सिक्किम सीमा पर युद्ध सा माहौल

फिलहाल , , मंगलवार , 04-07-2017


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सत्येंद्र प्रताप सिंह

सिक्किम चीन बॉर्डर पर भारत और चीन के बीच शुरू हुई तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। हालात ये हो गए हैं कि दोनों देशों ने सिक्किम-भुटान-तिब्बत ट्राई जंक्शन पर करीब 3000 हजार सैनिक तैनात कर दिए हैं। ऐसा कई वर्षों बाद देखा जा रहा है। चीन ने भारतीय सेना के बंकर तोड़े जिससे बॉर्डर पर गरमा-गरमी का माहौल बना हुआ है। ऐसे में आर्मी चीफ बिपिन रावत ने खुद गंगटोक में 17 माउंटेन डिविजन और कलिंगपोंग में 27 माउंटेन डिविजन के हेडक्वॉटर का दौरा किया। दरअसल, पूर्वी सिक्किम बॉर्डर पर तैनात किए गए 3000 सैनिक इसी 17 माउंटेन डिविजन के अंतर्गत आते हैं।

सिक्किम में तनाव के बीच चीन ने हिन्द महासागर में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। फोटो साभार: गूगल

सूत्रों की माने तो डोकाला जनरल इलाके में हालात काफी गंभीर हैं। चीन ने सिक्किम नियंत्रण रेखा संकट के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि भारतीय सेना ने चीन की सीमा में घुसपैठ की कोशिश की है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा है कि वो भारत से अनुरोध करते हैं कि जिन जवानों ने सीमा को पार किया है वो उसे वापस बुलाए। भारत-चीन सीमा पर शांति के लिए जरूरी है कि सरकार इसे गंभीरता से ले और सीमा पार करने वाले जवानों को वापस बुलाए। भारत, चीन की क्षेत्रीय सीमाओं और उसकी संप्रभुता का सम्मान करे। 

भारत-अमेरिका रिश्ते से चीन परेशान

अमेरिका और भारत के बीच मजबूत होते संबंध से चीन को परेशानी हो रही है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ट्रम्प व मोदी की मुलाकात पर बीजिंग ने एक बार फिर भारत को धमकी भरे स्वर में चेताया है। चीनी मीडिया ने भारत को 1960 के दशक का उदाहरण दिया है। वहां के अखबार हॉकिश ग्लोबल टाइम्सने लिखा है, 1950 के अंत से 1960 की शुरुआत तक, सोवियत संघ और अमेरिका दोनों ने चीन के खिलाफ भारत कार्डखेलने का प्रयास किया। उस वक्त सरकार ने भारत की नीतियों का समर्थन किया था, लेकिन परिणाम वैसे नहीं आए जैसी उम्मीद थी। लेख में 1962 में चीन और भारत के बीच हुए युद्ध में भारत की हार का जिक्र भी किया गया है। साथ ही लिखा है कि इतिहास गवाह है कि भारत, चीन का सामना नहीं कर सकता है। चीन की नीतियों पर अपनी चिंताओं के बजाय भारत को हमारे साथ संबंध मजबूत करने चाहिए, यह उसकी सुरक्षा और विकास दोनों के लिए आवश्यक है। अखबार ने यह भी लिखा कि अमेरिका, भारत का इस्तेमाल चीन के खिलाफ एक हथियार के रूप में कर रहा है।

भारत  और चीन के बीच इस समय काफी तनाव है। फोटो साभार : गूगल

चीन की सिक्किम पर गिद्ध दृष्टि

अरुणाचल प्रदेश के बाद अब सिक्किम पर भी चीन नजर गड़ाए हुए है। इसके चलते सिक्किम में भारत चीन बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। अब चीन ने भारत को सीधे चेतावनी देते हुए, नियम सिखाने की बात कही है। चीन ने कहा है कि 1890 के सिनो-ब्रिटिश ट्रीटी के तहत यह एरिया उसके इलाके में आता है और इसमें कोई शक की गुंजाइश नहीं है। चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन लू कांग ने कहा है कि इस ट्रीटी (संधि) के मुताबिक सिक्किम का प्राचीन नाम "झी" था। वहीं बीजिंग ने अपने सरकारी मीडिया के जरिये कहा है कि चीन तो सीमा को विवाद का मुद्दा बनाने से बचता है, लेकिन इस बार भारत को नियम सिखाने की जरूरत है।

दरअसल चीन सिक्किम सेक्टर के डोंगलांग इलाके में सड़क बना रहा है जिसे वह जायज ठहरा रहा है। इसे डोकलाम इलाका भी कहते हैं। जिस इलाके में चीन यह सड़क बना रहा है, उस इलाके का एक हिस्सा भूटान के पास भी है। चीन का भारत के अलावा भूटान से भी इस इलाके को लेकर विवाद है। चीन-भूटान के बीच इस इलाके को लेकर 24 बार बातचीत हो चुकी है। उधर चीन ने भारत पर दबाव बनाने के लिए कैलाश मानसरोवर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए नाथू ला दर्रा बंद कर दिया है। हालाँकि चीन ने इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। बहरहाल चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर भी अपना दावा जताता है और इसे दक्षिण तिब्बत का हिस्सा मानता है। यही कारण है की  इसके पहले 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अरुणाचल प्रदेश में धौला सदिया पुल का उद्घाटन के बाद चीन ने भारत से कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में भारत को सावधानी बरतने और संयम से काम लेना चाहिए। विवादित इलाकों का संयुक्त नियंत्रण, शांति और बॉर्डर के इलाकों में सौहार्द बहुत जरूरी है। दोनों देशों के बीच के विवादित मुद्दों को सुलझाया जाना चाहिए।

भारत के सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत। (फाइल फोटो) साभार : गूगल

जेटली ने चेताया तो पुरोहित ने समझाया

रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने जहां कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन को ये समझना चाहिए कि 1962 और 2017 के भारत में बहुत फर्क है। वहीं असम के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत को चीन के साथ जंग से बचना चाहिए, क्योंकि चीन ताकत में भारत से बहुत आगे है। बीजेपी शासित असम के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने कहा कि भारत और चीन 2 साल आगे पीछे आजाद हुए लेकिन आज परिस्थिति ये है कि हम आज चीन से डरते हैं। उत्तर पूर्वी राज्यों के पुलिस अधिकारियों के एक कार्यक्रम में बनवारी लाल पुरोहित ने ये सब कहा। उन्होंने चीन से भारत के पिछड़ने की वजह के लिए भ्रष्टाचार को जिम्मेदार माना है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के राक्षस ने भारत को बर्बाद किया है।

गौरतलब है कि चीन ने भारत को धमकी भरे अंदाज में कहा था कि अगर भारत ने चीनी क्षेत्रसे अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाया तो दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ सकता है। चीन ने कहा है कि भारत को 1962 की जंग से सबक लेना चाहिए और युद्ध के लिए शोर नहीं मचाना चाहिए। 

भारत और चीन के राष्ट्रीय ध्वज।

किसमें कितना है दम?

चीन ने दो टूक कहा है कि भारत को 1962 का युद्ध नही भूलना चाहिए। जवाब में भारत के रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने भी दो टूक अंदाज़ में कहा कि 1962 और 2017 में 55 साल का फर्क है। दरअसल एक ने धमकाया तो दूसरे ने उसको चेताया। बावजूद इसके यदि युद्ध होता है तो परिणाम क्या होगा? चीन से भारत एकमात्र युद्ध 1962 में लड़ा था जो कि हार गया था। हालांकि भारत के रक्षा मंत्री कहते हैं कि 55 साल का फासला है। अब सवाल है कि इन 55 सालों में भारत सैन्य सुरक्षा में कितना मजबूत हुआ है? युद्ध की स्थिति में दोनों में, किसमें कितना है दम? यह जानने के लिए दोनों देशों की सैन्य शक्ति व तैयारी को देखना लाजमी होगा। सच तो यह है कि सेना के तीनों अंग थल, वायु व नौ सेना तीनों में भारत, चीन से पीछे व कमजोर है। एक नज़र दोनों की जमीनी हकीकत व सैन्य स्थिति पर डालते हैं- 

थल सेना : चीन के पास 6457 युद्धक टैंक है तो भारत के पास 4426 है। बख्तरबंद लड़ाकू वाहन चीन के पास 4788 हैं तो भारत के पास 6704 है। स्वचलित वाहन चीन के पास 1710 हैं तो भारत के पास 290 है। रॉकेट प्रोजेक्टर चीन के पास 1770 हैं तो भारत के पास 292 हैं। 

वायु सेना : चीन के पास 1271 एयरक्राफ्ट हैं तो भारत के पास 676 हैं। अटैक एयरक्राफ्ट चीन के पास 1385 हैं तो भारत के पास 809 हैं। ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट चीन के पास 782 हैं तो भारत के पास 857 हैं। ट्रेनर एयरक्राफ्ट चीन के पास 352 हैं तो भारत के पास 323 हैं। हेलिकॉप्टर चीन के पास 912 हैं तो भारत के पास 666 हैं। 

नौ सेना : चीन के पास 1 एयर क्राफ्ट है तो भारत के पास 3 हैं। चीन के पास 51 युद्धपोत हैं तो भारत के पास 14 हैं। चीन के पास 36 विध्वंसक हैं तो भारत के पास 11 हैं। चीन के पास 35 जंगी जहाज हैं तो भारत के पास 23 हैं। चीन के पास 68 पनडुब्बी हैं तो भारत के पास 15 हैं। चीन के पास 220 पेट्रोल क्राफ्ट हैं तो भारत के पास 139 हैं। चीन के पास 31 माइन वारफेयर हैं तो भारत के पास 6 हैं।










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