"स्वराज इंडिया के दिल्ली में नोटा अभियान से भाजपा को फायदा"

राजनीति , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 09-05-2019


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जनचौक ब्यूरो

राजनीतिक पार्टी स्वराज इंडिया ने अपने कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव में 12 मई को  दिल्ली  में नोटा का बटन  दबाने की अपील की है इसके लिए पर्चा निकाला गया है और पार्टी द्वारा अभियान चलाया जा रहा है इसकी जानकारी स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता में 20 अप्रैल 2019 को दी और उसके लिए एक प्रेस नोट भी जारी किया जो उनकी पार्टी की वेबसाइट पर उपलब्ध है

लेकिन स्वराज अभियान से जुड़े उसके एक हिस्से ने उसका विरोध किया है। उसका कहना है कि इससे बीजेपी को फायदा मिलेगा। और लोकतंत्र के पक्ष में खड़ी किसी भी ताकत के लिए यह स्टैंड उचित नहीं हो सकता है। स्वराज अभियान के एक नेता अजीत यादव का कहना है कि वो लोग वैकल्पिक राजनीति को खड़ा करने के लिए  प्रयासरत हैं लिहाजा उनका यह कहना जरूरी है कि स्वराज इंडिया और अध्यक्ष योगेंद्र यादव द्वारा दिल्ली में नोटा दबाने का निर्णय वैकल्पिक राजनीति के लिए हानिकारक है और इससे भाजपा को फायदा होगा  

अजीत यादव का कहना था कि चूंकि वो लोग स्वराज अभियान में भागीदार हैं लिहाजा उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो गया था। 

उन्होंने कहा कि स्वराज इंडिया के इस निर्णय से अपनी असहमति सार्वजनिक करने और दिल्लीवासियों से भाजपा हराने को वोट करने की अपील करने का स्वराज अभियान के अध्यक्ष प्रशांत भूषण का कदम स्वागत योग्य है।

उन्होंने बताया कि जब लोगों ने सवाल खड़े किए तो 27 अप्रैल को स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने बयान जारी कर पार्टी के निर्णय का बचाव किया उन्होंने सफाई दी कि अक्तूबर 2018 में स्वराज इंडिया की नेशनल कौंसिल ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की भूमिका के लिए जो दिशा तय की थी उसमें तीन मूलभूत दिशा -निर्देश थे -

1.हमें भाजपा को हराने में योगदान करना है  2. हमें विपक्ष के किसी महागठबंधन में शामिल नहीं होना है 

3.हमें वैकल्पिक उम्मीदवारों की शिनाख्त और समर्थन करना है

दिल्ली इकाई के निर्णय को इस दिशा के अनुरूप मानते हुए वे कहते हैं कि इसका हमारी मूल स्थापना से कोई विरोध नहीं है कि भाजपा भारतीय गणतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है

यादव ने कहा कि कोई भी राजनीतिक व्यक्ति आसानी से समझ सकता है कि योगेंद्र यादव की सफाई अंतर्विरोधों से भरी हुई है और वे नोटा के निर्णय को अपनी पार्टी की दिशा के हिसाब से सही नहीं ठहरा पाए हैं। 

उन्होंने बताया कि बकौल योगेंद्र यादव पार्टी की नेशनल कौंसिल ने पहला दिशा-निर्देश दिया कि पार्टी को भाजपा को हराने में योगदान करना है नोटा के उपयोग से भाजपा को हराने में क्या योगदान हो सकता है ? जाहिर है नहीं हो सकता चूंकि नोटा को दिए स्वराज इंडिया के कार्यकर्ताओं के वोट भाजपा के विरुद्ध किसी प्रत्याशी के वोटों में नहीं जोड़े जा सकते दिल्ली में नोटा अभियान स्वराज इंडिया की नेशनल कौंसिल के इस पहले निर्देश  कि भाजपा को हराने में योगदान करना है के विरुद्ध है नोटा अभियान द्वारा कांग्रेस , आप और भाजपा तीनों को बराबर मान लिया जाता है

यह पार्टी की इस प्रस्थापना के विरुद्ध है कि भाजपा भारतीय गणतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है चूंकि जब भाजपा को सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है तो इसका सीधा मतलब हुआ कि दूसरी कोई भी पार्टी उससे कम खतरनाक हुई। जाहिर है कि सब धान सत्ताईस सेर नहीं हो सकते। भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा, आप आदि पार्टियां एक जैसी नहीं हैं सभी में कुछ कुछ अंतर है नोटा अभियान द्वारा भाजपा, कांग्रेस आप को एक तराजू पर तौलना तो वैचारिक तौर पर सही है और   राजनीतिक तौर पर। इसको लोग वैचारिक तौर पर एक अराजकतावादी विचार कहते हैं और राजनीति में अवसरवाद  

जिन दो अन्य निर्देशों की बात की जा रही है वो जाहिर है कि भाजपा को हराने में योगदान देने के  राजनीतिक कार्यभार से ही जुड़े हुए हैं विपक्ष के किसी महागठबंधन का हिस्सा बने बिना भी और वैकल्पिक उम्मीदवारों की शिनाख्त और समर्थन कर भी भाजपा को हराने में योगदान दिया जा सकता है  

यह कहने से कि दिल्ली यूनिट द्वारा की गई घोषणा केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक सीमित है और अधिक सवाल खड़े होते हैं दरअसल दिल्ली ही वह प्रदेश है जहां स्वराज इंडिया ने विधिवत तौर पर एमसीडी का चुनाव लड़ा और सौ से अधिक उम्मीदवार देकर पूरे प्रदेश के स्तर पर नया राजनीतिक विकल्प देने का प्रयास किया जाहिर है जहां तक स्वराज इंडिया /स्वराज अभियान का सवाल है दिल्ली की तुलना किसी अन्य प्रदेश से करना उचित नहीं होगा दिल्ली में की गई आपकी राजनीतिक कार्यवाही आपकी राजनीतिक दिशा का मानदंड होगी

 

उन्होंने कहा कि स्वराज इंडिया पार्टी, पार्टी अध्यक्ष योगेंद्र यादव और पार्टी की  दिल्ली यूनिट को नोटा अभियान पर पुनर्विचार करना चाहिए और अपनी पार्टी की दिशा के अनुरूप 12 मई को भाजपा को हराने में सक्रिय योगदान करना चाहये। 








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Umesh Chandola :: - 05-09-2019
योगेंद्र यादव ने मारुति सुजुकी के मजदूरों को बेगुनाह होने के बावजूद यह अपराध अपने सिर में लेने की बात की थी ।। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का कहना कि महिला का आरोप न्यायपालिका पर हमला है । लेकिन न्यायपालिका पर तो न जाने कब से हमला जारी है। जब दलितों का सामूहिक नरसंहार बिहार में हुआ हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई। ऐसे दर्जनों बड़े और करोड़ों छोटे उदाहरण दिए जा सकते हैं । स्व जज लोया और 100 करोड़ की रिश्वत देने वाला जज और उसका राजनीतिक पिता आज भी इंसाफ की ओर के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर स्वर्ग से नजरें जमाए हुए है । और मारुति के मजदूरों हेतु जब चंडीगढ़ हाई कोर्ट के जज ने कहा था कि अगर मारुति के मजदूरों को जमानत दे दी तो विदेशी निवेश प्रभावित होगा एवं ताजा मामले में गुड़गांव कोर्ट द्वारा बिना एक भी सबूत के 13 मजदूरों को आजीवन कारावास देना यह शायद हमारे मुख्य न्यायाधीश को न तो कानून पर हमला जान पड़ता है न न्यायपालिका पर हमला जान पड़ता है न संविधान पर । आखिर जैसे पूरा देश सिमटकर भाजपा पर चला आया है बल्कि एक व्यक्ति मोदी में आ गया ऐसे ही पूरी न्याय व्यवस्था एक व्यक्ति में घनीभूत हो गई हैं । आप 25 साल बाद तो आडवाणी जोशी के ऊपर चार्जशीट देते हैं। न्याय भी 250 साल में होगा। वो भी मारुति सुजुकी टाइप। पी यू डी आर/ पीयूसीएल जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित एक मानवाधिकार संस्था है जिसने 2018 में मारुति के अन्यायी फैसले के खिलाफ एक लेख प्रकाशित किया था ।। पी यू डियर ने मारुति पर 2000 सन के बाद 3 अंग्रेजी और एक हिंदी रिपोर्ट प्रकाशित की है जो साइट पर उपलब्ध है कृपया पढें और खुद फैसला करें कि न्यायपालिका और संविधान पर हमला मारुति मजदूरों के केस में हुआ था या एक महिला द्वारा जो कि एक व्यक्ति मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगा रही थी ना कि एक मुख्य न्यायाधीश की हैसियत से उन पर आरोप लगा रही थी। जज को 500 करोड़ रुपए रिश्वत तो पक्का मिल गया है । भारत के ही नहीं पर दुनिया भर के सारे ही कानून के विद्यार्थियों शिक्षकों को इस मारुति के केस को पढ़ना अनिवार्य बना देना चाहिए ताकि उन्हें पता चले के जज को क्या नहीं करना चाहिए और न्याय कितनी खोखला शब्द है ।https://pudr.org/majadauuraon-kao-kathaora-sajaa-daenae-vaalae-maarauutai-kaesa-kae-anayaayai-adaalatai-phaaisalae