दलित एक्ट और आरक्षण पर हमले के खिलाफ 20 अप्रैल को संविधान बचाओ आंदोलन

इंसाफ की मांग , नई दिल्ली, बुधवार , 18-04-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। दलित एक्ट से छेड़छाड़ और जगह-जगह शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण को बेअसर करने की कोशिशों का पूरे देश में विऱोध शुरू हो गया है। इसके तहत 20 अप्रैल को संविधान बचाओ आंदोलन का फैसला किया गया है। इसमें पूरे देश के दलित, आदिवासी, ओबीसी और प्रगतिशील तबकों से शामिल होने की अपील की गयी है। पत्रकार और सोशल मीडिया के बड़े चहरे के तौर पर जाने जाने वाले दिलीप मंडल ने इसकी घोषणा की।

उन्होंने आज एक फेसबुक लाइव में कहा कि देश का संविधान संकट में है और उस पर हमला भी सरकार और न्यायापालिका की तरफ से हो रहा है। लिहाजा उसको बचाने की जिम्मेदारी भी अब जनता को अपने हाथ में उठानी पड़ेगी। इस लिहाज से उन्होंने 20 अप्रैल के कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया है। उनका कहना था कि इस सिलसिले में उनकी दूसरे शिक्षक और छात्र संगठनों से भी बात हो रही है। 

मंडल ने सवालिया लहजे में पूछा कि अगर इस देश में एससी, एसटी और ओबीसी रहते हैं तो फिर सरकार उन्हें क्यों सभी जगहों से काट रही है। क्या 85 फीसदी जनता को व्यवस्था से काट कर कोई शासन चलाया जा सकता है? और इस हिस्से को काटने वाले कौन लोग हैं और किसकी सरकार है?

इसके पहले इसी तरह से 2 अप्रैल के भारत बंद के कार्यक्रम की शुरुआत भी सोशल मीडिया से ही शुरू हुई थी और फिर देखते ही देखते ये पूरे देश का आंदोलन बन गया था। जिसका नतीजा ये रहा कि पूरे देश में बंद अभूतपूर्व रूप से सफल रहा।

संविधान बचाओ आंदोलन की मांगें।

मंडल ने उस दिन सभी लोगों को अपने हाथ में संविधान की एक प्रति लेकर कहीं भी बैठ जाने का आह्वान किया है। उनका कहना था कि कोई जरूरी नहीं है कि भीड़ के साथ ही इस काम को किया जाए। जरूरत पड़ने पर इसे लेकर कोई अकेले भी बैठ सकता है। दिल्ली में ये कार्यक्रम केंद्रीय सचिवालय के पास स्थित शास्त्री भवन के सामने होगा। 

इसमें प्रमुख तौर पर पांच मुद्दे शामिल किए गए हैं। जिसमें यूनिवर्सिटी और कालेज के स्तर पर नियुक्तियों में एससी, एसटी और ओबीसी रिजर्वेशन को फिर से लागू करने की मांग प्रमुख है। ऐसा होने तक यूनिवर्सिटी और कालेज में सभी नियुक्तियों पर रोक लगाने की मांग की गयी है। इसके अलावा एससी-एसटी एक्ट में छेड़छाड़ के मसले पर अदालत के फैसले का इंतजार करने की जगह अध्यादेश लाने मांग इसका अहम हिस्सा है।

इस आंदोलन में न्यायपालिका में दलितों और पिछड़ों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए उनमें आरक्षण व्यवस्था को लागू करने की मांग की गयी है। बताया जा रहा है कि 5 मई 2016 को यूजीसी के नये नोटिफिकेशन के बाद एमफिल और पीएचडी में एससी, एसटी और ओबीसी के छात्रों का प्रवेश रुक गया है। लिहाजा इस नोटिफिकेशन को तत्काल वापस लेने की मांग की गयी है। 

 

https://www.youtube.com/watch?v=1ugdxXfGno0&feature=youtu.be










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