तो स्पा और मसाज के जरिये होगा रेलवे का घाटा पूरा!

मुद्दा , नई दिल्ली, बुधवार , 12-06-2019


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चरण सिंह

नई दिल्ली। हमारे समाज में धनाड्य लोगों की अय्याशी के लिए विभिन्न शहरों में स्पा (मसाज सेंटर) की व्यवस्था की गई है। वैसे तो इन केंद्रों को मसाज सेंटर का रूप दिया गया है पर जिस तरह से खबरें पढ़ने को मिलती हैं उससे तो ऐसा ही लगता है कि जैसे सेंटर अय्याशी के अड्डे हैं। आये दिन स्पा से सेक्स रैकेट चलाने की खबरें पढ़ने और सुनने को मिलती रहती हैं। बड़ा अजीब लगा जब मीडिया के माध्यम से यह जानाकरी मिली कि हमारा रेलवे मंत्रालय भी ट्रेनों में स्पा चलाने की व्यवस्था कर रहा है। मोदी सरकार में 'मसाज’ को भी यात्रियों की सुविधा से जोड़ लिया गया है। रेलवे के साथ ही मीडिया में भी इस खबर को इस तरह से प्रकाशित किया गया कि जैसे रेलवे मंत्रालय ट्रेनों में स्पा चलाकर कोई कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा हो। स्पा की आड़ में ट्रेनों में क्या-क्या होगा? कौन नहीं जानता। तो यह मान लिया जाए कि रेलवे को घाटे से उबारने के लिए अब मोदी सरकार ट्रेनों में धंधा भी कराएगी।

मोदी की सरकार में किसी भी प्रस्ताव या निर्णय से ऐसा नहीं लगता कि उनकी प्राथमिकता में कहीं से भी गरीब आदमी है। जहां देश में पैसेंजर और स्लीपर ट्रेनों में यात्रियों के लिए शौचालय, पानी और बैठने की सही से व्यवस्था नहीं है। यात्रियों को तरह-तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गर्मियों में लंबी सफर की ट्रेनों में यात्री भूसे की तरह भरे होते हैं। गर्मी की छुट्टियों में पंजाब और दिल्ली से जाने वाली ट्रेनों में हाल यह है कि लोग नीचे कपड़े बिछाकर किसी तरह से सफर कर रहे हैं। जनसेवा एक्सप्रेस में तो कपड़े का झूला बनाकर उसमें बैठकर सफर करने को लोग मजबूर हैं।

इस भीषण गर्मी में दम घुटने से यात्रियों की मौतों की बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में मोदी सरकार आम यात्रियों को उपलब्ध होने वाली बुनियादी सुविधाओं के बजाय ट्रेनों में सम्पन्न यात्रियों के लिए मसाज की व्यवस्था कर रही है। जो यात्री मसाज कराएंगे निश्चित रूप से उसका अतिरिक्त चार्ज लगेगा। ऐसे में बिना बजट के आम लोगों के भी स्पा की ओर खिंचे आने से इनकार नहीं किया जा सकता है। एक तरह से इस योजना को यात्रियों के ठगे जाने से भी जोड़कर देखा जा सकता है। निश्चित रूप से ट्रेनों में टिकटों की बिक्री बढ़ेगी। जिन यात्रियों को ट्रेन में अय्याशी का आनंद उठाना होगा। वह बार-बार बिना काम के भी इन ट्रेनों में सफर करेंगे।

ट्रेनों में स्पा चलाने की जानकारी रेलवे बोर्ड के मीडिया एवं संचार निदेशक राजेश वाजपेयी के हवाले से मीडिया में आई है। उनका कहना है कि पश्चिम रेलवे क्षेत्र के रतलाम मंडल ने यह प्रस्ताव तैयार किया है।

इस अधिकारी के अनुसार रेलवे इंदौर से चलने वाली 39 रेलगाड़ियों में यह सेवा उपलब्ध कराएगा। इसमें देहरादून-इंदौर एक्सप्रेस (14317), नयी दिल्ली-इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस (12416) और इंदौर-अमृतसर एक्सप्रेस (19325) भी बताई गई हैं। मतलब सभी ट्रेनें लंबे सफर की हैं।

इस देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जहां रेल मंत्रालय को आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए रेलवे में सुविधा देने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं पैसा कमाने के चक्कर में ट्रेनों में अय्याशी की व्यवस्था की जा रही है। ऐसा लग रहा है कि जैसे रेलवे यात्रियों को कोई ऐसा तोहफा देने जा रहा हो जिससे कि देश झूम उठे। यह अधिकारी इस सुविधा को इतिहास में पहली बार बता रहा है। बिल्कुल भाई। मोदी सरकार में इन सुविधाओं के अलावा और उम्मीद ही क्या की जा सकती है। तभी तो उनके समर्थक कहते हैं कि मोदी है तो मुमकिन है। रेलवे में जिन लोगों को रोजगार मिला हुआ था उनका रोजगार तो छीना जा रहा है। निजीकरण हो रहा है। अब जब निजीकरण होगा तो यह सब तो होगा ही।

यह दिलचस्प है कि जो लोग ट्रेनों में अय्याशी करने के लिए तरह-तरह के तरीके ढूंढते थे उनके लिए यह व्यवस्था खुद सरकार की ओर से हो जा रही है। बस आपके पास पैसा होना चाहिए। पैसा तो जनता का हक मारकर लूटा ही जा रहा है। इसी तरह का पैसा तो स्पा जैसी जगहों पर जाता है। रेलवे ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि स्पा में खर्च होने वाले पैसे पर जीएसटी लगेगा या नहीं ?

ऐसा लग रहा है कि जैसे लोग बौरा गये हों। मोदी सरकार में फसल के बीमा के नाम पर कंपनियों ने अरबों रुपये कमाये पर किसान को कोई फायदा नहीं मिला। अब पेंशन के नाम पर किसानों के साथ ही छोटे व्यापारियों और रेहड़ी पटरियों वालों को ठगने की तैयारी है। जबकि सरकार इसे ऐसे दर्शा रही है कि जैसे जनता पर कोई एहसान कर रही हो। 20 साल तक लोगों को पैसा जमा करना है तब जाकर पेंशन मिलने का नंबर आएगा। आएगा या नहीं आएगा यह तो समय ही बताएगा। पर बीमा कंपनियां जरूर अरबों और खबरों में खेल जाएंगीं। ऐसा ही रेलवे मंत्रालय में हो रहा है। निजी कंपनियों को धड़ाधड़ ठेके दिये जा रहे हैं। इन निजी कंपनियों को यात्रियों की सुविधाओं से क्या? ये तो यह योजना बनाएंगी कि उनका फायदा कैसे हो। भले ही इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े। 

इस अधिकारी का कहना है कि इससे रेलवे को सालाना 20 लाख रुपये की आय होने की उम्मीद है। इसके अलावा उनकी नजर में सेवा प्रदान करने वाले 20,000 अतिरिक्त यात्रियों के चलते अतिरिक्त टिकट बिक्री बढ़ने से साल भर में 90 लाख रुपये की आय बढ़ने का अनुमान है। मेरा मानना है कि इस योजना में गुप्त रूप से अरबों रुपये महीना कमाया जाएगा। यह महाशय एक ओर तो यह कह रहे हैं कि यह उनका प्रस्ताव है। दूसरी ओर कह रहे हैं कि इस सेवा को 15 से 20 दिनों में शुरू कर दिया जाएगा। मतलब सब तैयारी हो चुकी है। विभाग से लेकर मंत्रालय तक। प्रस्ताव तो मात्र औपचारिकता है।

समझने की जरूरत यह है कि भले यह जानकारी रेल विभाग की ओर से आई हो पर इस योजना को रेलवे मंत्रालय नहीं बल्कि कोई निजी कंपनी चलाएगी। अधिकारी का कहना है कि यह सेवा सुबह छह बजे से रात 10 बजे के बीच रहेगी। इन महाशय ने शरीर के अंगों की मालिस के रेट भी बताये हैं। इनके अनुसार यात्रियों को सिर और पैर की मालिश के लिए प्रत्येक के लिए 100 रुपये देने होंगे। भाई शरीर में और भी तो दूसरे अंग हैं। उनके और ज्यादा होंगे। जैसा अंग वैसे पैसे। और भी सुविधाएं होंगी जो गुप्त रूप से होंगी। जैसे कि स्पा में होती हैं।

इस तरह की योजनाओं में किसी को संदेह भी नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार कहा है कि वह स्वभाव से व्यापारी हैं। व्यापारी हैं तो देश में व्यापार तो होगा ही। वह किसी भी तरह का हो सकता है।

दरअसल नरेंद्र मोदी ने देश को पूरी तरह से कारपोरेट संस्कृति में ढालने का एजेंडा तैयार कर दिया है। जैसे कि कारपोरेट संस्कृति में मैनेज करने का खेल बड़े स्तर पर होता है। इसमें सबसे अधिक इस्तेमाल महिलाओं का होता है। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि मोदी सरकार दूसरे क्षेत्रों में भी कई धंधे करने वाली है। अब ट्रेन में मसाज की व्यवस्था है तो ड्राइवर क्यों पीछे रहेगा ? ट्रेनों के ड्राईवर भी तो लंबे सफर की ट्रेनों में थक जाते हैं। उन्हें भी तो मसाज की जरूरत होगी। वह बात दूसरी है कि ट्रेन रोक-रोकर कर ड्राइवर मसाज कराने में लग जाएं।

(चरण सिंह पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं।)








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