यूपी के सोनभद्र में भूख, कुपोषण और बीमारी से कई बच्चों की मौत

विशेष रिपोर्ट , , रविवार , 05-11-2017


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जनचौक ब्यूरो

सोनभद्र। एक भूखा झारखंड यूपी के सोनभद्र और राबर्ट्सगंज इलाके में भी तैयार है। यहां भूख, कुपोषण और बीमारियों से मौतें हो रही हैं लेकिन उसका कोई पुरसाहाल नहीं है। सूखे के बाद पैदा खाद्य संकट और उसके नतीजे के तौर पर आयी बीमारियों ने कई मासूमों की जान ले ली है। इसका खुलासा स्वराज अभियान के कार्यसमिति के सदस्य अखिलेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में गयी एक जांच टीम ने किया है।

 

इस टीम ने बभनी ब्लाक के सतवहनी और बरवाटोला गांवों में ग्रामीणों से मुलाकात की जहां पिछले एक सप्ताह में कई बच्चों की मौतें हुई हैं। जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक बभनी ब्लाक के ग्राम सतवहनी में 31 अक्तूबर को डेढ़ वर्ष के बच्चे प्रभु पुत्र धनेश्वर गोंड और रूपा कुमारी पुत्री पन्नालाल उम्र 6 वर्ष की 1 नवम्बर को और बरवाटोला ग्राम पंचायत की अमृता कुमारी पुत्री मेरशाह गोंड उम्र 3 वर्ष, सविता कुमारी पुत्री जय प्रकाश उम्र 14 माह की दिनांक 3 नवम्बर और राम सुंदर पुत्र छत्रधारी उम्र 12 साल की 1 नवम्बर को बीमारी से मौतें हुई थीं। जांच टीम ने पाया कि सोनभद्र जनपद में बारिश न होने से फसलों का नुकसान हुआ है जिससे बभनी ब्लाक में तो खाद्य संकट आ गया है और पहले से ही कुपोषण के शिकार ग्रामीणों के जीवन में सूखे की हालत ने संकट को और भी बढ़ा दिया है। 

जांच टीम ने ग्राम सतवहनी के टोला अधौरा में मृत बच्चे प्रभु के परिवार से मुलाकात कर देखा कि उसकी मां भी बीमारी का शिकार थी। उसे मलेरिया टाइफाइड था उसके प्रदूषित दूध को पीने से हुए संक्रमण के कारण ही बच्चे की मृत्यु हुई है। वह अभी भी बीमार चल रही है और उसके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। पूछने पर उसके परिवार वालों ने बताया कि बभनी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र पर इसलिए जाना नहीं चाहते क्योंकि जो भी बीमारी की हालत में वहां जाते हैं वहां डाक्टर पूरा ईलाज करने की जगह मरीज को थोड़ी बहुत दवा देकर राबर्ट्सगंज जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं और राबर्ट्सगंज जाने के लिए बुलाने पर एम्बुलेंस भी उपलब्ध नहीं होता है। वह नियति पर सब छोड़कर घर बैठ गए हैं। आज भी वह महिला दवा के अभाव में बीमार है। कनवां टोला की सविता कुमारी को बभनी अस्पताल से म्योरपुर स्वास्थ्य केन्द्र भेजा गया जहां से उसे जिला अस्पताल राबर्ट्सगंज रेफर किया गया था पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण उसे परिवार वाले घर ले आए जहां उसकी मौत हो गयी। 

रामसुदंर, अमृता कुमारी और रूपा कुमारी की भी एम्बुलेंस के अभाव में मौत हो गयी। उपरोक्त तथ्यों से स्वतः स्पष्ट है कि आदिवासी गरीबों की जो मौतें हो रही हैं वह इलाज के अभाव में हो रही हैं न कि स्वच्छता के अभाव और झाड़ फूंक से इलाज कराने की वजह से। इसलिए इसका कारण बताते हुए सीएमओं की जांच रिपोर्ट संबंधी बयानबाजी पूरी तौर पर असत्य है और गैरजिम्मेदाराना है। 

ग्रामीण की बात सुनते अखिलेंद्र।

इस सिलसिले में अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को एक पत्र लिखा है और उन्होंने कहा है कि प्रशासन को झूठ फैलाने की जगह सच का सामना करना चाहिए। और समस्या को हलकरने के लिए हर जरूरी उपाय करने चाहिए। पत्र में मांग की गयी कि ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक मौतें ग्रामीणों की न हो इसलिए जरूरी है कि बभनी और म्योरपुर के चिकित्सा केन्द्रों को इस तरह से व्यवस्थित किया जाए कि लोगों को राबर्ट्सगंज जिला अस्पताल जाने की जरूरत ही न रहे और मलेरिया, टाइफाइड कोई ऐसी बीमारी भी नहीं है कि उसके लिए मरीजों को राबर्ट्सगंज भेजा जाए। जो सुविधाएं जिला अस्पताल राबर्ट्सगंज में मिलती हैं उन सुविधाओं को म्योरपुर और बभनी के अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। साथ ही जांच टीम यह भी मांग करती है कि चूंकि आदिवासी ग्रामसभाओं का क्षेत्रफल बड़ा है ग्रामीण वहां विषम स्थितियों में रहते हैं इसलिए हर ग्रामसभा में या दो ग्रामसभाओं को एक ईकाई मानकर उन्हें चिकित्सकीय सुविधा प्रदान की जाए जिन्हें डाक्टर सीधे तौर पर देखें। । 

इस दौरे के बाद आए तथ्यों के आधार पर जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बभनी ब्लाक में बीमारी से पीड़ित लोगों को तत्काल मेडिकल सुविधाएं देने की मांग की गयी। 










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