सिद्धरमैया का पलटवार, कहा-भ्रष्टाचार पर पीएम ईमानदार हैं तो लोकपाल की नियुक्ति करें

राजनीति , नई दिल्ली, बुधवार , 07-02-2018


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जनचौक ब्यूरो

बंगलुरू। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के लिए पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला है। सिद्धरमैया ने कहा है कि पीएम को भ्रष्टाचार खिलाफ लड़ाई की अपनी बात को जमीन पर भी उतारनी चाहिए। इसकी शुरुआत उन्हें लोकपाल की नियुक्ति के साथ ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की राकेट की गति से बढ़ी संपत्ति की जांच से करनी चाहिए।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव की अपनी पहली रैली में सिद्धरमैया सरकार की जमकर घेरेबंदी की थी और उसे 10 परसेंट सरकार करार दिया था।

रविवार को हुई इस रैली में पीएम ने कहा था कि “ राज्य में दलाली की संस्कृति और ‘कट’ अपने परवान पर हैं। लोग अब कहते हैं कि कोई भी काम अब 10 परसेंट की दलाली के बगैर नहीं होता है....”

पीएम ने एक ट्वीट के जरिये कहा था कि “कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने अपने पार्टी के हतों को राज्य और जनता के हितों के ऊपर रख दिया है। भ्रष्टाचार और कुशासन परवान पर हैं। किसान, नौजवान, नव मध्यवर्ग और मध्यवर्ग समेत समाज का हर हिस्सा नाखुश है।”

ट्वीट का जवाब देते हुए सिद्धरमैया ने पीएम से अपने इन आरोपों को साबित करने की मांग की है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा है कि “ प्रिय @narendramodi देश का पीएम होने के नाते आपकी बातों की साख होनी चाहिए। इसलिए मैं आपके आरोप “भ्रष्टाचार और कुशासन परवान पर है” को तथ्यों के साथ साबित करने के लिए आप से निवेदन करता हूं।”

मंगलवार की सुबह कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने एक और ट्वीट के जरिये कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि पीएम भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं। सीएम ने उनसे इसे लागू करने की गुजारिश की है। उन्होंने कहा कि क्या इसकी शुरुआत के लिहाज से पीएम लोकपाल की नियुक्ति कर सकते हैं।

उन्होंने कहा था कि “ मैं इस बात से खुश हूं कि पीएम नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के बारे में बात कर रहे हैं। मैं अब उन्हें इसे लागू करने के लिए आमंत्रित करता हूं। शुरू करने के लिए क्या आप: 1. लोकपाल की नियुक्ति; 2. जज लोया की मौत की जांच; 3. जय शाह की राकेट की गति से हुई समृद्धि की जांच; 4. एक साफ-सुथरे शख्स की सीएम के प्रत्याशी के तौर पर नियुक्ति?” कर सकते हैं।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी हैं। प्रधानमंत्री ने रैली में उनकी जमकर तारीफ की थी। लेकिन सिद्धरमैया ने येदुरप्पा पर आरोप लगाया था कि “शख्स जिसने अपने शासन के दौरान भारत के सबसे बड़े खदान घोटाले की अगुवाई की।”

 

इसके साथ ही एनडीटीवी से बातचीत में सिद्धरमैया ने खुद को “मानवता के साथ हिंदू” बताया जबकि बीजेपी नेताओं को श्यूडो हिंदू करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि पीएम गुजरात की तर्ज पर कर्नाटक में भी चुनाव अभियान चलाएंगे। उन्होंने कहा कि मोदी पिछले चुनाव तक लोकप्रिय थे अब ऐसा नहीं रहा। सिद्धरमैया ने सवालिया लहजे में पूछा कि राजस्थान के उपचुनावों में क्या हुआ? वो ये नहीं कह सकते हैं कि हार के लिए उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। उनकी लोकप्रियता में लगातार गिरावट आ रही है।

सिद्धरमैया ने कहा कि विपक्षी पार्टी द्वारा इस चुनाव में हिंदुत्व का कार्ड खेलने की कोई भी कोशिश राज्य में काम नहीं करने जा रही है। उन्होंने कहा कि “कर्नाटक अलग तरह का राज्य है। कर्नाटक में हिंदुत्व काम नहीं करता है क्योंकि यहां का मतदाता परिपक्व और जागरूक है। उनकी बांटने की राजनीति यहां काम नहीं करेगी।”

उन्होंने खुद पर लगाये जाने वाले नास्तिकता के टैग को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “मैं नास्तिक नहीं हूं। मैं ईश्वर में विश्वास करता हूं लेकिन मैं मंदिर नहीं जाता। मैं अपनी कांसीट्यूएंसी के मंदिर में जाता हूं। ईश्वर हमारे भीतर है। बीजेपी वाले श्यूडो हिंदू हैं।”

विपक्षियों द्वारा उनकी सरकार को घोटालों की सरकार बताये जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “कहां है घोटाला?”

उन्होंने अपने मंत्रियों के खिलाफ टैक्स संबंधी छापे को भी खारिज कर दिया। इसके साथ ही 50 हजार घरों के निर्माण में 250 करोड़ रुपये हाउसिंग घोटाले के आरोपों को भी बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि क्या छापे का मतलब सजा होता है? कहां है आईटी का बयान? ये उनकी पार्टी है जिसमें भ्रष्ट लोग शामिल हैं। ये एक सच्चाई है कि बीएस येदुरप्पा जेल गए थे और उनके खिलाफ मामला अभी भी लंबित है।    










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