार ही अब भारत सरकार के विचार हैं,

लेकिन अगर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचार ही भारतीय सरकार के विचार बन जायेंगे तो उसमें क्या समस्याएं आयेंगी ?

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मानता है कि भारतीय पुरातन विचार ही सत्य हैं,

भारतीय पुरातन विचार मानता है कि पहले ज्ञान था बाद में अज्ञान फ़ैल गया,

जबकि सारी दुनिया में समाजों के विकास की वैज्ञानिक खोज मानती है कि पहले अज्ञान था बाद में धीरे धीरे ज्ञान का विकास हुआ है और आज भी हो रहा है,

हम सब जानते हैं कि आज भी ज्ञान का विकास हो रहा है,

लेकिन भारतीय पुरातन विचार मानता है कि पहले सतयुग था तब सब कुछ अच्छा था लेकिन बाद में सब कुछ खराब होना शुरू हो गया,

इसी विचार से प्रभावित होकर बीच-बीच में भारत का प्रधानमंत्री कहता है कि पहले हमारा विज्ञान इतना विकसित था कि भारत में तो पहले इंसान के सर पर हाथी का सर लगाया जाता था,

इस विचारधारा को मानने वाले नेता कहते हैं कि समुन्दर में पत्थर तैरते थे और हनुमान सूर्य को निगल जाता था और राम के समय में विमान होते थे वगैरह वगैरह,

चिंता की बात यह है कि यह अब भारत सरकार के विचार हैं,

भारत सरकार के विचार होने का मतलब है कि भारत सरकार के स्कूल कालेज विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों को भी यही मानना पड़ेगा,

इसका अर्थ यह है कि भारत सरकार की समझ और वैज्ञानिक समझ के बीच बुनियादी झगड़ा है,

तो अब भारत सरकार वैज्ञानिक समझ पर हमला करेगी,

वैज्ञानिक समझ का मतलब विज्ञान की खोजों के बारे में किताबें नहीं होती,

वैज्ञानिक समझ का मतलब है कि हर चीज़ के बारे में सच्चाई खोजी जाय,

यानी भारत की जाति व्यवस्था के बारे में वैज्ञानिक ढंग से खोज करी जाय कि जाति व्यवस्था का इतिहास क्या है इसका भारत की अमीरी और गरीबी से क्या सम्बन्ध है, दलित गरीब क्यों बन गये वगैरह वगैरह,

अगर यह खोजें होंगी तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जिस हिंदुत्व की सर्वश्रेष्ठता के आधार पर सत्ता पर बैठा है वही खत्म हो जायेगी,

इसलिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रभाव में चलने वाली भारत सरकार क्यों चाहेगी कि देश में कोई भी ऐसी पढ़ाई चलाई जाय जिससे राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ का वैचारिक आधार ही नष्ट हो जाय,

इसलिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दबाव में भारत सरकार ने इस साल जेएनयू में रिसर्च की पन्द्रह सौ सीटें कम कर के कुल सत्तर छात्रों को प्रवेश लेने दिया है,

क्योंकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नहीं चाहता कि समाजशास्त्र के विषय में खोजें करी जाएँ,

इस तरह भारत के युवाओं को सत्य की खोज से अगर वंचित किया जाएगा तो उसका क्या परिणाम होगा,

सारी दुनिया के युवा तो सोच और काम में आगे निकल जायेंगे लेकिन भारत का युवा यही कहेगा कि हमारे हनुमान हवा में उड़ते थे और सूर्य को खा जाते थे और मैं तो मंगल का व्रत रखूंगा उससे मैं परीक्षा में पास हो जाऊँगा,

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा और उनकी भारत सरकार आपके बच्चों को मूर्ख बनाना चाहती है,

ताकि इनकी झूठ के आधार पर हड़पी गई सत्ता बनी रहे,

चाहे इसकी कीमत भारत के युवाओं को कुछ भी चुकानी पड़े,

यह भारत के भविष्य की हत्या है,

आप अगर भाजपा को चुनते हैं तो आप संघ को भी चुनते हैं 

आप संघ को चुनते हैं तो आप उसकी विचारधार को भी चुनते हैं 

आप इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि भारत में वर्ण व्यवस्था समाज को ठीक रखने के लिए ज़रूरी है 

जबकि सारी दुनिया जाति व्यवस्था के खिलाफ है 

आप इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि अच्छी स्त्री वह होती है जो घर पर रह कर पुरुष के बच्चे पैदा करे और उन्हें पाले 

जबकि सारी दुनिया की औरतें बराबरी के लिए कोशिश कर रही हैं 

आप इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि पहले ज्ञान था बाद में अज्ञान आ गया

जबकि सारी दुनिया मानती है कि पहले अज्ञान होता है और बाद में ज्ञान का विकास होता है 

आप इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि आपका हिन्दू धर्म सबसे महान और ज्ञान से भरा हुआ है 

जबकि सारी दुनिया मानती है कि हिन्दू समेत सभी धर्म अज्ञान और पुरानी बातों से भरे हुए हैं 

आप अगर सारी दुनिया से कट कर अपने कुँए में मेढक बन कर रहने के लिए तैयार हैं तो ज़रूर भाजपा को चुन सकते हैं 

लेकिन आप बड़े चालाक हैं 

एक तरफ तो आप भाजपा को चुनते हैं उधर अपने बेटे-बेटी को अमेरिका में डालर कमा कर ऐश लूटने के लिए भेज देते हैं 

आप एक हाथ से वैज्ञानिक समझ और प्रगतिशीलता के फायदे भी लूटते हैं 

और दूसरे हाथ से अपने अंध विश्वास से बने हुए अस्तित्व पर गर्व भी करते रहते हैं,

आप जब तक खुद के अज्ञान और गलत को स्वीकार नहीं करेंगे भारत इसी पिछड़ेपन में डूबा रहेगा। 

(हिमांशु कुमार प्रसिद्ध गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रह रहे हैं।)










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