सहारनपुर: गम और गुस्से के बीच सचिन का अंतिम संस्कार; परिजनों ने लगाया प्रशासन पर हत्यारों के संरक्षण का आरोप

इंसाफ की मांग , नईदिल्ली/सहारनपुर, बृहस्पतिवार , 10-05-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली/सहारनपुर। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल वालिया के भाई सचिन वालिया के अंतिम दर्शन के लिए दलित समुदाय के कई हजार लोग उमड़ पड़े। सचिन की कल बुधवार को महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सचिन की हत्या के आरोपियों में फूलन देवी की हत्या के आरोपी शेर सिंह राणा का नाम भी शामिल है। पीड़ित परिवार पुलिस को भी इस वारदात में शामिल मान रहा है और एसपी सिटी को सस्पेंड कर उसके खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग कर चुका है।

कमल वालिया का कहना है कि एक दिन पहले ही उनकी हत्या करने की चेतावनी का वीडियो वायरल कर दिया गया था पर पुलिस चुप्पी साधे बैठी रही। पुलिस पहले ही इस वारदात को संदिग्ध करार दे चुकी है और दावा कर चुकी है कि सचिन को उसके घर के भीतर ही गोली लगी। दु:ख, गुस्से और तनाव के माहौल में भीम आर्मी के सदस्यों ने लोगों से शांतिपूर्वक ढंग से अपने-अपने घर लौटने की अपील की।

मामले में दर्ज एफआईआर। साभार-मीडिया विजिल

सहारनपुर से सटे रामनगर गांव में भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष सचिन वालिया की बुधवार को महाराणा प्रताप भवन में चल रहे महाराणा प्रताप जयंती समारोह से कुछ दूर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना से सहारनपुर में तनाव बना हुआ है। वारदात के बाद पुलिस अफसरों के साथ भीम आर्मी के सदस्यों की तीखी झड़पें भी हुई थीं। 

मामले में दर्ज एफआईआर। साभार-मीडिया विजिल

पुलिस की भूमिका को संदिग्ध मान रहे भीम आर्मी के सदस्य शव को पोस्टमॉर्टम के बाद सौंपने के लिए तैयार नहीं थे। डीएम को ज्ञापन देकर एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह को सस्पेंड कर उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग भी की गई थी। गौरतलब है कि मंगलवार शाम को सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल कर दिया गया था जिसमें कमल वालिया को जान से मारने का ऐलान किया गया था। बताया जाता है कि यह ऐलान करने वाला शख्स सचिन वालिया की हत्या के आरोपियों में शामिल है। यह वीडियो मंगलवार को ही पुलिस को भी फॉरवर्ड कर दिया गया था पर पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया। 

भीम आर्मी के काार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करते हुए।

यहां तक कि महाराणा प्रताप भवन पर तो करीब 800 जवानों के तैनात होने की जानकारी दी जा रही है पर ठीक सामने गली में जहां कमल वालिया का मकान है, वहां एक भी सिपाही मौजूद नहीं था। कमल वालिया ने भी कहा कि उन लोगों के बार-बार इस तरह की आशंका व्यक्त करने के बावजूद जयंती कार्यक्रम की अनुमति तो दे दी गई पर उन लोगों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इस वारदात के बाद ही मृतक पक्ष के आरोप को यह कहकर संदिग्ध करार दे चुके हैं कि प्रथम दृष्ट्या लगता है कि सचिन को गोली उसके घर के भीतर लगी। एसएसपी ने कहा था कि मृतक पक्ष घटनास्थल दिखाने के लिए तैयार नहीं था और घटनास्थल को धो भी दिया गया था। इस वारदात के बाद एक अधिकारी का यह कथित बयान भी काफी वायरल किया गया कि सचिन को तमंचा साफ करते हुए गोली लगी। मृतक पक्ष प्रशासन पर यकीन नहीं कर रहा है कि वह निष्पक्ष जांच करेगा।

मृतक के परिजन व भीम आर्मी के सदस्य रात भर जिला अस्पताल में धरने पर बैठे रहे पर गुरुवार सुबह पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम करा दिया। सचिन वालिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए कई हजार लोग जमा हो गए थे और प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए थे। भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने ही इन लोगों को समझा-बुझाकर शांति के साथ चार-चार, पांच-पांच के समूह में अपने घरों को यह कहकर लौट जाने की अपील की कि उन्हें आगे की रणनीति से अवगत करा दिया जाएगा।

सचिन वालिया की हत्या के आरोप में फूलन देवी की हत्या का आरोपी शेर सिंह राणा, उपदेश राणा, कान्हा राणा और नागेंद्र राणा को नामजद किया गया है। सचिन के परिजनों का दावा है कि शेर सिंह राणा कार्यक्रम में मौजूद था जबकि प्रशासन इस बात से इंकार कर रहा है। गौरतलब है कि एक साल पहले 5 मई को शिमलाना गांव में महाराणा प्रताप जयंती समारोह में भी शेर सिंह राणा मुख्य अतिथि था जब पास के गांव शब्बीरपुर में दलितों के घरों पर हमला बोलकर आगजनी कर दी गई थी।

हत्या का आरोपी उपदेश राणा जिसका वीडियो वायरल हुआ है।

जनमंच के संयोजक और सेनानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसआर दारापुरी ने कहा है कि भीम आर्मी के नेताओं को रासुका लगाकर जेल में बंद रखना और अब हत्या करवाना रणनीति के तहत है ताकि कोई भी अन्याय के विरुद्ध आवाज़ न उठा सके। दलितों के 2 अप्रैल के बंद के बाद भी यही रणनीति अपनाई गयी थी। उन्होंने जनमंच की ओर से मांग की कि सचिन की हत्या के चारों नामजद आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, सचिन के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए और  सरकारी-गैर सरकारी तौर पर किए जा रहे दलित दमन पर रोक लगाई जाए।

चार दिन बाद 9 मई को इस घटना के विरोध में दलित सहारनपुर के गांधी पार्क में इकट्ठा हुए थे तो उन्हें प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली थी। उस दिन भी शहर में दलितों की पुलिस से झड़प और आगजनी की घटनाएं हुई थी। उस दिन हिंसा भड़काने के आरोप में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण आज तक जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट से जमानत मिल जाने के बावजूद उनके खिलाफ रासुका लगा दी गई थी जिसकी अवधि हाल ही में बढ़ा दी गई है। सचिन वालिया के भाई कमल वालिया भी तभी से जेल में बंद थे पर अब उन्हें बेल मिल चुकी है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और उनके मंत्री दलितों को लुभाने के लिए उनके घर जा कर भोजन करने का नाटक करते हैं और आंबेडकर महासभा के स्वयम्भू अध्यक्ष लालजी निर्मल से योगी `दलित मित्र ` का सम्मान प्राप्त करते हैं लेकिन उनके समर्थक राजपूत गोली मारकर दलितों की हत्याएं कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सामंती तत्वों का मनोबल चरम पर है। मुख्यमंत्री स्वयं इन ताकतों के सरगना हैं। वे पहले हिन्दू युवा वाहिनी के सामंती गुंडों के सरगना थे और अब मुख्यमंत्री के तौर पर राजपूत सामंतों को संरक्षण दे रहे हैं।



 








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