दक्षिण में विस्तार के “मोदी सपने” को बड़ा झटका, टीडीपी ने किया एनडीए से किनारा

राजनीति , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 08-03-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी)के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र में भाजपा की अगुआई वाली सरकार से अपने दो मंत्रियों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री पी अशोक गजपति राजू और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री वाईएस चैधरी ने पार्टी हाईकमान का निर्देश मिलने के बाद आज पीएम को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। इस बीच पीएम मोदी ने नायडू से बात की है। टीडीपी सूत्रों का कहना है कि इस बातचीत में नायडू ने अलग राह अपनाने की अपनी मजबूरियों के बारे में उन्हें बताया।  

2019 आम चुनाव में टीडीपी एनडीए में बनी रहेगी या नहीं इसका फैसला बाद में किया जाएगा। इसका निर्णय होने के बाद पत्र से एनडीए का अवगत करा दिया जाएगा। इस राजनीतिक घटनाक्रम का फौरी कारण आंध्र प्रदेश को ‘‘विशेष राज्य’’ का दर्जा न देना है। लेकिन टीडीपी के केंद्र सरकार से बाहर होने के गूढ़ राजनीतिक निहितार्थ हैं। ऐसा नहीं है कि टीडीपी ही केंद्र सरकार के कामकाज या बीजेपी की तानाशाही से खिन्न है। समय समय पर एनडीए में शामिल कई दल अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अभी हाल ही में बिहार सरकार में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी एनडीए से किनारा कर राजद गठबंधन में शामिल हो गए। शिवसेना, अकाली दल और केंद्र सरकार में मंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा का भी एनडीए से रिश्ता सहज नहीं है। ये सब कभी भी एनडीए का दामन छोड़ सकते हैं।

ताजा घटनाक्रम पिछली रात को घटा। चंद्रबाबू नायडू ने देर रात एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा- ‘‘हमने मोदी सरकार में शामिल टीडीपी के दो केंद्रीय मंत्रियों अशोक गजपति राजू और वाईएस चैधरी को इस्तीफा देने के लिए कहा है। यह हमारा बिल्कुल सही फैसला है। केंद्र सरकार ने आंध्र के लिए अपने वादे पूरे नहीं किए। हम बजट के शुरुआत से ही संसद में मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, पर अब तक कोई जवाब नहीं मिला।‘‘

‘‘टीडीपी और आंध्र सरकार ने 4 साल तक धैर्य रखा। मैंने सभी तरीकों से केंद्र सरकार को समझाने की कोशिश की। इसके लिए वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने का प्रयास किया, ताकि उन्हें अपने फैसले से अवगत करा सकूं। लेकिन केंद्र कुछ भी सुनने के मूड में नहीं है। मुझे पता नहीं कि आखिर हमसे क्या गलती हुई, क्यों वो (केंद्र) ऐसी बातें बोल रहे हैं?‘‘ 

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आंध्रप्रदेश को ‘‘विशेष राज्य’’ और ‘‘स्पेशल पैकेज’’ न देने के बाद नायडू ने यह निर्णय लिया है। नायडू ने कहा कि, केंद्र का रवैया ‘‘बहुत दुखदायक और अपमानजनक‘‘ था।

चंद्रबाबू नायडू कहते हैं कि ‘‘शिष्टाचार के तहत मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सूचित करने की कोशिश की ... यह हमारी जिम्मेदारी है कि गठबंधन सहयोगी के रूप में प्रधानमंत्री को हमारे पार्टी के फैसले के बारे में सूचित करें। मेरे ओएसडी ने प्रधानमंत्री के ओएसडी से बात करने कोशिश की लेकिन प्रधानमंत्री उपलब्ध नहीं थे। ‘‘  

टीडीपी की घोषणा पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि, ‘‘केंद्र  सरकार आंध्र प्रदेश को एक विशेष राज्य के बजाए विशेष पैकेज देने को तैयार थी। सरकार 14वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार  पूर्वोत्तर के राज्यों और तीन पहाड़ी राज्यों को ही विशेष राज्य मानती है।’’  

टीडीपी के सांसदों, मंत्रियों और विधायकों के साथ एक टेली कांफ्रेंस  के बाद, नायडू ने कहा कि जेटली के दृष्टिकोण को देखते हुए उन्हें निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्योंकि उन्होंने आंध्र की ‘भावनात्मक और राजनीतिक आंदोलन‘ के रूप में विशेष श्रेणी की स्थिति की मांग को खारिज कर दिया। 

मैं पिछले चार सालों में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के लिए 29 बार दिल्ली गया हूं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।  हमारे धैर्य को हल्के में लिया गया। केंद्र ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे हम पैसों के लालची हैं और हम वह पैसा चाहते हैं जो हमारा नहीं है। हमारी मांग यह है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के लिए जो तय किया गया था, वह कहां है। लेकिन जेटली इसे इस तरह से पेश कर रहे हैं जैसे कि हम देश के रक्षा बजट की कीमत पर पैसे मांग रहे हैं।  

नायडू कहते हैं कि पिछले दिनों हमने आंध्र प्रदेश विधानसभा से कहा था कि इस मुद्दे पर समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं है। वह राज्य के हितों की रक्षा के लिए लड़े  हैं और लड़ते रहेंगे।

नायडू कहते हैं कि इस समय आंध्र प्रदेश को मदद की जरूरत है क्योंकि राज्य के विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश को राजस्व हानि हुई है। सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला हैदराबाद तेलंगाना में चला गया है। मैं आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा का दर्जा देने से इनकार करने पर परेशान हूं। यह आंध्र के लोगों के आत्मसम्मान का विषय है और केंद्र को राज्य के विभाजन के दौरान किए गए आश्वासन को पूरा करना चाहिए।  

आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद उपजी आर्थिक परेशानियों से वित्त मंत्री अरुण जेटली सहमति दिखाते हैं। जेटली कहते हैं कि वह इस आकलन से सहमत हैं कि आंध्र प्रदेश आर्थिक रूप से पीड़ित है क्योंकि तेलंगाना को अलग राज्य बनाया गया था। विभाजन के समय केंद्र द्वारा की गई प्रत्येक प्रतिबद्धता का सम्मान करेगी। 

आंध्र प्रदेश के लोग विभाजन नहीं चाहते थे। तेलंगाना बनने के बाद आंध्र प्रदेश को सहायता और संसाधन दी जानी थी। लेकिन आंध्र प्रदेश के जरूरत के अनुरूप आर्थिक मदद नहीं दी गयी।  

टीडीपी के इस राजनीतिक रूख पर विता मंत्री अरुण जेटली कहते हैं कि ‘‘राजनीतिक प्रतिक्रिया या मुद्दे पैसे की मात्रा में वृद्धि नहीं कर सकते क्योंकि केंद्र के पास कोई निशुल्क-फ्लोटिंग फंड नहीं है। भारत में हर राज्य को केंद्रीय निधि पर बराबर का अधिकार है। ‘‘

आंध्र के विभाजन के बाद राजस्व की जो कमी आई है हम उसकी क्षतिपूर्ति कर रहे हैं। किसी भी राज्य में राजस्व में कमी आने पर केंद्र सरकार राजस्व घाटे को पूरा करने का ध्यान रखती है। केंद्र सरकार  कर में से राज्यों को 10 प्रतिशत से 42 प्रतिशत देती है। पहले यह 32 प्रतिशत था। आंध्र प्रदेश के मामले में राजस्व घाटे का प्रावधान किया गया था। 

दरअसल, विशेष राज्य का दर्जा मिलने पर उक्त राज्य को केंद्रीय योजनाओं में 90 फीसदी धनराशि का भुगतान किया जाता है। जबकि सामान्य श्रेणी के राज्यों में यह 60 फीसदी है।   










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