सरकार के संरक्षण में तमिलनाडु में 1 लाख करोड़ का खनन घोटाला

दक्षिण का झरोखा , , शनिवार , 05-08-2017


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रामचंद्रन

तमिलनाडु खनन घोटाला पार्ट-2

हमने पहले चर्चा की थी कि संध्या ने पीएमओ और अन्य सरकारी विभागों को पत्र लिखकर खनन घोटाले पर ढेरों सवाल किये हैं। आखिर है क्या यह तटीय बालू खनन घोटाला? दरअसल तमिलनाडु के तिरुनलवेली, थूतूकुडी और कन्याकुमारी जिलों में जो तटीय बालू है उसमें कुछ बहुत कीमती खनिज पदार्थों का मिश्रण पाया जाता है, जैसे गार्नेट, इलमेनाइट, रूटाइल, ल्यूकॉक्सीन, ज़िरकॉन और मोनाज़ाइट। इनमें से मोनाज़ाइट को परमाणु खनिज माना जाता है और इससे एक परमाणु ईंधन यानि थोरियम तैयार किया जा सकता है।

बालू खनन।

खनन का खेल

कुछ खनन बैरन ने तटीय बालू और खनिज पदार्थों का खनन करने और निर्यात करने के लिए लाईसेंस प्राप्त कर लिया। पर इन्होंने जितने की अनुमति ली उससे कहीं अधिक मात्रा मंए अवैध खनन और निर्यात करना आरंभ किया। कुछ ऐसे खनिज पदार्थों का खनन भी इन्होंने किया, जिनके खनन पर रोक लगी थी। मद्रास उच्च न्यायालय ने 2015 में तटीय बालू के अवैध खनन के विरुद्ध जनहित याचिका की सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में पीयूसीएल के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी सुरेश को ऐमिकस क्यूरी नियुक्त किया। वी सुरेश ने 20 जून 2017 को अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी। 

एक स्वतंत्र महिला खोजी पत्रकार संध्या रविशंकर, जो लगातार तटीय बालू खनन घोटाले का पर्दाफाश कर रही थीं और बालू माफिया की धमकियां भी सह रही थीं, प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखती हैं और द हिन्दू अखबार (10 जुलाई 2017) में रिपोर्ट के मुख्य अंशों को एक लेख के माध्यम से उजागर करती हैं। रिपोर्ट में जो बात उभरकर सामने आई वह है कि दो दशक से तमिलनाडु सरकार और केंद्र की लापरवाही या मिलीभगत के कारण व्यापक पैमाने पर अवैध खनन और निर्यात बदस्तूर जारी है और डीएई तथा खनन मंत्रालय और कई सरकारी विभाग इसमें शामिल हैं। यह खनन के आंकड़ों के आधार पर पाया गया।

जयललिता की दोस्त और एआईएडीएमके की चीफ शशिकला।

आंकड़ों में घोटाला

रिपोर्ट के अनुसार 2000-2017 के बीच जो 1.5 करोड़ मैट्रिक टन कच्चे बालू का खनन हुआ उसमें से 57 प्रतिशत का खनन अवैध है! रिपोर्ट ने उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उठाई है।

फरवरी 1, 2015 की इकनॉमिक टाइम्स में एक न्यूज़ रिपोर्ट आई, जिसमें सन्ध्या रविशंकर ने आंकलन किया कि अवैध खनन और निर्यात का मूल्य 1 लाख करोड़ है। अवैध खनन का ‘किंगपिन’ वैकुन्ठराजन है, ऐसा कहती हैं संध्या, और उसके आदमी लगातार संध्या को धमका रहे हैं। मीडिया हल्कों में चर्चाएं थीं कि जयललिता के एआईएडीएम के भारी राजनीतिक फंडिंग की मांग से बचने के लिये वह शशिकला के पूर्व पति, नटराजन से नज़दीकी बढ़ाने लगा और उसके माध्यम से कुछ विधायकों को जयललिता के विरुद्ध भड़काने लगा। जयललिता को जब पता चला तो उन्होंने गुस्से में सितम्बर 2013 को तटीय बालू खनन पर तब तक प्रतिबन्ध लगा दिया, जब तक कि अवैध खनन पर जांच की रिपोर्ट न आ जाती। एक उच्च-स्तरीय समिति आईएएस अधिकारी श्री गगनदीप सिंह बेदी की अध्यक्षता में गठित की गई। उन्होंने व्यापक पैमाने पर अवैध खनन की पुष्टि की। परन्तु आनन-फानन में उनका तबादला कर दिया गया, क्योंकि वैकुन्ठराजन के पास बेशुमार धन की ताकत थी।

मद्रास हाईकोर्ट।

वैकुंठराजन है किंगपिन

2013 के प्रतिबन्ध के बाद वैकुण्ठराजन चन्द्रबाबू नायडू से संपर्क करने गए क्योंकि नायडू ने उनके वीवी मिनरल्स को आन्ध्र प्रदेश में आमंत्रित किया ताकि वे वहां तटीय बालू खनन का काम करे; इस पर मोदी से बात भी की गई। इसी पृष्ठभूमि में डीएई और खनन मंत्रालय ने बयान दे डाला कि भारत में परमाणु खनिज के निर्यात पर कोई प्रतिबन्ध नहीं था। 

उसके बावजूद कि तमिलनाडु में अवैध खनन की कई खबरें अखबारों में छपीं, गगनदीप सिंह बेदी समिति की रिपार्ट ने भी पुष्टि की, मद्रास हाई कोर्ट ने भी प्रथम-दृष्ट्या यही पाया, ऐमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में भी इन्हीं बातों को उजागर किया,डीएई और खनन मंत्रालय ने वी वी मिनरल्स के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। बल्कि उन्होंने लाइसेंस और अनुमति भी दे दी। खनन माफिया के साथ साठ-गांठ के मामले में भी किसी अधिकारी को सजा नहीं दी गई।

इस बीच, 2 अगस्त, 2017 को, ओडिसा के अवैध खनन मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि दोषी लोगों से अवैध खनन द्वारा प्राप्त खनिज पदार्थों की पूरी कीमत वसूल की जाए। अब देखना बाकी है कि संध्या रविशंकर के पत्रों पर पीएमओ की क्या प्रतिक्रिया आती है। 

 










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